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बागडोगरा में सूअरों की मौत से ‘निपाह’ का आतंक

Updated at : 10 Jun 2018 7:27 AM (IST)
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बागडोगरा में सूअरों की मौत से ‘निपाह’ का आतंक

भय का माहौल : सूअर और चमगादड़ हैं निपाह संक्रमण के वाहक मरे सूअर पड़े रहते हैं कोई उठानेवाला नहीं प्रधान ने कहा : सूअर पालकों को देंगे नोटिस बागडोगरा : बागडोगरा इलाके में एक-पर-एक सूअरों की मौत से निपाह वायरस का आतंक फैल गया है. इस जानलेवा वायरस से केरल में अब तक 14 […]

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भय का माहौल : सूअर और चमगादड़ हैं निपाह संक्रमण के वाहक
मरे सूअर पड़े रहते हैं कोई उठानेवाला नहीं
प्रधान ने कहा : सूअर पालकों को देंगे नोटिस
बागडोगरा : बागडोगरा इलाके में एक-पर-एक सूअरों की मौत से निपाह वायरस का आतंक फैल गया है. इस जानलेवा वायरस से केरल में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है. माना जाता है कि सूअर और चमगादड़ निपाह वायरस के वाहक हैं.
सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में अब तक इसका एक भी मामले सामने नहीं आया है. इस बीच, बागडोगरा के हरेकृष्णपल्ली इलाके में कई सूअरों की मौत हो चुकी है. इससे इलाके के लोग आतंकित हैं. सूअरों के शवों को भी नहीं हटाया गया है. दुर्गंध की वजह से इस इलाके के लोगों का जीना दूभर हो गया है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत को जानकारी देने के बाद भी सूअरों के शव हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी. शनिवार सुबह भी इस इलाके में दो सुअरों की मौत हो गयी है. उनके शव भी ऐसे ही पड़े हुए हैं.
स्थानीय लोगों ने कई बार इस इलाके से सूअरों को हटाने की मांग की, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ. निपाह के आतंक के बाद भी सूअरों के बाड़ों को हटाने की व्यवस्था नहीं की गयी है. रिहायशी इलाके में बड़े पैमाने पर सूअरों का पालन जारी है. सूअरों के मुक्त विचरण तथा जहां-तहां कचरे के अंबार के कारण प्रदूषण भी काफी बढ़ गयी है.
हरेकृष्णपल्ली इलाके से हुलिया नदी गुजरती है. इस नदी में भी कचरा फेंकने से लोग बाज नहीं आ रहे हैं. हुलिया नदी आगे जाकर फूलेश्वरी नदी में मिल जाती है. दोनों नदियां पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी हैं.
हरेकृष्णपल्ली इलाके के रहने वाले पप्पू सेन, माया घोष, फूलीरानी मंडल, लक्ष्मी मजूमदार आदि ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस इलाके में कुछ लोग सूअरों का कारोबार करते हैं. इलाके में कई सूअरबाड़े हैं. सूअरबाड़ों की गंदगी भी हुलिया नदी में फेंक दी जाती है.
इससे नदी का पानी प्रदूषित हो गया है. बीच-बीच में सूअरों के मरने की घटना घटती है. उनके शव हटानेवाला कोई नहीं होता. इन शवों को भी नदी में फेंक दिया जाता है. कई बार तो सुअर कई-कई दिनों तक मरे पड़े रहते हैं. कुछ ही दिनों पहले इस इलाके में डायरिया ने अपना तांडव मचाया था. यदि यही स्थिति जारी रही, तो और भी कई खतरनाक बीमारियां फैल सकती हैं.
सूअरों की मौत तथा बड़े पैमाने पर सूअरों के पालन से लोअर बागडोगरा ग्राम पंचायत की प्रधान विभा विश्वकर्मा भी परेशान हैं. उन्होंने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि हरेकृष्णपल्ली के साथ-साथ सूर्यनगर, एमइएस कालोनी आदि इलाके में काफी लोग सूअर पालन करते हैं. इसी वजह से प्रदूषण होता है और कई प्रकार की बीमारियां फैलती हैं.
उन्होंने कहा कि सोमवार को पंचायत कार्यालय खुलते ही सूअर पालन करनेवालों को नोटिस दी जायेगी. यदि इसी प्रकार सूअरों की संख्या बढ़ती रही और वातावरण प्रदूषित होता रहा, तो कोई बड़ी घटना इलाके में घट सकती है. दूसरी ओर, नक्सलबाड़ी के बीडीओ बापी धर का कहना है कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है. वह शीघ्र ही इस मामले में पंचायत प्रधान से बात करेंगे. पंचायत प्रधान को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहेंगे.
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