पेंशन में प्रति टन 15 रुपये, मेडिक्लेम में 18 हजार

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शीघ्र राष्ट्रीय वेतन समझौते का इंतजार कर रहे साढ़े तीन लाख कोयला श्रमिकों को फिर से हताशा हुयी. इसके लिए जेबीसीसीआइ-10 की कोर कमेटी की दोदिवसीय बैठक बेनतीजा समाप्त हो गयी. अगली बैठक की तिथि भी निर्धारित नहीं हो सकी. आसनसोल : कोयला श्रमिकों के दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के लिए गठित जेबीसीसीआइ-10 की […]

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शीघ्र राष्ट्रीय वेतन समझौते का इंतजार कर रहे साढ़े तीन लाख कोयला श्रमिकों को फिर से हताशा हुयी. इसके लिए जेबीसीसीआइ-10 की कोर कमेटी की दोदिवसीय बैठक बेनतीजा समाप्त हो गयी. अगली बैठक की तिथि भी निर्धारित नहीं हो सकी.
आसनसोल : कोयला श्रमिकों के दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के लिए गठित जेबीसीसीआइ-10 की कोर कमेटी की दोदिवसीय बैठक नयी दिल्ली में बुधवार को बेनतीजा समाप्त हो गयी. यूनियन प्रतिनिधियों ने कम से कम 25 फीसदी वेतन वृद्धि की मांग की. प्रबंधन प्रतिनिधियों ने इसके कंपनियों पर पड़नेवाले प्रभाव के अध्ययन के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर ली. हालांकि कोयला श्रमिकों की सेवानिवृत्ति के बाद मिलनेवाले मेडिक्लेम तथा पेंशन को जारी रखने के मुद्दे पर कंपनी के अंशदान पर सहमति बन गयी. कोर कमेटी की अगली बैठक होली के बाद होगी. इस बैठक में वेतन वृद्धि पर कोई सहमति न बनने के कारण कोयला श्रमिकों में हताशा है.
कोर कमेटी की दोदिवसीय बैठक मंगलवार को कोर कमेटी के अध्यक्ष सह कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) के कार्मिक व औद्योगिक संबंध निदेशक आर मोहनदास की अध्यक्षता में शुरू हुयी थी. इसमें कोर कमेटी सदस्य सह सीआइएल के वित्त निदेशक चंदन कुमार दे, डब्ल्यूसीएल सह इसीएल के सीएमडी आरआर मिश्र, सीसीएल सह बीसीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह, एटक प्रतिनिधि रमेन्द्र कुमार, एचएमएस प्रतिनिधि नत्थूलाल पांडेय, बीएमएस प्रतिनिधि डॉ बीके राय तथा सीटू प्रतिनिधि डीडी रामानंदन शामिल थे. जोबीसीसीआइ-10 की पूर्ण बैठक में कोई सहमति बनने के बाद इस कोर कमेटी का गठन किया गया था, ताकि वेतन समजाैते पर शीघ्र सहमति बने. लेकिन इस कमेटी की भी दो बैठकें हो चुकी हैं तथा किसी में भी कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.
वेतन वृद्धि पर यू टर्न
बुधवार को कोर कमेटी की बैठक विलंब से शुरू हुयी. यूनियन प्रतिनिधियों ने वेतन वृद्धि का मुद्दा उठाया. इस मुद्दे पर प्रबंधन प्रतिनिधियों ने अचानक यू टर्न ले लिया. पिछली बैठक में प्रबंधन प्रतिनिधियों ने एकमुश्त तीन हजार करोड़ रुपये के पैकेज का प्रस्ताव दिया था. जिसे यूनियन प्रतिनिधियों ने एक सिरे से खारिज कर दिया था. यूनियन प्रतिनिधियों ने इस राशि को मुद्दावार स्पष्ट रूप से रखने की मांग की थी. प्रबंधन प्रतिनिधियों ने इसके लिए समय की मांग की थी.
बैठक में विन्दुवार ब्यौरा रखने के बजाय प्रबंधन प्रतिनिधियों ने अधिकारियों के वेतन से संबंधित रिपोर्ट रखते हुए कहा कि प्रबंधन तीन हजार करोड़ का पैकेज भी देने की स्थिति में नहीं है. अब बमुश्किल 22 सौ करोड़ रुपये का एकमुश्त पैकेज ही दिया जा सकता है. यूनियन प्रतिनिधियों ने इस बार भी इसे एक सिरे से खारिज कर दिया. काफी समय तक दोनों पक्षों के बीच चर्चा व मंथन चलता रहा.
आखिरकार यूनियन प्रतिनिधियों ने अपना कार्ड खोलते हुए कहा कि 25 फीसदी न्यूनतम वृद्धि से कम राशि पर वे किसी भी कीमत में समझौते के लिए तैयार नहीं है. जरूरत पड़ने पर वे आंदोलन के रास्ते पर जायेंगे. प्रबंधन प्रतिनिधियों ने कहा कि 25 फीसदी वृद्धि के कारण कोयला कंपनियों पर पड़नेवाले प्रभावों के आकलन के लिए कुछ समय की जरूरत है. इस मुद्दे पर अगली बैठक में चर्चा करनने पर सहमति बनी. इसके बाद बैठक स्थगित हो गयी. अगली बैठक की तिथि का निर्धारण नहीं हो सका. दोनों पक्ष इस पर सहमत थे कि होली के बाद शीघ्र ही बैठक होनी चाहिए. इसके बाद ही पूर्ण जेबीसीसीआइ-10 की बैठक होगी.
पेंशन योजना में 15 रूपये प्रति टन का सेस
सूत्रों के अनुसार मंगलवार को बैठक में गतिरोध बना रहा. बैठक में पेंशन नीति संबंधित सब कमेटी की रिपोर्ट पेश की गयी. सनद रहे कि पहले की बैठकों में स्पष्ट कहा गया था कि मौजूदा परिस्थितियों में अधिक समय तक पूर्व कोयला कर्मियों को पेंशन भुगतान जारी नहीं रखा जा सकता है. जितने कोयला श्रमिक इसमें राशि का योगदान कर रहे हैं, उससे अधिक पूर्व कोयला कर्मियों को भुगतान करना पड़ रहा है.पेंशन जारी रखने के लिए सीआइएल के स्तर से राशि अंशदान का प्रस्ताव सब कमेटी ने किया था. कोर कमेटी की बैठक में उप समिति की अनुशंसा को स्वीकार कर लिया. दोनों प7ों में सहमति बनी कि सीआइएल पेंशन के लिए कोयले के डिस्पैच पर प्रति टन 15 रुपये का सेस लगायेगी तथा यह राशि सीएमपीएफओ में जमा होगी. इसके लिए स्कीम में आवश्यक संशोधन करने पर भी सहमति बनी.
मेडिक्लेम योजना में 18 हजार देगा प्रबंधन
बैठक में पूर्व कोयला कर्मियों की मेडिकल सेवा से संबंधित उप समिति की रिपोर्ट पेश की गयी. उस समिति ने अपनी पिछली बैठक की अनुशंसा पेश की. उस बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों ने पांच गंभीर रोगों के इलाज पर खर्च होनेवाली राशि पर से सीलिंग हटाने की मांग की थी. उनका कहना था कि अधिकारियों की तरह श्रमिकों को भी सुविधा मिले. प्रबंधन प्रतिनिधियों ने इसके लिए श्रमिकों के स्तर से 58 हजार रुपये के अंशदान का प्रस्ताव दिया था. यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा था कि 40 हजार पर सहमति बनी है. शेष 18 हजार रुपये की राशि का भुगतान प्रबंधन करें. इस अनुशंसा को भी इस बैठक में पेश किया गया. दोनों पक्षों ने इस पर चर्चा की तथा प्रबंधन प्रतिनिधियों ने 18 हजार रुपये कंपनी के स्तर से भुगतान करने पर सहमति जता दी.
प्रबंधन का टालू रवैया निंदनीय, होगा आंदोलन
जेबीसीसीआइ-10 सदस्य आरसी सिंह (एटक) तथा एसके पांडेय (एचएमएस) ने कहा कि प्रबंधन का रवैया काफी निंदनीय है. प्रबंधन किसी न किसी बहाने वेतन समझौते को लंबित करना चाहता है. इससे श्रमिकों में आक्रोश बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अगली बैठक में प्रबंधन प्रतिनिधि यदि ठोस निर्णय के साथ नहीं आते हैं तो यूनियन प्रतिनिधि आंदोलन की रणनीति तय करने को विवश होंगे. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर शीर्ष नेताओं से भी बात की जायेगी. उन्होंने कोयला श्रमिकों से लंबी लड़ाई की तैयारी में जुड़ने की अपील की.
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