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इडी ने ‘कालीघाटेर काकू’ के वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट हाइकोर्ट को सौंपी

Updated at : 24 Apr 2024 10:52 PM (IST)
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इडी ने ‘कालीघाटेर काकू’ के वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट हाइकोर्ट को सौंपी

बुधवार को यह रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसी ने कलकत्ता हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा की एकल पीठ को सौंपी दी

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कोलकाता. करीब साढ़े तीन महीने बाद पिछले सप्ताह शिक्षक नियुक्ति घोटाले के आरोपी सुजय कृष्ण भद्र उर्फ ‘कालीघाटेर काकू’ के वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (इडी) को मिली थी. बुधवार को यह रिपोर्ट केंद्रीय जांच एजेंसी ने कलकत्ता हाइकोर्ट की न्यायाधीश अमृता सिन्हा की एकल पीठ को सौंपी दी. हाइकोर्ट के निर्देश पर ही इडी भद्र के वॉयस सैंपल का नमूना संग्रह कर पाने में सफल हो पाया था. बुधवार को शिक्षक नियुक्ति घोटाले में लीप्स एंड बाउंड्स कंपनी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सिन्हा ने इडी से भद्र के वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट के बारे में जानना चाहा. इसके बाद ही इडी के अधिवक्ता ने कहा : सुजय कृष्ण भद्र की आवाज का नमूना हमारे (इडी की जांच) पक्ष में आया है. न्यायाधीश सिन्हा ने यह भी जानना चाहा कि रिपोर्ट के मिलने के बाद इडी ने अगला क्या कदम उठाया. इसपर केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि मामले की जांच जारी है और उक्त मामले में पीएमएलए एक्ट के तहत कुछ संपत्तियां कुर्क की गयी हैं. गौरतलब है कि शिक्षक नियुक्ति घोटाले में भद्र की गिरफ्तारी हुई थी. वह इडी की जांच के दायरे में पहले से ही थे. इडी ने जिस दिन भद्र के ठिकानों पर छापा मारा था, उसी दिन राहुल बेरा नामक एक सिविक वॉलंटियर के आवास पर भी अधिकारी जांच के लिए पहुंचे थे. बेरा का मोबाइल फोन जब्त किया गया था, जिसकी जांच के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों को बेरा और एक अन्य शख्स के बीच हुई बातचीत का ऑडियो क्लिप मिला. उस शख्स ने बेरा से यह कहा था कि नियुक्तियों से संबंधित सारे तथ्यों को फोन से डिलीट कर दो. इडी ने आशंका जतायी थी कि बेरा से फोन पर बात करने वाला शख्स भद्र थे. यही वजह है कि इडी ने भद्र के वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक जांच कराने का फैसला लिया. हालांकि, गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत की अवधि में भद्र अस्वस्थ होने के कारण अस्पताल में भर्ती रहे और इसकी वजह से उनका वॉयस सैंपल लेने के लिए इडी को काफी मशक्कत करनी पड़ी. इसी साल जनवरी में कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर फॉरेंसिक जांच के लिए भद्र का वॉयस सैंपल लिया जाना संभव हो सका.

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