दार्जीलिंग से केंद्रीय बलों को हटाने के केंद्र के फैसले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगायी रोक

Updated at : 17 Oct 2017 4:14 PM (IST)
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दार्जीलिंग से केंद्रीय बलों को हटाने के केंद्र के फैसले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगायी रोक

कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने दार्जीलिंग से अर्द्धसैनिक बलों को हटाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने ममता सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगायी है. इस रोक में 27 अक्‍तूबर तक केंद्रीय सशस्‍त्र बल अब दार्जीलिंग में ही रहेंगे. हालांकि केंद्र सरकार ने सोमवार को […]

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कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने दार्जीलिंग से अर्द्धसैनिक बलों को हटाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने ममता सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगायी है. इस रोक में 27 अक्‍तूबर तक केंद्रीय सशस्‍त्र बल अब दार्जीलिंग में ही रहेंगे. हालांकि केंद्र सरकार ने सोमवार को ममता के विरोध के बाद दार्जीजिंग में कानून-व्यवस्था बनाये रखने में मदद के लिये अर्द्धसैनिक बलों के 800 जवानों की तैनाती बरकरार रखने को मंजूरी दे दी थी.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा था कि अभी दार्जीलिंग में अर्धसैनिक बलों की तैनाती है और केंद्र सरकार त्योहारी मौसम में दूसरी जगहों पर ड्यूटी के लिये उनमें से 10 कंपनियों की तैनाती करना चाहती थी. हालांकि राज्य सरकार क्योंकि कुछ और वक्त के लिये उनकी तैनाती चाहती है ऐसे में गृह मंत्रालय ने नये सिरे से आकलन के बाद सिर्फ सात कंपनियों को हटाने का फैसला लिया है और बाकी आठ कंपनियां पहाड़ी इलाकों में बरकरार रहेंगी.

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मौजूदा समय में पहाड़ पर केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 15 कंपनियां तैनात हैं. अर्द्धसैनिक बल की एक कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सरकार के इस फैसले के बाद केंद्र पर राज्य को अस्थिर करने का आरोप लगाया. ममता ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय बलों की वापसी पर मोदी और सिंह को पत्र भेजे हैं.

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उन्होंने कहा था, मैंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखा है तथा उनसे पहाडि़यों से बलों को वापस नहीं बुलाने का आग्रह किया. मुझे उम्मीद है कि हमें कोई सकारात्मक जवाब मिलेगा. अगर पहाडि़यों में कुछ अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए केंद्र जिम्मेदार होगा. ममता ने बलों को वापस बुलाये जाने के फैसले को एकतरफा और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया था, केंद्र सरकार भाजपा पार्टी कार्यालय से चलायी जा रही है.

उन्‍होंने कहा था कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने पहाडि़यों से बलों को वापस बुलाने का खराब और एकतरफा फैसला किया. उन्होंने केंद्र और भाजपा पर साजिश रचने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, वे लोग बंगाल को अस्थिर करने के लिए साजिश कर रहे हैं ताकि हिंसा होती रहे.

दार्जीलिंग में टॉय ट्रेन सेवा 25 अक्तूबर से होगी बहाल

दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की हेरिटेज सेवा 25 अक्तूबर से बहाल हो जायेगी. यह सेवा टॉय ट्रेन के तौर पर लोकप्रिय है और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) की हड़ताल की वजह से 125 दिन से बंद थी. जीजेएम ने 15 जून को पृथक राज्य की मांग के लिए बेमियादी हड़ताल आहूत की थी, जो 104 दिन चलने के बाद दुर्गा पूजा से पहले वापस ली गयी. पर 15 अक्तूबर से ट्रेन सेवा को सुकना तक आंशिक तौर पर शुरू किया गया.

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नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के प्रवक्ता प्रणव ज्योति शर्मा ने बताया कि छोटी लाइन (नेरो गेज) की यात्री ट्रेन सेवा को मैदानी इलाके में सिलीगुड़ी से लेकर सुकना तक आंशिक तौर पर शुरू किया गया है. उन्होंने गुवाहाटी से बताया कि 125 दिन तक सेवा बंद रहने के कारण मरम्मत और रखरखाव का काम किये जाने की जरुरत है.

शर्मा ने कहा कि सिलीगुडी से दार्जिलिंग पर्वतीय इलाके तक जाने वाली यह सेवा 25 अक्तूबर से पुन: शुरू होगी. यह ट्रेन जंगलों, चाय के बगानों, पुलों और सुरंगों से होते हुए 88 किलोमीटर का सफर तय करती है. दुनिया भर से इस पूर्वोत्तर पहाड़ी शहर में आने वाले पर्यटकों के लिए टॉय ट्रेन एक खास आकर्षण है. यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में यह साल 1999 में स्थान पा चुकी है.

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