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बंगाल : दिल्ली में तृणमूल सांसदों ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से राज्यपाल की शिकायत की

Updated at : 05 Apr 2018 6:10 AM (IST)
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बंगाल : दिल्ली में तृणमूल सांसदों ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से राज्यपाल की शिकायत की

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नयी दिल्ली में गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करवाया. प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि राजभवन ‘भाजपा मुख्यालय’ की तरह काम कर रहा है. तृणमूल के 25 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल […]

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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नयी दिल्ली में गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करवाया.
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि राजभवन ‘भाजपा मुख्यालय’ की तरह काम कर रहा है. तृणमूल के 25 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने सिंह से कहा कि ‘राज्यपाल आवास का रवैया वैसा नहीं है जैसा कि उससे अपेक्षित है.
उधर, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने भी बुधवार को राज्यपाल की निष्पक्षता पर सवाल उठाया. पार्थ चटर्जी ने कहा कि राजनीतिक दल के नेता के रूप में राज्यपाल काम कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, पार्थ संवाददाताओं से बातचीत में राज्यपाल के खिलाफ बोल रहे थे. इसके तुरंत बाद उनके (पार्थ) पास राज्यपाल का फोन आया और राज्यपाल ने उन्हें तलब कर लिया.
गौरतलब है कि दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के 25 सांसदों के दल ने डेरेक ओ ब्रायन और सुदीप बंदोपाध्याय के नेतृत्व में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी की शिकायत की.
प्रतिनिधिदल ने कहा: हम राज्यपाल से निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं. लेकिन उनकी भूमिका संदिग्ध है. लिहाजा केंद्र सरकार को उनसे संयम बरतने और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करने का निर्देश देना चाहिए.
गौरतलब है कि राज्यपाल ने मुख्य सचिव और राज्य के चुनाव आयुक्त को बैठक के लिए राजभवन बुलाया था. इस बात को लेकर भी तृणमूल नेताओं ने नाराजगी जतायी.
उन्होंने कहा: विपक्ष के कई नेता राज्यपाल से मुलाकात के बाद उनके आवास पर ही संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. वह जब चाहते हैं तब मुख्य सचिव और राज्य के चुनाव आयुक्त को बुला लेते हैं. राज्य का चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है, जो अपना काम कर रहा है. यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है. तृणमूल के प्रतिनिधमंडल ने गृह मंत्री से अनुरोध किया कि वह इस बारे में राज्यपाल से बात करें.
इधर, कोलकाता में पार्थ चटर्जी ने भाजपा के खिलाफ बकायदा मोर्चा खोल दिया. उन्होंने कहा कि राजभवन की निष्पक्षता पर अब सवाल उठने लगा है.
राज्यपाल जिस तरह से अति सक्रिय हो गये हैं, वह लोगों के दिमाग में संदेह पैदा करता है कि राजभवन है या फिर किसी पार्टी का मुख्यालय. राज्यपाल राज्य चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए उन्हें तलब कर रहे हैं. उनके इस कार्य को पहले ही भाजपा के नेता बोल दे रहे हैं. लग रहा है कि वह एक पार्टी विशेष के इशारे पर काम कर रहे हैं. इसके खिलाफ हम लोगों ने राज्यपाल से मिलने का वक्त मांगा है.
पार्थ ने कहा: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष जिस तरह से लोगों को उकसा रहे हैं और कह रहे हैं कि पंचायत चुनाव में 60,70 से लेकर 80 लोग श्मशान जायेंगे. मार के बदले मार देंगे. इस तरह का बयान काफी चिंताजनक है. यह सरासर चुनाव आचरण संहिता का उल्लंघन है. लिहाजा हमलोग उसके खिलाफ गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग से मिलेगें और दिलीप घोष के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे.
तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा: पार्टी विशेष का दफ्तर बन गया है राजभवन, राज्यपाल ने पार्थ को किया तलब
पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची भाजपा
कोलकाता. पंचायत चुनाव की तारीखों का जिस तरह से एलान किया गया है, उससे प्रदेश भाजपा नाखुश है. प्रदेश भाजपा का आरोप है कि जिस तरह पुलिस के बल पर पंचायत चुनाव कराया जा रहा है, उससे हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. प्रशासन विरोधी दल के कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को सुरक्षा देने में नाकाम है. लिहाजा केंद्रीय बल की मौजूदगी में पंचायत चुनाव कराने की अपील को लेकर प्रदेश भाजपा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मामला किया गया है.
मामला पंचायत चुनाव के प्रभारी मुकुल राय के नेतृत्व में पार्टी के सांसद सुरिंदर सिंह अहलुवालिया की ओर से किया गया. यह जानकारी प्रदेश भाजपा की महासचिव देवश्री चौधरी ने दी. उन्होंने बताया कि वे अपनी मांगों के समर्थन में कलकत्ता हाइकोर्ट में मामला करना चाहते थे, लेकिन विभिन्न मुद्दों को लेकर वकील हड़ताल पर हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दायर की गयी है.
वे चाहते हैं कि त्वरित कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार को शांति व्यवस्था बहाल करने का आदेश दे, साथ में चुनाव आयोग को निर्देश दे कि वह केंद्रीय बल की निगरानी में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराये.
राजभवन की निष्पक्षता पर अब सवाल उठने लगा है. राज्यपाल जिस तरह से अति सक्रिय हो गये हैं, वह लोगों के दिमाग में संदेह पैदा करता है कि राजभवन है या फिर किसी पार्टी का मुख्यालय. राज्यपाल राज्य चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए उन्हें तलब कर रहे हैं. लग रहा है कि वह एक पार्टी विशेष के इशारे पर काम कर रहे हैं.
पार्थ चटर्जी, तृणमूल महासचिव
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