रानीगंज म्युनिसिपल मार्केट में मसलों का अंबार, कब सुध लेंगे सरकार

Updated at : 16 Jul 2025 9:23 PM (IST)
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रानीगंज म्युनिसिपल मार्केट में मसलों का अंबार, कब सुध लेंगे सरकार

रानीगंज का म्युनिसिपल मार्केट और ऐतिहासिक रानीगंज हाटतला उर्फ हटिया इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रहा हैं. हल्की बारिश में भी दुकानों में पानी घुसने से लेकर जर्जर बुनियादी ढांचे तक, व्यापारियों और खरीदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

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रानीगंज.

रानीगंज का म्युनिसिपल मार्केट और ऐतिहासिक रानीगंज हाटतला उर्फ हटिया इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रहा हैं. हल्की बारिश में भी दुकानों में पानी घुसने से लेकर जर्जर बुनियादी ढांचे तक, व्यापारियों और खरीदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. स्थानीय प्रशासन की उदासीनता से स्थिति बदतर हो गयी है, जिससे एक समय का चहल-पहल भरा बाजार अब ‘नरक का गड्ढा’ बन गया है.

म्युनिसिपल मार्केट में जलभराव : सात साल पुरानी समस्या

म्युनिसिपल मार्केट में हल्की बारिश में भी दुकानों के अंदर पानी घुस जाने की समस्या पिछले सात वर्षों से बनी हुई है. किराना दुकानदार अमर साव ने बताया कि इस वजह से उनका सामान बर्बाद हो जाता है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.व्यापारियों ने बोरो अधिकारी से इसकी शिकायत भी की है, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है. आलू, प्याज के विक्रेता शोएब खान ने बताया कि थोड़े से बारिश में जल जमाव हो जाती है,ग्राहक दुकान को दुकान में आना कष्टकर होती है. दुकानदारों का मानना है कि आसपास की खस्ताहाल निकासी व्यवस्था इस समस्या की जड़ है. नालियों से पानी का उचित निकास न होने के कारण हल्की बारिश में भी पानी दुकानों में भर जाता है.

जर्जरता और अव्यवस्था का प्रतीक

लंबे समय से चली आ रही रानीगंज की सब्जी मंडी, जिसे रानीगंज हाट तला उर्फ हटिया के नाम से जाना जाता है, अब अपनी पहचान खोती जा रही है. 1999 में शोष्ठी गरिया इलाके से स्थायी रूप से यहां स्थानांतरित होने के बाद, रानीगंज नगर पालिका ने इसके ऊपर दो मंजिला मंडी और आसपास गल्ले तथा अन्य विभिन्न दुकानों के लिए 100 से अधिक दुकानें बनवाई थीं.उस समय साइकिल स्टैंड, शौचालय, चार पानी की टंकियां और एक कुआं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध थीं.

हालांकि, अब सभी वर्तमान में स्थिति दयनीय है:अधिकांश इलाकों में पानी की आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है,सब्जी पर पानी छिड़कने और धोने के लिए भी दूर से पानी ढो कर लेनी पड़ती है. चार में से दो पानी की टंकियां और छत पर लगी दो टंकियां टूटी हुई हैं. पिछले सात-आठ वर्षों से पूरे बाजार के आसपास कोई नवीनीकरण कार्य नहीं हुआ है. गर्मी में चिलचिलाती धूप और बरसात में मूसलाधार बारिश से खरीदार और विक्रेता दोनों परेशान हैं. बाजार में अभी भी 60 से 70 से अधिक दुकानें खाली पड़ी हैं, जिन्हें विभिन्न कारणों से किसी व्यवसायी को नहीं दिया गया है. मानसून के दौरान, टिन शेड के नष्ट होने और मरम्मत न होने के कारण बाजार का एक बड़ा हिस्सा पानी से भर जाता है। चारों ओर कचरे के ढेर और सफाई का कोई निशान नहीं है.चारो और बदबू फैली रहती है. सड़क की मरम्मत के कुछ प्रयासों के बावजूद, हजारों चूहों ने बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए हैं, जिससे समस्या और बढ़ गई है.

पुरुषों के शौचालय गंदे हैं, छत से सीमेंट का प्लास्टर गिर रहा है और पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं है.महिलाओं का बाथरूम ज्यादातर समय बंद रहता है और अंदर गंदे मल से भरा होता है.बाजार प्रभारी ने इसके लिए सेप्टिक टैंक के अपेक्षाकृत छोटे होने को जिम्मेदार ठहराया है. कुछ व्यापारियों ने दुकानों के आसपास अपनी दुकानें फैला दी हैं, जिससे ग्राहकों को असुविधा होती है और यातायात की भीड़ भी बढ़ जाती है.

मंदी की मार झेल रहे दुकानदार

रानीगंज के एक बड़े हिस्से में यातायात की भीड़ लंबे समय से एक बड़ी समस्या है. पुलिस प्रशासन ने कई बार इसे नियंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है. बाजार की अव्यवस्था भी इस समस्या में योगदान करती है.ग्राहकों की कमी तथा दूसरे कई स्थान पर अस्थाई बाजार होने के कारण यगण के वयापारी आर्थिक मंदी की दौर से गुजर रहे है.

व्यापारियों से एक निश्चित राशि ली जाती है और उसके लिए नगर निगम से पर्ची भी दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की हालत में कोई सुधार नहीं देखा जा रहा है.रानीगंज का यह लंबा और प्राचीन बाजार अपनी उपेक्षा के कारण अब सबकी चिंता का विषय बन गया है. इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि बाजार अपनी पुरानी पहचान वापस पा सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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