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बांकुड़ा में बाढ़ की स्थिति पर मंत्री ने की बैठक

Updated at : 18 Sep 2024 9:32 PM (IST)
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बांकुड़ा में बाढ़ की स्थिति पर मंत्री ने की बैठक

गत शुक्रवार की रात से मंगलवार की सुबह तक लगातार बारिश के कारण कई घर गिर गये और फसलों को नुकसान हुआ, फिर भी बांकुड़ा में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी. लेकिन मंगलवार को डीवीसी के पंचेत, मैथन और दुर्गापुर डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से दामोदर नदी बेसिन जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी है.

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बांकुड़ा.

गत शुक्रवार की रात से मंगलवार की सुबह तक लगातार बारिश के कारण कई घर गिर गये और फसलों को नुकसान हुआ, फिर भी बांकुड़ा में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी. लेकिन मंगलवार को डीवीसी के पंचेत, मैथन और दुर्गापुर डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से दामोदर नदी बेसिन जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी है. बांकुड़ा के छह ब्लॉकों के 12 हजार से ज्यादा लोग बाढ़ के कारण राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं. राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने दक्षिण दामोदर क्षेत्र के जिलों के बाढ़ग्रस्त होने के लिए डीवीसी को जिम्मेदार ठहराया है. बुधवार को उन्होंने दामोदर के तटवर्ती बांकुड़ा के सालतोड़ा, मेजिया, बरजोड़ा, सोनामुखी, इंदास और पात्रसायर ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और इसके बाद सर्किट हाउस में संबंधित क्षेत्रों के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक की.

इस अवसर पर मंत्री ज्योत्सना मांडी, सांसद अरूप चक्रवर्ती, जिले के तृणमूल विधायक, जिला परिषद सभाधिपति, जिला परिषद सदस्य और पंचायत प्रधान भी उपस्थित थे. जिले में इस सालआई बाढ़ के लिए डीवीसी को जिम्मेदार ठहराते हुए मलय घटक ने कहा कि दामोदर घाटी निगम ने राज्य सरकार को सूचित किये बिना लाखों क्यूसेक पानी छोड़ दिया, जिससे दक्षिण दामोदर के हुगली, हावड़ा, मेदिनीपुर और बांकुड़ा जैसे जिलों में बाढ़ आ गयी. डीवीसी और राज्य सरकार में समन्वय की कमी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अगर डीवीसी पानी छोड़ने की सूचना देगा तो वह लिखित रूप से बतायेंगे.

इस बार भी प्रशासन को बिना सूचना दिये पानी छोड़ा गया है. पानी छोड़ने की मात्रा में कोई कमी नहीं आ रही है. मलय घटक ने कहा कि बाढ़ प्रभावित छह प्रखंडों के 12709 लोगों को राहत सामग्री दी गयी है. इसके अलावा 209 राहत शिविर खोले गये हैं. वहीं, विधायक पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के सदस्यों ने प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की है. आपदा प्रतिक्रिया दल मंगलवार से तैयार हैं. डीएम, एसपी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. साथ ही जिले में तीन हजार से अधिक मकान ढह गये हैं.

इनमें से 620 घर पूरी तरह से नष्ट हो गये और 2402 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं. सभी के लिए तिरपाल दिया गया है. उन्होंने कहा कि फसलों को काफी नुकसान हुआ है, हालांकि पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है. श्री घटक ने कहा कि देश में बंगाल ही एकमात्र राज्य है जहां किसानों को फसल बीमा के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ता है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फसल बीमा के भुगतान की व्यवस्था की है. इसलिए किसानों को इस बार भी मुआवजा राशि मिलेगी. मौके पर पश्चिम बंगाल सरकार की खाद्य व आपूर्ति राज्य मंत्री ज्योत्सना मंडी, बांकुड़ा जिला परिषद की सभाधिपति अनुसूया राय, सांसद अरूप चक्रवर्ती, डीएम सियाद एन, एसपी वैभव तिवारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे.

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