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154 साल पहले अक्तूबर में तबाह हुआ था कोलकाता, 60,000 लोगों की गयी थी जान

Updated at : 06 Oct 2018 6:00 AM (IST)
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154 साल पहले अक्तूबर में तबाह हुआ था कोलकाता, 60,000 लोगों की गयी थी जान

कोलकाता : आज से 154 साल पहले यानी पांच-छह अक्तूबर, 1864 को कोलकाता (तब कलकत्ता, देश का सबसे संपन्न शहर) तबाह हो गया था. भारत के सबसे संपन्न शहर में चीख-पुकारें मच गयी थीं. आपदा प्रबंधन विभाग की ‌एक रिपोर्ट के अनुसार उस पूरी आपदा में करीब 60,000 लोगों की जानें गयीं थी. अन्य रिपोर्ट […]

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कोलकाता : आज से 154 साल पहले यानी पांच-छह अक्तूबर, 1864 को कोलकाता (तब कलकत्ता, देश का सबसे संपन्न शहर) तबाह हो गया था. भारत के सबसे संपन्न शहर में चीख-पुकारें मच गयी थीं. आपदा प्रबंधन विभाग की ‌एक रिपोर्ट के अनुसार उस पूरी आपदा में करीब 60,000 लोगों की जानें गयीं थी. अन्य रिपोर्ट अनुसार इस महा तबाही के बाद भी लोगों की मरने की संख्या कम नहीं हुई थी. काफी समय तक लोग मरते रहे थे.
आंध्र के रास्ते आयी थी तबाही
यह तबाही हुगली नदी के रास्ते आंध्र प्रदेश के शहर मछलीपट्टनम से होते हुए कोलकाता पर आ गिरी थी. इसे 1864 के चक्रवाती तूफान के नाम से जानते हैं. बंगाल की खाड़ी में उठे इस तूफान ने पांच अक्तूबर, 1864 की सुबह 10 बजे से कोलकाता में घुसना शुरू किया था. उसके बाद यहां काफी तबाही मची थी. चारों ओर हाहाकर मच गया था.
कलकत्ता को दोबारा खड़ा करने में अंग्रेजों की भूमिका
साल 1864 में भारत में अंग्रेजों का राज था. हालांकि 1857 की क्रांति ने अंग्रेजों को हिन्दुस्तानियों को लेकर कुछ पूर्वाग्रह दिये थे. लेकिन अंग्रेजी शासन का काफी काम कोलकाता से ही चलता था. इसलिए अंग्रेज तब जहाज से सामान लाकर और भी कई तरीकों से हिन्दुस्तानियों को दोबारा कोलकाता को खड़ा करने में मदद की.इस उस घटना के रूप में भी याद किया जाता है जिसने हिन्दुस्तान को बंदरगाहों पर समुद्री तूफानों के लिए चेतावनी सिस्टम लगाने की सीख दे गया, क्योंकि उस वक्त कोलकाता के बंदरगाह पर ऐसा कोई सिस्टम नहीं था इसलिए शहर का बंदरगाह भी ध्वस्त हो गया. चूंकि कोलकता तब देश का अमीर शहर था, ऐसे में बंदरगाह समेत पूरे शहर का उजड़ना, देश को भयानक पीड़ा दे गया था. सबसे ज्यादा दुख पश्चिम बंगाल के भावनात्मक लोगों के लिए 60,000 से भी ज्यादा लोगों की मौतें थीं.
40 फीट ऊंची पानी की दीवार लेकर आया था तूफान
डेवस्टेटिंग डिजास्टर डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार यह तूफान पानी के करीब 40 फट ऊंची दीवार के रूप में कोलकाता में दाखिल हुआ था. जानलेवा पानी का ऐसा भयानक मंजर हिंदुस्तान ने पहले कभी नहीं देखा था. कुछ ‌पलों में तूफान पूरे शहर को जलमग्न कर दिया. ऐसा लगता था जैसे समुद्र ने किसी द्वीप को अपनी आगोश में समा लिया हो.
117 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज थी रफ्तार
अलग-अलग देश तूफानों को मापने के अलग-अलग पैमाने मानते हैं. भारत में अगर 39 मील प्रति घंटे की चाल से कोई आंधी-पानी जैसी घटना आती है, तो उसे आंधी में गिनते हैं. इसे किलोमीटर प्रति घंटा में मापे, तो हमारे यहां करीब 63 किलोमीटर प्रति घंटे से आनेवाली पानी से संबंधित आपदा को आंधी मानते हैं. इसके ऊपर को तूफान कहते हैं. लेकिन कोलकाता में 1864 में आयी आपदा 73 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आयी थी. यानी करीब 117 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से इस तूफान आतंक मचाया था. इसे साल 2004 में आयी सुनामी से भी बड़े तूफान के तौर पर देखा जाता है.
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