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बीरभानपुर श्मशान में जलाने को लकड़ी नहीं, लावारिस लाशों से आने लगी है सड़ांध

Updated at : 30 Mar 2025 12:07 AM (IST)
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बीरभानपुर श्मशान में जलाने को लकड़ी नहीं, लावारिस लाशों से आने लगी है सड़ांध

गतिरोध. बीते तीन दिनों से श्मशान में लकड़ी नहीं, कैसे जलाये जायें शव

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दुर्गापुर नगर निगम के श्मशान घाट पर शवों से आती दुर्गंध से लोग बेहाल दुर्गापुर. शहर के बीरभानपुर स्थित नगर निगम के श्मशान घाट पर बीते तीन दिनों से शवों को जलाने के लिए लकड़ी (जलावन) नहीं है, जिससे वहां रखी लावारिस लाशों से सड़ांध आने लगी है. इसके चलते आसपास के लोग अपने मुख पर रुमाल या अन्य कपड़ा रखने को मजबूर हैं. निगम के शव-वाहन में रखी लावारिस लाशें सड़ने लगी हैं और भयंकर दुर्गंध आ रही है. इससे श्मशान घाट और आसपास के इलाके के लोग बेहाल हैं. श्मशान-घाट पर दूसरे शवों का दाह-संस्कार करने आये लोगों को काफी परेशानी हो रही है. मामले को लेकर निगम को लोग जम कर कोस रहे हैं. निगम की इस विफलता को लेकर शहर में राजनीति भी चल पड़ी है. हालांकि इस बाबत पूछने पर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने मसले के जल्द हल का भरोसा दिया है. पर बीते तीन दिनों से श्मशान-घाट पर शवों की बदबू ऐसी है कि कोई वहां बिना मुंह ढके रुक नहीं सकता. उल्लेखनीय है कि दुर्गापुर का बीरभानपुर श्मशान घाट नगर निगम संचालित करता है. श्मशान घाट पर विद्युत शवदाह-इकाई भी है, जिसमें निगम के निर्धारित शुल्क को अदा करके ही शवों का वहां आये लोग दाह-संस्कार करते हैं. दूसरी ओर, लावारिस शवों को लकड़ी से ही जलाया जाता है. श्मशान-घाट में शवों के अंतिम-संस्कार के साथ काली मंदिर भी है, जहां आसपास के लोग पूजा भी करने आते है. सूत्रों की मानें, तो श्मशान-घाट में पिछले कुछ दिनों से जलावन खत्म हो गया है. इसससे लावारिस लाशों को जलाने का कार्य थम गया है. स्थानीय लोगों ने बताया कि लकड़ी की कमी से श्मशान घाट में बीते तीन दिनों से कई लावारिस शव निगम के वाहन में रखे हुए हैं. बंद वाहन के शवों से खून टपक रहा है और दुर्गंध ऐसी है कि कोई पास नहीं जा सकता. इससे अपने दिवंगत इष्टजनों के शवों को जलाने के लिए आनेवाले लोग भी परेशान हैं. तीन दिनों से बंद वाहन में रखे शव सड़ने लगे हैं. यह सब सुन कर स्थानीय लोग डर के मारे श्मशान-घाट स्थित काली मंदिर में पूजा करने नहीं आ रहे हैं. बदबू फैलने से बीमारी फैलने की आशंका बन गयी है. बच्चों को अपने परिवार के साथ श्मशान घाट में आने की अनुमति नहीं है. स्थानीय मंजू पाल दे ने कहा कि वह काली मां की पूजा करना चाहती थीं, लेकिन वहां बदबू चारों ओर फैली हुई है. चेहरे पर कपड़ा बांध कर मंदिर से निकलना पड़ा. इस संबंध में पूछने पर निगम के प्रशासनिक बोर्ड की सदस्य राखी तिवारी ने माना कि श्मशान घाट पर जलावन की कमी हो गयी है. समस्या की जानकारी मिली है. जल्द ही इसका समाधान कर दिया जायेगा. 26 मार्च को शवों को विधाननगर महकमा अस्पताल से भेजा गया था. 27 तारीख को लकड़ियां खत्म हो जाने से शवों को जलाया नहीं जा सका. 28 तारीख को अमावस्या के कारण दाह-संस्कार बंद था. लावारिस शवों का दाह- संस्कार शनिवार रात को कर दिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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