कोलकाता : कमाई के साथ हर तरह के सामानों की उपलब्धता के लिए कोलकाता का बागड़ी मार्केट अपने आप में बेहतरीन मार्केट कहा जाता है. यदि इस बाजार के बारे में यह कहा जाये कि यह कोलकाता ही नहीं बल्कि उत्तर पूर्वी राज्यों के व्यवसायियों का स्वर्ग है तो किसी को अतिसयोक्ति नहीं होगी.
लेकिन रविवार रात 71 नंबर कैनिंग स्ट्रीट स्थित बागड़ी मार्केट में लगी भीषण आग ने एक बार फिर से महानगर को झकझोर कर रख दिया है, वहीं लोगों के जेहन में एक बार फिर नंदराम मॉर्केट और लालकोठी के अग्निकांड की याद ताजा हो गयी. इस अग्निकांड को लेकर बड़ाबाजार के व्यवसायियों में गुस्सा है. घटना के बाद बड़ाबाजार के लोगों में जहां गुस्सा है वहीं अपने को बचाने का फिक्र भी है.
बड़ाबाजार को लोगों की राय
मुन्ना राय (व्यवसायी) : बड़ाबाजार व्यवसायी वर्ग के लिए स्वर्ग है. हर व्यवसायी का ख्वाब होता है कि उसकी अपनी एक दुकान बड़ाबाजार में हो, लेकिन ना जाने इस चाहत ने बड़ाबाजार को कब अंगार की भठ्ठी बना दिया इस सवाल का जवाब शायद किसी के पास हो. यहां अवैध पार्किंग, अवैध दुकाने और मकानों का जमावड़ा होता गया और कुछ लोग इससे अपनी जेब भरते गये. इससे ज्यादा मैं क्या कहूं.
जगजीत सिंह (बागड़ी मार्केट के निवासी): जो हुआ वह काफी बुरा हुआ लेकिन सरकार और समाज के लोगों का यह प्रयास होना चाहिए अब आगे एेसा ना हो. बागड़ी मार्केट के पास वाले मकान 72 नंबर में मैं रहता हूं. मेरा मानना है कि बड़ाबाजार की सबसे बड़ी समस्या अवैध निर्माण है. इस मकान में मकान मालिक ने इतने सारे अवैध निर्माण करवा दिया है कि आग लगने पर लोग भागतक नहीं सकते.
अनवर खान (व्यवसायी): नाखुदा मस्जिद के पास रुमाल और कैप का व्यवसाय करने वाले शोएब जमाल कहते हैं कि हमें लगा था कि बड़ाबाजार के लिए नंदराम मार्केट अग्निकांड एक सबक होगा. प्रशासन के साथ आम लोग भी इससे सबक लेंगे लेकिन ऐसा हो ना सका. मेरा मानना है कि हमें इस तरह की घटनाओं से सबक लेना होगा तभी इसे रोका जा सकता है.
संजय मिश्रा (इलाके के निवासी): मेरा मानना है कि हर मकान और दुकान में अग्निरोधी उपकरण जरूर हो.बड़ाबाजार की सिकुड़ती गलियों को रोकने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठाए.गलियां ऐसी हो की अग्नीकांड के बाद दमकल सही तरीके से गलियों में आ जा सके. सरकार दमकल विभाग को और उन्नत उपकर्णों से लैस करें.
असीम खान : बासरवी मस्जिद इलाके में रहने वाले मो. असीम खान कहते हैं कि घटना के लिए प्रशासनिक अमले के साथ आम लोग भी जिम्मेदार हैं. ऐसा घटना ना हो इसके लिए हमें खुद भी सतर्क होना होगा. सारे सुख-साधन तभी तक के लिए है जब तक इंसान है लेकिन इसके लिए आप किसी के जीवन को खतरे में नहीं डाल सकते.
रंजीत पांडेय (निवासी) : मैं बड़ाबाजार के कैनिंग स्ट्रीट में तब से रह रहा हूं जब से यहां लोग आने से लोग घबराते थे.लेकिन आज जो स्थिति है कि यहां सांस लेना भी मुश्किल लगता है.लाल कोठी हमारे मकान के पीछे है.
