पहले मेरिट लिस्ट जारी करें, फिर काउंसिलिंग

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कोलकाता : कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए होनेवाली काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है और कहा है कि मेरिट लिस्ट जारी किये बिना काउंसिलिंग नहीं की सकती. कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश शेखर बॉबी सराफ ने इस आशय का आदेश दिया है. उन्होंने मेरिट लिस्ट जारी किए बिना स्कूल […]

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कोलकाता : कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए होनेवाली काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है और कहा है कि मेरिट लिस्ट जारी किये बिना काउंसिलिंग नहीं की सकती. कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश शेखर बॉबी सराफ ने इस आशय का आदेश दिया है.
उन्होंने मेरिट लिस्ट जारी किए बिना स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) की ओर से उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है और कहा है कि वह पहले सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी करे, उसके बाद काउंसिलिंग शुरू की जाए. हाइकोर्ट ने काउंसिलिंग संबंधी एसएससी की छह जुलाई की अधिसूचना को भी खारिज कर दिया.
हाइकोर्ट ने गुरुवार को अभ्यर्थियों की याचिका को मान्यता देते हुए एसएससी को बिना रिजल्ट सार्वजनिक किए काउंसिलिंग नहीं करने का निर्देश दिया और कहा कि एेसा करने से नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता खत्म हो जाएगी. एसएससी की ओर से 15 व 21 जुलाई को काउंसिलिंग होनेवाली थी. कोर्ट के इस निर्देश से फिलहाल 73,563 शिक्षकों की नियुक्ति अधर में अटक गयी है.
गौरतलब है कि राज्य के उच्च माध्यमिक स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा के शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टेट) वर्ष 2016 में आयोजित की गयी थी. परीक्षा परिणाम, मेरिट लिस्ट जारी किए बिना ही छह जुलाई को एसएससी की ओर से एक अधिसूचना जारी कर कहा गया कि केवल सफल अभ्यर्थियों को ही व्यक्तिगत तौर पर सूचना दी जाएगी और परिणाम सार्वजनिक नहीं होगा.
एसएससी की इस अधिसूचना को 20 अभ्यर्थियों ने हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. याचिकाकर्ताओं ने रिजल्ट जारी किए बगैर किसी भी तरह की नियुक्ति को अवैध बताया था. यह भी कहा था कि इससे स्पष्ट नहीं हो सकेगा कि किन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई है. अभ्यर्थियों के वकील ने दलील दी थी कि नियुक्ति नियमावली की धारा-12 के अनुसार पैनल लिस्ट प्रकाशित किए बिना काउंसलिंग किसी हालत में नहीं की जा सकती. सबसे पहले पीडीएफ फॉर्मेट में पैनल लिस्ट प्रकाशित किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें पता नहीं कि कौन-कौन अभ्यर्थी पास, कौन फेल हुए और किसको काउंसलिंग के लिए बुलाया जा रहा है? यह सब सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
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