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बंगाल के 12 हजार ईंट भट्ठे जल्द होंगे बंद! जानें क्‍या है कारण

Updated at : 23 Dec 2018 8:22 AM (IST)
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बंगाल के 12 हजार ईंट भट्ठे जल्द होंगे बंद! जानें क्‍या है कारण

अमर शक्ति भट्ठेवाली ईंट का प्रयोग रोकने को केंद्र ला रहा नयी पॉलिसी पर्यावरण बचाने के लिए केंद्र सरकार की पहल कोलकाता : केंद्र सरकार जल्द ही भट्ठोंवाली ईंटों पर प्रतिबंध लगाने जा रही है. पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र भट्ठों वाली ईंटों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर […]

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अमर शक्ति
भट्ठेवाली ईंट का प्रयोग रोकने को केंद्र ला रहा नयी पॉलिसी
पर्यावरण बचाने के लिए केंद्र सरकार की पहल
कोलकाता : केंद्र सरकार जल्द ही भट्ठोंवाली ईंटों पर प्रतिबंध लगाने जा रही है. पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र भट्ठों वाली ईंटों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है. केंद्र सरकार का यह नियम अगर बंगाल में लागू होता है, तो यहां के लगभग 12 हजार ईंट भट्ठे बंद हो जायेंगे.
बताया जा रहा है कि सबसे पहले केंद्र सरकार देश में चल रहीं अपनी परियोजनाओं में ही भट्ठे वाली ईंट के इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है.
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को यह जांचने का निर्देश दिया है कि क्या उसकी निर्माण परियोजनाओं में भट्ठों वाली ईंट के उपयोग को प्रतिबंधित किया जा सकता है या नहीं. इस मामले में मंत्रालय के निर्देश के बाद सीपीडब्ल्यूडी ने अपने अधिकारियों से प्रतिक्रिया देने को कहा है. गौरतलब है कि सीपीडब्ल्यूडी केंद्र की सबसे बड़ी निर्माण एजेंसी है. यह पूरे देश में केंद्र सरकार और स्वायत्तशासी संस्थाओं के कार्यालयों का निर्माण करने का काम करती है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अपशिष्ट सामग्री का उपयोग करके पर्यावरण के अनुकूल ईंटों का उत्पादन करने की तकनीक उपलब्ध है. यही वजह है कि मंत्रालय ने सीपीडब्ल्यूडी को यह जांचने का निर्देश दिया है कि क्या भट्ठों वाली ईंट के उपयोग को प्रतिबंधित किया जा सकता है.
बंगाल में हैं लगभग 12 हजार ईंट-भट्ठे
जानकारी के अनुसार, बंगाल में लगभग 12000 ईंट-भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जहां 240000 से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त है.राज्य सरकार ने पहले ही ईंट-भट्ठों के लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार ईंट-भट्ठा मालिकों को कई नियम पालन करने का निर्देश दिया गया है. लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये जानेवाले इस नये नियम से यहां के सभी ईंट-भट्ठों को बंद करना पड़ सकता है.
वायु प्रदूषण का बड़ा कारण हैं ईंट भट्ठे
पारंपरिक ईंट भट्ठियां वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बनती हैं, क्योंकि वे ईंट बनाने की प्रक्रिया में कोयले का उपयोग करती हैं. इस साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त इपीसीए ने एनसीआर में आनेवाले राज्यों को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि सभी ईंट भट्टियां पर्यावरण और वन मंत्रालय के निर्देशित ‘जिग-जैग’ तकनीक को लागू करें.
इससे उत्सर्जन में 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. इस साल अप्रैल में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल) ने दिल्ली और आसपास के राज्यों की इस बात की आलोचना की थी कि उन्होंने अवैध तरीके से चल रहे ईंट भट्ठों पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण का बड़ा कारण बने हुए हैं.
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