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बंगाल : पूर्वी भारत में रसोई गैस की हो सकती है भारी किल्लत....जान‍िए क्‍य हो रही समस्‍या

Updated at : 12 Feb 2018 8:56 AM (IST)
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बंगाल : पूर्वी भारत में रसोई गैस की हो सकती है भारी किल्लत....जान‍िए क्‍य हो रही समस्‍या

बल्क एलपीजी ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन की आज से बेमियादी हड़ताल कोलकाता : पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, झारखंड और ओड़िशा में घरेलू गैस की भारी किल्लत की आशंका है. गैस को वहन करके बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टर्स की सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो रही है. पूर्वी भारत के बल्क एलपीजी ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर्स […]

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बल्क एलपीजी ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन की आज से बेमियादी हड़ताल
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार, झारखंड और ओड़िशा में घरेलू गैस की भारी किल्लत की आशंका है. गैस को वहन करके बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टर्स की सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो रही है.
पूर्वी भारत के बल्क एलपीजी ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन की ओर से संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर तेल विपणन कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) द्वारा जारी टेंडर का विरोध किया गया. एसोसिएशन ने सोमवार से रास्तों से टैंक ट्रंक हटा लेने का फैसला किया है जिससे पूरे क्षेत्र में बल्क एलपीजी की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ेगा. एसोसिएशन के पूर्वी भारत की कार्यकारी समिति के सदस्य भूपिंदर गुजराल ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से इस मामले में कोई समस्या नहीं थी. पहले टेंडर को जोन के मुताबिक जारी किया जाता था. पूर्वी जोन में पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, बिहार और झारखंड आते हैं. लेकिन अब इसे राज्यवार जारी किया जा रहा है.
साथ ही नये टेंडर में एक नियम कहता है कि जिस किसी के पास एक लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट है वह टैंक ट्रंक के लिए आवेदन कर सकता है और उसे मौजूदा बेड़े की तुलना में प्राथमिकता दी जायेगी. इसके अलावा जो वाहन राज्य में पंजीकृत हैं उन्हें प्राथमिकता दी जायेगी. लेकिन ज्यादातर वाहन अन्य राज्यों में पंजीकृत हैं. पूर्वी क्षेत्र में अधिकांश नागालैंड में पंजीकृत है.
इस कदम से रोजगार और अन्य अनुषंगी इकाइयां जो इससे जुड़ी हैं वह बाधित होंगी. तेल विपणन कंपनियों के साथ बैठक करके इस बाबत चिंता जतायी गयी है लेकिन अभी तक कोई प्रभावी प्रतिक्रिया उनकी ओर से नहीं आयी है. इसलिए यह कदम उठाने के लिए वह मजबूर हुए हैं. एसोसिएशन के कार्यकारी समिति के सदस्य अशोक चौरड़िया ने कहा कि टैंक ट्रंक स्पेशलाइज्ड वाहन होते हैं जो केवल एलपीजी ले जाने के लिए होते हैं. इस पेशे में वह पिछले 30 वर्षों से हैं और ऐसा कदम पहले कभी नहीं देखा जो मौजूदा उद्योग को समाप्त कर दे. श्री गुजराल ने बताया कि पूर्वी क्षेत्र में करीब 4000 वाहन हैं जो गैस ढोते हैं. इन्हें वह लोडिंग प्लांट से अनलोडिंग प्लांट तक ले जाते हैं. वहां से फिर ये गैस सिलिंडर में भरकर घरों में आपूर्ति की जाती है. रोजाना करीब 350 गाड़ियां आपूर्ति करती हैं. एक गाड़ी में 18 टन गैस रहती है.श्री गुजराल ने कहा कि यदि तेल विपणन कंपनियां उनकी मांगों को नहीं मानती हैं तो उनकी हड़ताल जारी रहेगी.
क्या है समस्या
तेल विपणन कंपनियों की नयी टेंडर नीति से एलपीजी ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन नाराज है
पहले जोन स्तर पर टेंडर होता था, अब राज्य स्तर पर हो रहा है
जिस राज्य का टेंडर होगा, वाहन का पंजीकरण उसी राज्य में होना चाहिए
महज एक लाख की राशि से कोई भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकता है
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