बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता के लिए सेमिनार

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आनंदचंद्र कॉलेज में पेटेंट सूचना केंद्र खोलने की पहल वैज्ञानिकों ने कहा, हमारी बौद्धिक संपदा पर हो रहा विदेशी कब्जा जलपाईगुड़ी : यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के महिला-पुरुष उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में घूमने के बहाने आते हैं और यहां से विभिन्न प्रजाति के पौधों, आर्किड व जैविक विविधता के खजाने से विभिन्न […]

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आनंदचंद्र कॉलेज में पेटेंट सूचना केंद्र खोलने की पहल
वैज्ञानिकों ने कहा, हमारी बौद्धिक संपदा पर हो रहा विदेशी कब्जा
जलपाईगुड़ी : यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के महिला-पुरुष उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में घूमने के बहाने आते हैं और यहां से विभिन्न प्रजाति के पौधों, आर्किड व जैविक विविधता के खजाने से विभिन्न चीजों को अपने साथ लिये जाते हैं. इसके बाद उसे अपनी खोज बताकर उस पर पेटेंट का दावा कर देते हैं.
हम लोगों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकार या पेटेंट राइट को लेकर जागरूकता की जो कमी है, उसके चलते हमारी चीजों पर विदेशी अपना बौद्धिक अधिकार जमा ले रहे हैं. गुरुवार को जलपाईगुड़ी के आनंदचंद्र कॉलेज (कला) के कंप्यूटर साइंस विभाग की देखरेख में राज्य विज्ञान एवं तकनीकी काउंसिल और राज्य पेटेंट सूचना केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में यह बात केंद्रीय फसल रोपण शोध संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ अरुण कुमार शीट ने कही. राज्य सरकार ने इस कॉलेज में पेटेंट देने के लिए एक परिसेवा केंद्र खोलने की पहल की है.
डॉ अरुण ने कहा कि हमारे किसान खानदानी परंपरा के रूप में विभिन्न फसलों की खेती करते आ रहे हैं. इसमें वह कई देशज तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं. इन तकनीकों का कोई पेटेंट कराया नहीं गया है. इन फसलों व देशज तकनीकों का पेटेंट किसानों को देना होगा. कई किसानों के नाम जो पेटेंट है, उसे विभिन्न कंपनियां किसानों से लीज या भाड़े पर लेकर उससे मोटा मुनाफा कमा रही हैं. जबकि कंपनियों को संबंधित किसानों को भी अपने लाभ में हिस्सा देना चाहिए.
राज्य के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के तहत आनेवाले राज्य पेटेंट सूचना केंद्र की डॉ महुआ होम चौधरी ने कहा कि हमारे किसान कई फसलों की खानदानी परंपरा के रूप में खेती करते आ रहे है हैं. विभिन्न फसलों की विभिन्न प्रजातियों और उसमें इस्तेमाल होनेवाली पारंपरिक तकनीकों का इतिहास संबंधी दस्तावेजीकरण करके उसका जियोग्राफिकल इंडीकेशन (जीआइ) के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. इसके बाद उसका बौद्धिक संपदा अधिकार कानून के तहत पेटेंट कराया जा रहा है. उदाहरण के लिए तुलाईपांजी चावल का जीआइ कराया गया है. राज्य विज्ञान, तकनीकी एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिक सोनम वांगदी भूटिया ने कहा, हम चाहते हैं कि आनंदचंद्र कॉलेज राज्य सरकार को पेटेंट सूचना केंद्र खोलने का प्रस्ताव दे. प्रस्ताव मिलने पर हम काम शुरू करेंगे. इससे उत्तर बंगाल के किसान अपने आविष्कार और बौद्धिक संपदा के कानूनी पंजीकरण की परिसेवा ले सकेंगे.
कॉलेज के अध्यक्ष अब्दुर रज्जाक ने कहा कि वे लोग बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी सूचना केंद्र खोलने के लिए राज्य सरकार को लिखित प्रस्ताव देंगे. सेमिनार में राज्य सरकार के बौद्धिक संपदा अधिकार सूचना केंद्र की पारमिता साहा, कल्याणी विश्वविद्यालय की विशाखा घोष और कॉलेज के अध्यापक इंद्रजीत घोष भी खास तौर पर उपस्थित थे.
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