मास्टर सूर्यसेनपल्ली में पुरजोर विरोध से थमी तालाब भराई

Updated at : 26 Sep 2024 9:42 PM (IST)
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मास्टर सूर्यसेनपल्ली में पुरजोर विरोध से थमी तालाब भराई

गुरुवार सुबह जिला के पुरुलिया नगरपालिका के वार्ड तीन के मास्टर सूर्यसेनपल्ली क्षेत्र में जलीय जमीन को तालाब बता कर अवैध रूप से पाटने का आरोप लगाते हुए दर्जनों लोग उतर कर विरोध प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों ने आइटी पार्क के सामने सड़क जाम कर दी. इससे वहां वाहनों का जाम लग गया.

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पुरुलिया.

गुरुवार सुबह जिला के पुरुलिया नगरपालिका के वार्ड तीन के मास्टर सूर्यसेनपल्ली क्षेत्र में जलीय जमीन को तालाब बता कर अवैध रूप से पाटने का आरोप लगाते हुए दर्जनों लोग उतर कर विरोध प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों ने आइटी पार्क के सामने सड़क जाम कर दी. इससे वहां वाहनों का जाम लग गया. एक प्रदर्शनकारी धीरेन मंडल ने दावा किया कि बीते कुछ दिनों से उक्त इलाके में तालाब को घेर कर मिट्टी से भरा या पाटा जा रहा है. उसके बड़े हिस्से को पाट दिया गया है. तालाब को इस तरह पाटने से क्षेत्र में भूमिगत जल-स्तर और नीचे चला जायेगा, जिससे स्थानीय लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ेगी.

इसलिए हमलोगों की मांग है कि इस तालाब की मिट्टी से भराई अविलंब रोकी जाये. इस संबंध में जिला शासक (डीएम) रजत नंदा से लेकर नगरपालिका के अधिकारियों को सूचना दी गयी है. लेकिन अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई है. इसलिए आज हमलोगों ने सड़क पर उतर कर चक्काजाम किया. खबर मिलते ही पुरुलिया सदर अनुमंडल अधिकारी उत्पल घोष के नेतृत्व में भारी पुलिस बल वहां पहुंच गया. स्थानीय पार्षद भी पहुंचे. अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को काफी देर तक समझाया, तब जाकर पथावरोध थमा. स्थानीय पार्षद सुनय कविराज ने बताया कि उस जलीय भूमि के मालिक आशीष अधिकारी हैं, जो घेराबंदी कर उस जलीय जमीन को मिट्टी से भरवा रहे हैं. इससे प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया है. उधर, उस जलीय जमीन के मालिक आशीष अधिकारी ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि रिकॉर्ड में वो जमीन मौरुसी है, जिसे जलीय या जलाशय बता कर अवैध रूप से पाटने का आरोप लगाया जा रहा. सफाई दी कि उस जमीन को पाटने के लिए उनके पास कोर्ट की अनुमति है, जिसके तहत उसे मिट्टी से पाटा जा रहा है.

पुरुलिया सदर अनुमंडल अधिकारी उत्पल घोष ने बताया कि उस जलीय जमीन को पाटने का कार्य पुरजोर स्थानीय विरोध से फिलहाल रोक दिया गया है. भूमि-मालिक के पास कोर्ट की अनुमति की प्रति (कॉपी) देखी गयी है. स्थानीय लोगों व अन्य संबद्ध पक्षों से बातचीत की गयी है.

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