रेलवे के पूर्व कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट करके लूटे 31.30 लाख रुपये
Updated at : 12 Jan 2026 9:38 PM (IST)
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दो दिनों के अंतराल में डिजीटल अरेस्ट का दो मामला आया सामने और दोनों ही पीड़ित अंडाल थाना क्षेत्र के निवासी हैं.
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आसनसोल/अंडाल.
दो दिनों के अंतराल में डिजीटल अरेस्ट का दो मामला आया सामने और दोनों ही पीड़ित अंडाल थाना क्षेत्र के निवासी हैं. एक इसीएल के पूर्व कर्मचारी तो दूसरे हैं रेलवे के पूर्व कर्मचारी. डिजिटल अरेस्ट के लिए साइबर अपराधियों ने अपने पुराने फॉर्मूले को ही लागू किया और अंडाल थाना क्षेत्र के गोल्डन रोड साउथ बाजार इलाके के निवासी व रेलवे के पूर्व कर्मचारी मोहम्मद जमील अहमद को तीन दिनों तक डिजिटल में रखकर उनकी सारी जमा पूंजी 31.30 रुपये लूट लिया. श्री अहमद ने इसकी शिकायत अंडाल थाने में दर्ज करायी. जिसके आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ कांड संख्या 15/26 में बीएनएस की धारा 318(4)/316(2)/61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई. गौरतलब है कि नौ जनवरी 2025 को साइबर क्राइम थाना आसनसोल में डिजिटल अरेस्ट करके 1.01 करोड़ रुपये लूटने का एक मामला दर्ज हुआ. इस मामले में साइबर अपराधियों ने अंडाल थाना क्षेत्र के उखड़ा, सुभाषपाड़ा गुरुद्वारा रोड इलाके के निवासी व इसीएल के पूर्व कर्मचारी तरुण कुमार गराई को 23 दिसंबर 2025 से सात जनवरी 2026, 16 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1.01 करोड़ रुपये लूटे. इस घटना के दो दिनों बाद ही अंडाल थाना इलाके के ही निवासी व रेलवे के पूर्व कर्मचारी को 31.30 लाख रुपये लूटे.कैसे हुई यह डिजिटल अरेस्ट की घटना
श्री अहमद ने अपनी शिकायत में बताया कि पांच जनवरी सुबह 11.20 बजे उन्हें 8451849201 नम्बर से कॉल आया. जिसमें रीना गुप्ता नामक एक महिला ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके आधार नम्बर का इस्तेमाल करके दरियागंज में एक मोबाइल सिमकार्ड लिया गया है और केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है. इस खाते में 30 लाख रुपये का लेनदेन किया गया है, यह सिमकार्ड और पैसा मनी लॉन्ड्रिंग सहित अनेकों अवैध गतिविधियों में शामिल है.
यह सिमकार्ड तीन जुलाई 2025 को जारी हुआ और चार जुलाई 2025 को ही डिएक्टिवेट कर दिया गया. इसके बाद से सीबीआइ, इडी, दिल्ली पुलिस के अधिकारी बनकर अपराधियों का फोन आना शुरू हुआ. इनलोगों ने श्री अहमद की संलिप्ता नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग मामले से कर दी. फिर उन्हें उस फर्जी बैंक खाते का डेबिट कार्ड दिखाया और बताया गया कि इस मामले में उनपर नजर रखी जा रही है. फिर सुप्रीम कोर्ट, आरबीआइ का कुछ कागजात दिखाया. इसके बाद कॉल किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया, जिसने खुद को एसएसपी बताया. उसने उन्हें धमकी दी कि इस प्रक्रिया की जानकारी यदि किसी को भी दी गयी तो पूरे परिवार को गिरफ्तार करके दिल्ली लाया जायेगा. अकाउन्ट वेरिफिकेशन के बहाने कथित एसएसपी ने श्री अहमद के खाते से सारे पैसे अपने दिये हुए नम्बर पर ट्रांसफर करवाये और भरोसा दिया कि आरबीआइ द्वारा जांच के बाद उनकी राशि लौटा दी जायेगी. श्री अहमद के बचत खाते और फिस्कड डिपॉजिट की कुल राशि 31.30 लाख रुपये उसने अपने अकाउन्ट में मंगवा लिया. श्री अहमद ने बताया कि पांच जनवरी सुबह से लेकर सात जनवरी तक वे लोग व्हाट्सएप पर वीडियो कॉलिंग पर रहे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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