जिले में एक लाख से ज्यादा हैं तार्किक विसंगति वाले वोटर्स, कागजात की जांच शुरू
Updated at : 23 Feb 2026 9:18 PM (IST)
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मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया के तहत जिला में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगति वाले एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सामने आये हैं
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आसनसोल.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया के तहत जिला में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगति वाले एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सामने आये हैं, जिसमें 67 फीसदी वे मतदाता हैं जिनके पास कागजात के नाम पर सिर्फ आधार कार्ड और पैन कार्ड है और 33 फीसदी वे मतदाता जो अपना नाम, अपने पिता का नाम, उम्र आदि में गलतियों को सुधारने से जुड़े पुख्ता कागजात नहीं जमा कर पाए है. इनके कागजातों की नये सिरे से जांच होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार यह जांच जिला जज, अतिरिक्त जिला जज या पूर्व जिला जज पद के अधिकारी करेंगे, इसे लेकर जिला के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों के लिए नौ अतिरिक्त जिला जजों की तैनाती की गयी है. इनके साथ माइक्रो ऑब्जर्वर, सहायक चुनाव निर्वाचक अधिकारी (एइआरओ) और डेटा ऑपरेटर रहेंगे. सोमवार को इसे लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में बैठकों का दौर चला. गौरतलब है कि तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को लेकर पूरे राज्य में घमासान मचा हुआ है. पश्चिम बर्दवान जिला के हर विधानसभा क्षेत्र में इनकी औसत संख्या 12 हजार करके है. सूत्रों के दावे पर यकीन करें, तो यह संख्या पहले काफी ज्यादा थी. कार्य में तैनात माइक्रो ऑब्जर्वर्स ने अनेकों छोटी गलतियों को भी नये सिरे से तैयार हो रही तार्किक विसंगति की सूची में डाल दिया था, लेकिन इस पर काफी चर्चा के बाद फिलहाल यह संख्या आयी है. जिला जज और अतिरिक्त जिला जज की जांच में जो कागजात खरे नहीं उतरेंगे, उनके नाम के साथ क्या होगा, इस पर अभी तक कोई दिशानिर्देश जारी नहीं हुआ है. पश्चिम बर्दवान जिले में हर विधानसभा क्षेत्र को लेकर जिला जज या अतिरिक्त जिला जजों के बैठने की जगह भी तैयार कर दी गयी है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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