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मुख्यमंत्री ने अलीपुर में बुलायी तृणमूल पार्षदों की बैठक, आज होगा मेयर का फैसला, निगम आयुक्त खलील अहमद ने संभाला कामकाज

Updated at : 22 Nov 2018 1:07 AM (IST)
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मुख्यमंत्री ने अलीपुर में बुलायी तृणमूल पार्षदों की बैठक, आज होगा मेयर का फैसला, निगम आयुक्त खलील अहमद ने संभाला कामकाज

कोलकाता : मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गुरुवार को कोलकाता नगर निगम के तृणमूल पार्षदों की बैठक बुलायी है. अलीपुर में होने वाली इस बैठक में कोलकाता के नये मेयर पद के नाम की घोषणा हो सकती है. गौरतलब है कि बुधवार को मुख्यमंत्री से मनमुटाव होने के बाद कोलकाता के मेयर शोभन […]

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कोलकाता : मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गुरुवार को कोलकाता नगर निगम के तृणमूल पार्षदों की बैठक बुलायी है. अलीपुर में होने वाली इस बैठक में कोलकाता के नये मेयर पद के नाम की घोषणा हो सकती है. गौरतलब है कि बुधवार को मुख्यमंत्री से मनमुटाव होने के बाद कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी ने दमकल व आवासन मामलों के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
सुश्री बनर्जी ने श्री चटर्जी को मेयर पद से भी इस्तीफा देेने का निर्देश दिया. साथ ही कोलकाता निगम के आयुक्त खलील अहमद को मेयर की अनुपस्थिति में कार्य संभालने का निर्देश दिया था. तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, सुश्री बनर्जी ने गुरुवार की शाम अलीपुर में कोलकाता नगर निगम में तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों की बैठक बुलायी है.
इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद व पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे. बैठक में मेयर के नाम की घोषणा होगी, हालांकि सुश्री बनर्जी के निर्देश के बावजूद बुधवार को श्री चटर्जी ने मेयर पद से इस्तीफा नहीं दिया. अवकाश होने के बावजूद कोलकाता नगर निगम की चेयरपर्सन माला राय निगम कार्यालय पहुंची थीं तथा उनका कार्यालय खुला था.
प्रथानुसार मेयर द्वारा इस्तीफा चेयरपर्सन को सौंपने का प्रावधान है. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार निगम आयुक्त खलील अहमद ने बुधवार को निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और कार्यों की समीक्षा की. दूसरी ओर, निगम सूत्रों के अनुसार कोलकाता नगर निगम के प्रस्तावित कार्यक्रमों के आवेदन पत्र से श्री चटर्जी का नाम हटा दिया गया है और बिना उनके नाम के ही आवेदन पत्र छापे जाने का निर्देश दिया गया है.
कौन हो सकते हैं मेयर
कोलकाता. मेयर शोभन चटर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के बावजूद बुधवार शाम तक इस्तीफा नहीं दिया था. लेकिन मेयर पद के लिए कई नामों पर चर्चा हो रही है. मेयर पद की दौड़ में राज्य के शहरी विकास मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम और खेल व युवा कल्याण मामलों के मंत्री अरूप विश्वास आगे बताये जा रहे हैं, जबकि वर्तमान मेें राज्य के पंचायत मंत्री व कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर सुब्रत मुखर्जी के नाम की भी चर्चा है.
श्री हकीम नगरपालिका व शहरी विकास विभाग को संभाल रहे हैं. उनका निगम संबंधित कार्य का लंबा अनुभव रहा है और वह लंबे समय तक पार्षद भी रह चुके हैं. श्री विश्वास का भी कोलकाता नगर निगम का लंबा अनुभव है और ये दोनों ही मंत्री मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफी विश्वासी माने जा रहे हैं.
निगम कानून में संशोधन के लिए आज विस में बिल पेश होने की संभावना
कोलकाता : कोलकाता नगर निगम कानून में संशोधन के लिए गुरुवार को विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश किये जाने की संभावना है. कोलकाता नगर निगम अधिनियम 1980 के धारा 6 (बी) के अनुसार मेयर के पद से इस्तीफा देने या आकस्मिक कारणों से मेयर पद रिक्त होने के बाद वर्तमान कोई पार्षद ही मेयर पद पर आसीन हो सकता है.
मेयर पद रिक्त होने के एक माह के अंदर ही नये मेयर की नियुक्ति का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में वर्तमान मेयर शोभन चटर्जी को मेयर पद से इस्तीफा देने के तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के निर्देश के बाद वर्तमान नियम के कारण वैधानिक समस्या उत्पन्न हो गयी है. इस वैधानिक समस्या के समाधन के लिए गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा विधानसभा में कोलकाता नगर निगम संशोधन विधेयक 2018 पेश किये जाने की संभावना है.
बुधवार को प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप को कानून विभाग ने भी मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित विधेयक के अनुसार वर्तमान पार्षदों में से मेयर चुने जाने और एक माह के अंदर नये मेयर पद की नियुक्ति के प्रावधान को हटा दिया जायेगा तथा इस नियम की जगह नये प्रावधान शामिल किये जाने की संभावना है. नये प्रावधान के अनुसार जिस तरह से राज्य मंत्रिमंडल या केंद्रीय मंत्रिमंडल में किसी को भी मंत्री के रूप में शामिल किया जा सकता है.
छह माह के अंदर निर्वाचित होने का प्रावधान है, उसी तरह कोलकाता नगर निगम के मामले में भी व्यवस्था होगी. कोलकाता नगर निगम के प्रस्तावित संशोधन के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल व केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस प्रावधान को कोलकाता नगर निगम के कानून में भी शामिल किया जायेगा, ताकि वर्तमान पार्षद के अतिरिक्त बाहर के किसी व्यक्ति को मेयर बनाया जा सके तथा उसे छह माह के अंदर निर्वाचित किया जा सके.
इस बीच, वार्ड नंबर 117 के उपनिर्वाचन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. और नये कानून के तहत इस वार्ड के उपनिर्वाचन के माध्यम से प्रस्तावित मेयर को निर्वाचित करवाया जा सकता है.
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