बर्नपुर में स्कूलों के निजीकरण से परहेज करे आइएसपी प्रबंधन, नहीं तो और बड़ा आंदोलन

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बर्नपुर में स्कूलों के निजीकरण से परहेज करे आइएसपी प्रबंधन, नहीं तो और बड़ा आंदोलन

प्रतिवाद. आइएसपी स्कूलों को निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ आंदोलन तेज, छात्रों के अभिभावकों ने चेताया

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विरोध रैली के बाद आइएसपी प्रबंधन को सौंपा गया ज्ञापन हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से नहीं होने देंगे खिलवाड़

बर्नपुर. सेल-आइएसपी के अधीन संचालित बर्नपुर बॉयज और गर्ल्स प्राइमरी व हाइ स्कूलों को निजी हाथों में सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू होते ही अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. निविदा जारी किए जाने के बाद से ही इस कदम के खिलाफ विरोध तेज हो गया है.

टनेल गेट से रैली कर निदेशक दफ्तर तक पहुंचे लोग

सोमवार को वार्ड 78 के पार्षद और प्रदेश शिक्षक नेता अशोक रुद्र के नेतृत्व में दो बोरो चेयरमैन देवाशीष सरकार, शिवानंद बाउरी, तृणमूल पार्षदों और बड़ी संख्या में स्थानीय महिला-पुरुषों ने टनल गेट से रैली निकाली. रैली आईएसपी के निदेशक प्रभारी कार्यालय पहुंची, जहां लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर निजीकरण का विरोध किया. अशोक रुद्र के नेतृत्व में पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीजीएम इंचार्ज (एचआर) यूपी सिंह को ज्ञापन सौंपा और स्कूलों के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की. साथ ही चेतावनी दी कि यदि इस पर कोई पहल नहीं की गई तो आंदोलन जारी रहेगा.

गरीब छात्रों के भविष्य से खेलने का आरोप

अशोक रुद्र ने कहा कि सेल-आईएसपी द्वारा संचालित बर्नपुर बॉयज, गर्ल्स और मॉडल इंग्लिश स्कूल में करीब दो हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं, जिनमें गरीब परिवारों के बच्चे भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में छोटादिघारी स्कूल को कोविड अस्पताल में बदला गया था, लेकिन अब प्रबंधन शिक्षा विरोधी रवैया अपना रहा है. उन्होंने कहा कि आईएसपी के पास आधुनिकरण के लिए हजारों करोड़ रुपये हैं, जिससे स्कूलों का विकास किया जा सकता है, फिर भी इन्हें निजी हाथों में सौंपा जा रहा है. ऐसा कदम बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है.

प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर भी उठे सवाल

इस मौके पर बोरो चेयरमैन डॉ देवाशीष सरकार ने कहा कि आईएसपी और ईसीएल से जुड़े कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक है. पुरुषोत्तमपुर और कोयलापुर जैसे क्षेत्रों में सिलिकोसिस से लोगों की मौतें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि दोनों प्रतिष्ठानों को उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार पर भी ध्यान देना चाहिए.

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