सात सालों से लटका है कोयला अधिकारियों के पीआरपी का मामला

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सभी कंपनियों में समान राशि भुगतान की मांग रखी एसोसिएशन ने मार्ग निर्देशन के लिए फाइल अटकी पड़ी है प्रधानमंत्री कार्यालय में आसनसोल : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) के 19 हजार अधिकारियों को परफॉरमेंस रिलेटेड पे (पीआरपी) देने का मामला सात सालों में भी नहीं सुलझ सका है. मामला अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय […]

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सभी कंपनियों में समान राशि भुगतान की मांग रखी एसोसिएशन ने
मार्ग निर्देशन के लिए फाइल अटकी पड़ी है प्रधानमंत्री कार्यालय में
आसनसोल : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) के 19 हजार अधिकारियों को परफॉरमेंस रिलेटेड पे (पीआरपी) देने का मामला सात सालों में भी नहीं सुलझ सका है. मामला अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में चला गया है. प्रधानमंत्री श्री मोदी कोयला मंत्री भी है. कोल माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमओएआइ) के शिष्टमंडल ने कोयला राज्यमंत्री का दायित्व देख रहे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर इस मामले में पहल करने का आग्रह किया था. श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शीघ्र ही इस मामले में कोई न कोई निर्णय लेने का आश्वासन दिया है.
एडवांस भुगतान हो गया बंद
काफी दिनों तक मामला लटकते जाने के बाद अधिकारियों ने कोल इंडिया से इसके एवज में एडवांस की मांग की. े वर्ष 2011 में पीआरपी के एवज में एडवांस देना शुरू किया था. इसके तहत अधिकारियों को कुल पीआरपी के 75 फीसदी का भुगतान एडवांस के रूप में किया जाता था. रिटारमेंट के समय राशि वापस कर देना होता था. अधिकारियों को पहले लगा था कि यह माम्ला जल्द सलट जायेगा तथा अधिकारियों को मिली इस राशि का समायोजन कर लिया जायेगा.
लेकिन मामला लटकता गया. रिटायर होने या किसी हादसे में अधिकारी की मौत हो जाने पर उसकी विधवा के भुगतान से इस राशि की वापसी होने लगी. यह काफी अपमान जनक स्थिति हो गयी. अधिकारियों ने इसके शीघ्र निर्णय का दबाब बनाते हुए अग्रिम पर रोक लगाने की मांग की. वर्ष 2012 तक भुगतान करने के बाद इस पर रोक लग गयी.
स्थिति होती गयी जटिल
सीएमओएआइ के समान भुगतान की मांग को लेकर प्रबंधन के सामन जटिलता आ गयी. इससे पीआरपी की मूल अवधारणा का ही विरोध होता. फलस्वरूप इस मामले को सरकार के पास भेज दिया गया. विभिन्न सचिवों के ग्रुप की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई तथा उसने अपनी अनुशंसा सरकार को दी. लेकिन उस पर निर्णय नहीं हो सका. इसके बाद यह मामला कोयला मंत्रलय से होते हुए इस समय प्रधानमंत्री कार्यालय के पास चला गया है.
क्या है मामला
वर्ष 2007 में कोल इंडिया के अधिकारियों के लिए वेतन समझौता हुआ था. इसमें तय किया गया था कि कोल इंडिया के अधिकारियों को बोनस के स्थान पर पीआरपी का भुगतान किया जायेगा. पीआरपी के भुगतान के लिए जब फॉरमेट बनाया गया तो तय किया गया कि कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक कंपनियों में पदस्थापित अधिकारियों को अलग-अलग कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग भुगतान होगा. इसका कोल इंडिया की कई कंपनियों के अधिकारियों ने विरोध किया. अधिकारियों के संगठन सीएमओएआइ का कहना था कि उनकी नियुक्ति कोल इंडिया के स्तर से होती है. इस कारण कंपनी के स्तर पर पीआरपी का भुगतान ठीक नहीं है. कई कोयला कंपनियां उस समय बीआइएफआर के अधीन थी और लगातार धाटे में चल रही थी. कई कंपनियों का लाभ काफी कम था.
जबकि कुछ कंपनियां अत्यधिक लाभ अजिर्त कर रही थी. बीआइएफआर के अधीन रही तथा घाटे में चल रही कंपनियों के अधिकारियों को इस आधार पर काफी हानि होती. इसके कारण सभी अधिकारी लाभ अजिर्त करनेवाली कंपनियों में कार्य करने को प्राथमिकता देते. साथ ही कोयला अधिकारियों के बीट टकराव की स्थिति बनती. इस कारण एसोसिएशन ने सभी अधिकारियों के लिए समान भुगतान की मांग रखी.
क्या कहना है एसोसिएशन का
सीएमओएआइ के अध्यक्ष वीपी सिंह ने कहा कि पीआरपी भुगतान का पूरा मामला अब प्रधानमंत्री श्री मोदी के पास चला गया है. एसोसिएशन इस समय भी पुराने स्टैंड पर कायम है. कोल इंडिया स्तर पर समान पीआरपी की मांग कर रहे हैं. वर्ष 2007 में कोल इंडिया के अधिकारियों का वेतन समझौता हुआ था. इसमें तय किया गया था कि कोयला अधिकारियों को बोनस के स्थान पर पीआरपी दिया जायेगा.
अब तक अधिकारियों को पीआरपी नहीं दिया गया है. संगठन का एक शिष्टमंडल हाल ही में कोयला राज्यमंत्री पीयूष गोयल से इस मामले में मुलाकात की थी. श्री गोयल ने उन्हें बताया कि दो बार इस मामले में प्रधानमंत्री श्री मोदी से उनकी बात हो चुकी है.
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