‘आपास’ में आसनसोल नगर निगम सबसे पीछे

Author Amit kumar
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राज्य की मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘आमादेर पाड़ा-आमादेर समाधान’(आपास) की योजनाएं पूरी करने को लेकर आसनसोल नगर निगम राज्यभर में सबसे निचले पायदान पर है.

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आसनसोल.

राज्य की मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘आमादेर पाड़ा-आमादेर समाधान’(आपास) की योजनाएं पूरी करने को लेकर आसनसोल नगर निगम राज्यभर में सबसे निचले पायदान पर है. डीएम और निगम आयुक्त की लगातार समीक्षा के बाद पिछले कुछ हफ्ते में परिणाम पहले से कुछ बेहतर हुआ है, फिर भी आंकड़ों में सबसे नीचे है. कोलकाता नगर निगम ‘आपास’ की योजनाओं का 83.39 फीसदी वर्क ऑर्डर जारी कर पहले पायदान पर, 72.94 फीसदी वर्क ऑर्डर जारी करके दुर्गापुर नगर निगम दूसरे पायदान पर, 65.26 फीसदी वर्क ऑर्डर जारी करके हावड़ा तीसरे स्थान पर और 36.71 फीसदी योजनाओं का वर्क ऑर्डर जारी करके आसनसोल नगर निगम सबसे निचले पायदान पर है. कार्य के पैसा का भुगतान को लेकर आसनसोल नगर निगम का रवैये से नाराज ठेकेदार नये योजनाओं के लिए जारी निविदा में भागीदारी नहीं करने से आपास का कार्य प्रभावित हो रहा है. ठेकेदारों को भरोसा में लेने के लिए लगातार प्रयास जारी है.

उन्हें बताया जा रहा है कि आपास का कार्य पूरा होने के सात दिनों के अंदर पैसा मिल जाएगा, इसके बावजूद भी 3503 कार्यों को लेकर जारी निविदाओं में से 1286 के लिए वर्क ऑर्डर जारी हुआ है. बाकी के कार्यों को लेकर भी निगम बार बार निविदा जारी कर रही है. अनेकों कार्यों को लेकर चार बार निविदा जारी करने के बाद भी कोई ठेकेदार नहीं मिला.

पिछली बार के पाड़ाय समाधान के कार्य के रुपये बकाया, डर रहे ठेकेदार

आसनसोल नगर निगम के एक ठेकेदार मुखर्जी इन्टरप्राइसेस के मालिक संजीब मुखर्जी का निधन 20 नवंबर 2023 को हुआ. मुखर्जी इन्टरप्राइसेस का काफी पैसा नगर निगम के पास पड़ा हुआ है, स्वर्गीय मुखर्जी की पत्नी कविता मुखर्जी और एकमात्र पुत्र रिक मुखर्जी इस पैसे के लिए नगर निगम के चक्कर लगाकर थक गये और वह पैसा मांगने के लिए अब नहीं जाते हैं. रिक ने बताया कि 29 अक्तूबर 2022 को पाड़ाय समाधान कार्यक्रम के तहत उनके पिता ने 1,45,276 रुपये का कार्य किया था. पिता के रहते वह पैसा नहीं मिला, अब उनके निधन के बाद भी कार्यालय के चक्कर लगाकर थक गया पैसा नहीं मिला. अधिकारी कहते हैं कि पाड़ाय समाधान का कोई फंड अब नहीं है तो भुगतान कहां से करूं. मेयर से भी तीन बार मुलाकात की. 24 अक्टूबर 2018 की एक निविदा के तहत 6,60,526 रुपये के कार्य का पैसा नहीं मिला. यह सिर्फ मुखर्जी इन्टरप्राइसेस की परेशानी नहीं है. इनकी संख्या काफी है, जिसके कारण आपास के काम मे ठेकेदारों के दिलचस्पी नहीं हो रहा है. प्रशासन लगा हुआ है, क्योंकि चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले सारे कार्यों का वर्क ऑर्डर जारी करना है.

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