कैंसर को हराने वाले 50 लोग आये एक मंच पर, दिखी जिंदादिली
Updated at : 03 Jun 2019 2:23 AM (IST)
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दुर्गापुर : ये खुशी है कैंसर को मात देने की. उत्साह नयी जिंदगी जीत लेने का. ऐसी ही ऊर्जा रविवार को कैंसर से रिकवर हुए या उससे जंग लड़ने वाले करीब 50 लोगों में दिखी. सभी एक ही मंच पर आये तो नजारा कुछ और ही हो गया. यहां कैंसर जैसी लाइलाज मानी जाने वाली […]
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दुर्गापुर : ये खुशी है कैंसर को मात देने की. उत्साह नयी जिंदगी जीत लेने का. ऐसी ही ऊर्जा रविवार को कैंसर से रिकवर हुए या उससे जंग लड़ने वाले करीब 50 लोगों में दिखी. सभी एक ही मंच पर आये तो नजारा कुछ और ही हो गया. यहां कैंसर जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी से जीतने वाले 20 साल के युवा से लेकर 70 वर्ष के बुजुर्ग भी थे.
मौका था नेशनल कैंसर सर्वाइवर्स डे का. शहर के सृजनी प्रेक्षागृह मे दुर्गापुर कैंसर फाउंडेशन के आयोजित इस कार्यक्रम में दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके से कैंसर के मरीज और उसके परिजनों ने हिस्सा लिया. इस मौके पर संस्था के सचिव डॉ प्रेमनाथ दत्ता, डॉ. सुजय राय, डॉ सौरभ भावा उपस्थित थे.
इस अवसर पर डॉ. प्रेमनाथ ने कहा कि कैंसर बेशक जानलेवा बीमारी है पर ऐसा भी नहीं कि इससे लड़ा नहीं जा सकता. समय पर पता चल जाये तो इस गंभीर बीमारी का इलाज भी संभव है. नहीं तो ऐसी-ऐसी दवाएं हैं, जो जिंदगी को बचा सकती हैं. बाकी आत्मबल और हौसले से कैंसर को मात देने वाले भी कम नहीं.
शहर में ही एक नहीं कई नजीर हैं. कैंसर उतना खतरनाक नहीं जितना कि उसे समझा जाता है. कैंसर से डरने की जरूरत नहीं. विशेषज्ञों का कहना है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों का फर्स्ट स्टेज में इलाज हो सकता है. सेकंड स्टेज में यह अनुपात करीब 70 प्रतिशत है. तीसरे चरण में 40 और चौथे चरण में 10 प्रतिशत से भी कम रह जाता है. फिर भी कैंसर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है. बस थोड़ी हिम्मत और हौसले की जरूरत होती है.
उपचाराधीन मरीजों ने साझा किए अपने अनुभव
इस मौके पर उपचाराधीन मरीजों ने अपने अनुभव साझा किये. मौके पर उपस्थित पत्रकारिता के पेशे से जुड़े कैंसर मरीज आशीष आकुड़े ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बीते तीन साल पहले कैंसर ने उन्हें दबोच लिया था. शुरुआत में काफी डर लगा लेकिन इस संस्था के साथ जुड़कर अब काफी बढ़िया लग रहा है. मुंबई में इलाज हो रहा है लेकिन कीमो डॉ. प्रेमनाथ से ले रहे हैं.
डॉ. प्रेमनाथ मरीजों के इलाज के साथ उनका आत्मबल बढ़ाने में काफी सहायता करते हैं. इस दौरान नृत्य, संगीत और नाटक के माध्यम से लोगों में आत्मबल का संचार किया गया. इस वर्ष 32वां वार्षिक राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर्स डे मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य कैंसर से बचे लोगों के लिए जीवन को आसान बनाना और उनके जीवन का मूल्यांकन करना है.
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