उपभोक्ता सुरक्षा मामले में हाइकोर्ट का हस्तक्षेप रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जायेगी सरकार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Aug 2018 2:11 AM
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कोलकाता : उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर होने पर कई बार हाइकोर्ट उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के फैसले को लेकर हाइकोर्ट फटकार लगायी है. राज्य के उपभोक्ता सुरक्षा मामलों के मंत्री साधन पांडेय ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नोत्तर काल में इस पर असंतोष जताया है. श्री पांडेय ने […]
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कोलकाता : उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर होने पर कई बार हाइकोर्ट उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के फैसले को लेकर हाइकोर्ट फटकार लगायी है. राज्य के उपभोक्ता सुरक्षा मामलों के मंत्री साधन पांडेय ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नोत्तर काल में इस पर असंतोष जताया है. श्री पांडेय ने तृणमूल विधायक पार्थ भौमिक के सवाल के जवाब में कहा कि उपभोक्ता सुरक्षा के मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को रोकने के लिए राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी. शीघ्र ही विभाग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में पिटिशन फाइल की जायेगी.
इस मामले में केंद्र सरकार को पार्टी बनाया जायेगा. श्री भौमिक के सवाल कि राज्य के विभिन्न इलाकों में प्रमोटर ग्राहक से पैसे लेकर फ्लैट नहीं दे रहे हैं. उपभोक्ता सुरक्षा अदालत ने कई मामलों में कारा दंड की सजा दी है, लेकिन आरोपी दोषी को हाइकोर्ट से जमानत मिल जाती है. इससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है. इस सवाल के जवाब में श्री पांडेय ने कहा : हम चाहते हैं कि उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के मामले केवल उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के ही अधीन रहे. इसी अदालत के माध्यम से मामले की सुनवाई हो. यदि किसी को फैसला स्वीकार नहीं है, तो वह जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है.
उपभोक्ता सुरक्षा मामले में हाइकोर्ट का हस्तक्षेप नहीं हो. इस बाबत सर्वोच्च न्यायालय में पिटीशन फाइल किया जायेगा. इससे ग्राहकों की परेशानी घटेगी. उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में पश्चिम बंगाल की जीत होती है, तो यह पूरे देश के लिए उदाहरण बनेगा. श्री पांडेय ने कहा कि उनके विभाग का यह पूरा अधिकार है कि वे दोषियों को जेल की सजा दे, लेकिन यह देखा जा रहा है कि उपभोक्ता सुरक्षा अदालत ने जिन्हें सजा दी है, उन्हें हाइकोर्ट से जमानत मिल जाती है.
केवल यही नहीं हाइकोर्ट के न्यायाधीश उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के न्यायाधीश को बुला कर फटकार लगा रहे हैं. उनके न्यायाधीशों को फटकार लगा कर उनका अपमान किया जा रहा है. इस कारण वे लोग सर्वोच्च न्यायालय जाकर यह जानना चाह रहे हैं कि उपभोक्ता सुरक्षा अदालत के मामले में हाइकोर्ट के हस्तक्षेप करने का अधिकार है या नहीं. कुछ वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि उपभोक्ता सुरक्षा अदालत में सटीक न्याय नहीं मिल पाता है, तो उपभोक्ता सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं. इसी कारण वे लोग पिटीशन फाइल करेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में 23 उपभोक्ता अदालत का गठन किया गया है तथा पांच उपभोक्ता आयोग का गठन किया गया है.
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