आसनसोल.
साइबर अपराधियों के एक के बाद एक कारनामों से पुलिस की परेशानी बढ़ी हुई है. इस बीच साइबर अपराधियों ने कुछ ऐसा कारनामा किया कि साइबर क्राइम थाना आसनसोल के अधिकारी भी हैरान हो गये हैं. कुल्टी थाना क्षेत्र के सीतारामपुर चलबलपुर इलाके के निवासी मिहिर गोराई की पत्नी सावित्री गोराई के बैंक खाते से साइबर अपराधियो ने आठ दिसंबर 2024 को 7.50 लाख रुपये उड़ा लिये. जिसकी प्राथमिकी साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस नंबर 26/25 में दर्ज है. इस बार सावित्री गोराई के पति मिहिर गोराई को लूटने के लिए साइबर अपराधियों ने जो कहानी रची, उसे सुन कर पुलिस अफसर के भी होश उड़ गये हैं. श्री गोराई को साइबर क्राइम थाना का एक पुलिस अधिकारी बन कर चार मई को फोन किया गया और उन्हें कहा गया कि उनकी पत्नी के साथ हुए धोखाधड़ी के मामले में जामताड़ा गैंग के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. इन आरोपियों को लाने और अदालत में भेजने को लेकर कुछ शुल्क के रूप में पैसे की मांग की और श्री गोराई उनके झांसे में आकर पैसे दे दिया. जब उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर ठग हैं तो वे 10 मई को साइबर क्राइम थाने में आकर शिकायत की. इस पर साइबर क्राइम थाना आसनसोल में केस नंबर 40/25 में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(2)/318(4)/319(2)/61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई.आठ दिसंबर को सावित्री गोराई के साथ कैसे हुई थी ठगी
साइबर क्राइम थाना आसनसोल में 26 मार्च 2024 को एक प्राथमिकी दर्ज हुई. इस घटना की शिकायत एनसीआरपी पोर्टल में आठ दिसंबर 2024 को हुई थी. जिसके आधार पर साइबर क्राइम थाना में 11 दिसंबर 2024 को जीडीई दर्ज किया गया. 26 मार्च को इसपर प्राथमिकी दर्ज हुई. इस मामले में सीतारामपुर चलबलपुर इलाके की निवासी सावित्री गोराई ने अपनी शिकायत में कहा था कि आठ दिसंबर को उनके व्हाट्सएप पर मिड डे मिल ग्रुप में एपीके फाइल रिसीव किया. जिसके बाद उनका मोबाइल फोन हैंग हो गया और उसपर वह कुछ भी नहीं कर पा रही थी. बाद में उन्हें पता चला कि उनके बैंक खाते से 7.5 लाख रुपये की अवैध निकासी हुई है. शिकायत में लिखा कि उन्होंने कोई डॉक्यूमेंट शेयर नहीं किया, किसी को कोई ओटीपी नहीं दिया. इसके बावजूद अवैध निकासी हुई.साइबर क्राइम थाने के अफसर नवीन कुमार का नाम लेकर की ठगी
साइबर ठगों ने सावित्री गोराई के मामले में जांच अधिकारी नवीन कुमार का नाम लेकर मिहिर गोराई को अपने झांसे में लिया. श्री गोराई ने अपनी शिकायत में कहा कि चार मई दोपहर 12.52 मिनट पर एक अज्ञात नंबर 7049930373 से व्हाट्सऐप पर कॉल आयी. कॉल करनेवाले ने खुद को साइबर क्राइम थाना आसनसोल का सहायक अवर निरीक्षक नवीन कुमार बताते हुए कहा कि वह उनकी पत्नी के साथ हुई ठगी के मामले की जांच कर रहे हैं. उसने बताया कि इस मामले में शामिल जामताड़ा के साइबर अपराधियों के गिरोह को गिरफ्तार किया है. आधिकारिक रूप से सूचित करने में देर होने का एक गुप्त कारण भी बताया. फिर उसने कहा कि आरोपियों को ले जाने और उन्हें अदालत में भेजने के लिये कुछ शुल्क हवाला देकर 20 हजार रुपये की मांग की. उनके आधिकारिक नंबर के बजाय जिस नंबर से कॉल किया था, उस नंबर पर पैसे भेजने को कहा. उसकी बातों पर भरोसा करके उन्होंने अपने एसबीआइ खाते से रुपये ट्रांसफर कर दिये. उन्हें इस लेनदेन में धोखाधड़ी का एहसास होने पर उन्होंने नवीन कुमार के आधिकारिक नंबर पर कॉल करने के बाद यकीन हो गया कि साइबर अपराधियों के झांसे में आकर पैसे गंवा दिया है. जिसकी शिकायत उन्होंने दर्ज करायी.साइबर ठगी के पीड़ित भी रहें सावधान, फिर ठगने की है तैयारी
मिहिर गोराई की घटना ने पुलिस की परेशानी और भी बढ़ा दी है. साइबर अपराधी हर मामले में जांच अधिकारियों की सूची तैयार की है और उस मामले के पीड़ितों से जांच अधिकारी बन कर संपर्क कर रहे हैं. जिससे उनके साथ बातचीत करना और उन्हें अपने झांसे में लेना आसान होगा. पुलिस की ओर से बताया गया है कि किसी भी तरह पुलिस लोगों से पैसे नहीं मांगती है. यदि फोन करके कोई खुद को जांच अधिकारी बताकर पैसे की मांग करता है तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय थाने को दें. किसी तरह भी पैसे की लेनदेन न करें. लोगों को लूटने का साइबर अपराधियों का यह नया फॉर्मूला है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

