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High Court : दामोदर से अवैध बालू खनन चिंताजनक जांच कर बताये बांकुड़ा प्रशासन

Updated at : 04 May 2024 9:46 PM (IST)
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High Court : दामोदर से अवैध बालू खनन चिंताजनक जांच कर बताये बांकुड़ा प्रशासन

बांकुड़ा में दामोदर नदी से अंधाधुंध बालू खनन से िकसान प्रभावित, कोर्ट ने जतायी नाराजगी

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दुर्गापुर.

कलकत्ता हाइकोर्ट ने दामोदर नदी में चल रहे अवैध बालू उत्खनन को गंभीर मामला मानते हुए इसकी तत्काल जांच करने का बांकुड़ा जिला प्रशासन को निर्देश दिया. साथ ही आठ हफ्ते के अंदर बालू खनन (यदि हो रहा है) को रोकने के लिए जरूरी कार्रवाई पर हलफनामा देकर स्थिति साफ करने को कहा. एक किसान की अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट की खंडपीठ ने साफ कहा कि यदि अवैध बालू खनन हो रहा है, तो इसमें इस्तेमाल हो रही निजी संस्था की सारी मशीनों व परिवहन साधनों को जब्त कर लिया जाये. दुर्गापुर में दामोदर नदी से लगे क्षेत्र में अवैध बालू खनन से खेती-बारी से जुड़े किसानों का जनजीवन प्रभावित है. नदी से बालू उत्खनन के खिलाफ कृषक बार-बार स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाते रहे हैं. लेकिन बात अनसुनी रही. आखिरकार स्थानीय किसानों ने कलकत्ता हाइकोर्ट में दस्तक दी. किसानों की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश दिया. याची श्यामल मंडल नामक किसान है, जो चौक बाजार के मनाचार ग्राम का निवासी है. उसने बालू कारोबारियों के खिलाफ हाइकोर्ट में मामला किया था. किसानों के अधिवक्ता साहेब बंद्योपाध्याय ने बताया कि खंडपीठ के निर्देश पर बांकुड़ा जिला प्रशासन को अगले आठ हफ्ते के अंदर बरजोड़ा क्षेत्र में दामोदर के अवैध उत्खनन के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करनी है. मालूम रहे कि दामोदर नदी से सटे घाटों में कई महीनों से बालू उत्खनन बदस्तूर जारी है. दुर्गापुर से सटे बांकुड़ा के सोनामुखी व बरजोड़ा थाना क्षेत्र के अधीन दामोदर नदी के किनारों पर खुलेआम अवैध बालू खनन किया जाता है. नदी तल में फिल्टर मशीनें लगा कर दिन-रात रेत निकाली जाती है. मशीन से निकालने के बाद रेत को छान कर लॉरी या डंपर में लाद कर तस्करी की जाती है. अवैध बालू तस्करी के कारण नदी के किनारे बसे मनाचार ग्राम के किसानों का जीवन संकट में पड़ गया है. बालू लदे वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कें खराब हो रही हैं. सड़क किनारे रहने वालों व स्कूली बच्चों को दिक्कत होती है. बालू खनन व परिवहन के खिलाफ स्थानीय ग्रामीण बार-बार जिला प्रशासन से शिकायत करते रहे हैं और समय-समय पर विरोध प्रदर्शन भी किया है, लेकिन कोई हल नहीं निकला. ग्रामीणों का आरोप है कि बालू कारोबारियों के खिलाफ शिकायत करनेवाले को ही स्थानीय पुलिस झूठे केस में फंसा देती है. किसानों ने बताया कि दामोदर नदी से ड्रेजिंग के नाम पर निजी कंपनी को बालू निकालने की अनुमति थी. आरोप है कि ड्रेजिंग की आड़ में उस कंपनी ने करीब 20 पंप व फिल्टर मशीनें लगा कर दामोदर के पलाशडांगा व गोपालपुर मौजा में रेत निकलवा रही है. जबकि नदियों में पंप या यंत्र लगा कर रेत निकालने पर ग्रीन ट्राइब्यूनल की मनाही है. फिर भी बालू कारोबारी खुलेआम मशीनें लगा कर नदी से रेत खनन करते हैं. नदी में पंपों के सहारे जल मिश्रित रेत उठायी जाती है. पानी की रेत के साथ मिश्रित विशेष फिल्टर की मदद से नदी से रेत को अलग किया जाता है. फिर जेसीबी से रेत को लॉरी में लाद कर शहर भेजा जाता है. रेत में पंप करने के फलस्वरूप नदी में गहरी खाई बन जाती है, जिसके कारण आसपास के खेतिहर क्षेत्र का भूजल-स्तर भी घट जाता है. इसके चलते कृषि के समय सबमर्सिबल व अन्य पंपों से सिंचाई का पर्याप्त पानी नहीं निकल पा रहा है. दुर्गापुर के दामोदर नदी के उत्तरी किनारे पर मानाचार ग्राम है. भौगोलिक मानचित्र पर यह बांकुड़ा बरजोड़ा और सोनामुखी ब्लॉक के अधीन आता है. बरजोड़ा ब्लॉक के घुटगरिया पंचायत के सीतारामपुर, बरजोड़ा पंचायत के रामकृष्ण पल्ली, बारिसाल पाड़ा, पल्लीश्री कॉलोनी, पखन्ना पंचायत के बारामन, पश्चिमपाड़ा, ढाकापाड़ा, भैरवपुर, भैरवपुर मन, सोनामुखी ब्लॉक के रांगामाटी पंचायत के डीहीपाड़ा, उत्तरी मानाचर, लालबाबा मानाचर. कुल मिलाकर 11 ग्राम हैं, जहां करीब 12 हजार वोटर हैं. सभी पूर्वी बंगाल के रहनेवाले हैं. जो लगभग 50-60 वर्षों से नदी किनारे रह रहे हैं. नदी के किनारे के ग्रामीणों की जीविका कृषि पर निर्भर है. नदी तलहटी क्षेत्र होने से इस इलाके में आलू, प्याज समेत विभिन्न हरी सब्जियों के अलावा बादाम की खेती भी की जाती है. यहां करीब 300 एकड़ खेतिहर भूमि है. हाल में लगभग 80 प्रतिशत भूमि पर बादाम की खेती की जाने लगी है. किसानों की शिकायत है कि नदी से रेत के अवैध उत्खनन के कारण कृषि क्षेत्रों में जल स्तर काफी घट गया है. फलस्वरूप बादाम की खेती में सिंचाई जल का घोर संकट पैदा हो गया है. किसान कर्ज लेकर बादाम की खेती करते हैं, लेकिन जल की कमी से किसान विवश हैं. पूरा इलाका जल संकट से जूझ रहा है. वहीं, बालू से भरी लॉरियां, डंपर व ट्रैक्टर ट्रॉली गांव की सड़कों को नष्ट कर रहे हैं. साथ ही हादसों का खतरा भी बना रहता है. इस स्थिति से पुलिस व प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया, पर बात नहीं बनी. आरोप है कि शिकायत करने वाले पर ही पुलिस उलटे झूठे केस दर्ज कर लेती है. इल्जाम यह भी है कि पुलिस के साथ बालू कारोबारियों की मिलीभगत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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