ePaper

प्रोफेसर से बदसलूकी पर कॉलेज प्रबंधन का कड़ा रुख

Updated at : 19 Jul 2025 12:29 AM (IST)
विज्ञापन
प्रोफेसर से बदसलूकी पर कॉलेज प्रबंधन का कड़ा रुख

गुरुवार देर संध्या को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉलेज प्रशासन ने घोषणा की कि घटना में शामिल छात्रों को फिलहाल केवल परीक्षा देने और परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए ही कॉलेज आने की अनुमति होगी.

विज्ञापन

आरोपियों को केवल परीक्षा के लिए कॉलेज आने की अनुमति

रानीगंज. रानीगंज के प्रतिष्ठित टीडीबी कॉलेज में 16 मई को हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, जिसमें एक प्रोफेसर के साथ बदसलूकी की गयी थी, कॉलेज प्रबंधन समिति ने आखिरकार कड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. गुरुवार देर संध्या को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉलेज प्रशासन ने घोषणा की कि घटना में शामिल छात्रों को फिलहाल केवल परीक्षा देने और परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए ही कॉलेज आने की अनुमति होगी.

क्या था मामला?

यह पूरा प्रकरण 16 मई को शुरू हुआ, जब टीडीबी कॉलेज की टीचर काउंसिल की बैठक चल रही थी. आरोप है कि इसी दौरान एक छात्र बैठक में घुस आया और टीचर-इन-चार्ज प्रोफेसर मिलन मुखर्जी को उंगली दिखाकर बात करने लगा. फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर पर्साल किस्कु ने इस व्यवहार का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गयी. घटना के बाद कुछ छात्र और बाहरी लोग इस मुद्दे को लेकर कॉलेज में उत्तेजना फैलाने लगे.

कॉलेज के कई शिक्षक-शिक्षिकाओं ने टीआईसी रूम के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें कुछ छात्र भी शामिल हो गये. यह प्रदर्शन देर शाम तक चला और उस दिन कॉलेज परिसर में भारी तनाव और अराजकता का माहौल देखा गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रोफेसर पर्साल किस्कु को सुरक्षा व्यवस्था के साथ घर भेजा गया.

आदिवासी संगठनों का समर्थन और आरोप

इस घटना के बाद, 26 मई को आदिवासी समुदाय के लोगों ने रानीगंज थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने प्रोफेसर पर्साल किस्कु के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया. उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की जांच का हवाला देते हुए कहा कि मारपीट के आरोप निराधार हैं इसके विपरीत, उन्होंने टीचर-इन-चार्ज मिलन मुखर्जी द्वारा छात्र के उंगली दिखाकर धमकाने की घटना को गंभीरता से न लेने पर सवाल उठाये. नौ जून को, आदिवासी संगठनों ने प्रोफेसर पर्साल किस्कु के समर्थन में कॉलेज में एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. गुरुवार को आदिवासी समुदाय की तरफ से कॉलेज को ईमेल कर यह जानने की कोशिश की गई कि उन छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है जिन्होंने एक आदिवासी प्रोफेसर के साथ बदतमीजी की थी

छात्रों के भविष्य और सम्मानजनक वातावरण पर जोर

तापस बंदोपाध्याय ने इस बात पर जोर दिया कि छात्र और शिक्षकों के बीच एक सम्मानजनक वातावरण रहना चाहिए. उन्होंने कहा, “कुछ भी हो जाए छात्रों को अपने शिक्षकों का सम्मान करना होगा, यही हमारी संस्कृति है और अगर किसी छात्र ने ऐसा नहीं किया तो उसके खिलाफ जो भी उचित कार्रवाई होगी वह की जायेगी. ” उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि कॉलेज में पठन-पाठन के माहौल को बिगड़ने नहीं दिया जायेगा और कॉलेज प्रबंधन इसे लेकर सजग है.

गौरतलब है कि आदिवासी संगठनों ने भी छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसी सख्त कदम से फिलहाल परहेज करने की बात कही थी. संताली भाषा में पढ़ाई और आदिवासी समुदाय की भावनाएं ः तापस बंदोपाध्याय ने बताया कि टीडीबी कॉलेज में संताली भाषा में पठन-पाठन शुरू किया गया है और यह इस पूरे सबडिवीजन में एकमात्र कॉलेज है जहां संथाली भाषा में पढ़ाई करवाई जाती है.उन्होंने कहा कि ऐसे में आदिवासी समुदाय की भावनाओं को आहत करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
GANESH MAHTO

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola