तालडांगरा के बाद बरजोड़ा पोखन्ना सहकारी समिति पर भी तृणमूल कांग्रेस का निर्विरोध कब्जा

Updated at : 12 Jul 2025 9:56 PM (IST)
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तालडांगरा के बाद बरजोड़ा पोखन्ना सहकारी समिति पर भी तृणमूल कांग्रेस का निर्विरोध कब्जा

बरजोड़ा के पोखन्ना सहकारी समिति में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल की. तालडांगरा के बाद, बरजोड़ा के पोखन्ना सहकारी समिति में भी तृणमूल समर्थित उम्मीदवारों ने प्रतिद्वंद्विता के बगैर जीत हासिल की.

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बांकुड़ा.

बरजोड़ा के पोखन्ना सहकारी समिति में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल की. तालडांगरा के बाद, बरजोड़ा के पोखन्ना सहकारी समिति में भी तृणमूल समर्थित उम्मीदवारों ने प्रतिद्वंद्विता के बगैर जीत हासिल की. शनिवार को पोखन्ना के आसमान में भी हरा अबीर उड़ा. लेकिन विपक्ष ने दावा किया कि यह चुनाव अनैतिक था. उन्होंने दावा किया कि यदि जरूरी हुआ, तो वे कानूनी सहारा भी ले सकते हैं. बरजोड़ा के तृणमूल विधायक आलोक मुखर्जी ने दावा किया कि सभी सदस्यों के साथ आम बैठक में सर्वसम्मति से नौ उम्मीदवारों का चयन किया गया है और मतदान की तारीख की घोषणा भी की गयी थी. लेकिन तृणमूल प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने को कोई अन्य उम्मीदवार आगे नहीं आया. मगर विपक्षी भाजपा, माकपा व कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल व संबंधित विभाग पर गंभीर आरोप लगाये हैं. शनिवार को बांकुड़ा के बरजोड़ा प्रखंड में पोखन्ना सहकारी समिति का चुनाव हुआ. पर यहां की कुल नौ सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के अलावा किसी भी विपक्षी पार्टी भाजपा, माकपा या कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे. इस तरह तृणमूल निर्विरोध जीत गयी. विजेता की घोषणा के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल के नेताओं ने विधायक आलोक मुखर्जी व प्रखंड अध्यक्ष कालिदास मुखर्जी के नेतृत्व में गाजे-बाजे के साथ विजय जुलूस निकाला. उनका दावा है कि विपक्षी भाजपा, माकपा या कांग्रेस ने कुल नौ में से किसी भी सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे. अब तृणमूल के कार्यकर्ता जीत से उत्साहित हैं.

इस बीच, भाजपा के बिष्णुपुर सांगठनिक जिलाध्यक्ष सुजीत अगस्ती ने आरोप लगाया कि अगर तृणमूल राज्य में सत्ता में नहीं आती, तो उन्हें पता ही नहीं चलता कि चुनाव रात के अंधेरे में हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग ने चुनाव की कोई अधिसूचना या नोटिस नहीं जारी की थी, कहा कि शनिवार को हुए मतदान के बारे में शुक्रवार रात तक किसी को पता नहीं था, पर अधिसूचना तृणमूल नेताओं के सेलफोन पर घूम रही थी. दावा किया कि ऐसे ढंग से जीतने की कोई वैधता नहीं है. सुजीत अगस्ती ने चुनौती दी कि अगर सहकारिता अधिकारी यह दिखा सकें कि उन्होंने आम जनता के लिए सार्वजनिक सूचना दी थी, तो वे इस जीत को स्वीकार करेंगे. उनका दावा है कि अगर यहां चुनाव हुए होते, तो यकीनन तृणमूल हार जाती.

दूसरी ओर, माकपा बरजोड़ा एरिया कमेटी के सचिव सुजॉय चौधरी के अनुसार पूरे पोखन्ना के लोग इस सहकारिता के तमाशे पर हंस रहे हैं. चुनाव के लिए कोई अधिसूचना नहीं प्रकाशित की गयी. यह भी कहा कि वर्ष 2013, 2018, 2023 में पंचायत चुनाव नहीं होने दिये गये. हालांकि, तृणमूल राज में पोखन्ना क्षेत्र में हुए सभी चुनावों में विपक्ष जीता है. चुनाव हुआ, तो हार जायेंगे, इस हताशा में तृणमूल के लोगों ने सहकारी समिति पर कब्जे का ऐसा रास्ता चुना. सुजॉय चौधरी ने बताया कि वे सोमवार को जिला सहकारी अधिकारी से लिखित शिकायत करेंगे. अगर यह निर्विरोध निर्वाचन अवैध घोषित होता है और फिर भी चुनाव नहीं कराया जाता है, तो कोर्ट जा सकते हैं. इस संदर्भ में विधायक आलोक मुखर्जी ने कहा कि सब कुछ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विकास का प्रतिफल है और यह जीत वर्ष 2026 में होनेवाले विधानसभा चुनाव का संकेत है. क्षेत्र के किसानों ने आमसभा में उपस्थित होकर तृणमूल प्रत्याशियों को चुना है. अधिसूचना सात दिन पहले जारी हुई थी, जो अब भी नोटिस बोर्ड पर है. अखबारों में विज्ञापन भी दिये गये थे.

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