रुटीन रिपोर्ट भेजनी होगी रोजाना बोर्ड को, 15 हजार स्कूलों को पश्चिम बंग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की नोटिस
Author Prabhat khabar digital desk
Updated:
विज्ञापन

आसनसोल : पश्चिम बंग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी अनुदान प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के प्रमुख को इस बात का खुलासा करने के लिए कहा है कि उन्होंने 2019 के एकेडमिक सत्र के लिए प्रतिदिन का रुटीन बोर्ड को अब तक क्यों नहीं भेजा? राज्य के सभी स्कूलों को इससे पहले नोटिस भेजा गया था कि […]
विज्ञापन
आसनसोल : पश्चिम बंग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी अनुदान प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के प्रमुख को इस बात का खुलासा करने के लिए कहा है कि उन्होंने 2019 के एकेडमिक सत्र के लिए प्रतिदिन का रुटीन बोर्ड को अब तक क्यों नहीं भेजा? राज्य के सभी स्कूलों को इससे पहले नोटिस भेजा गया था कि वे प्रतिदिन का रूटीन बोर्ड में भेजें.
इस नियम को अभी तक स्कूल गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इसी को ध्यान में रख कर बोर्ड ने फिर से इसका स्पष्टीकरण स्कूलों से मांगा है कि वे प्रतिदिन का रूटीन जमा करवायें.
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के इस फरमान से कई हेडमास्टर नाराज हैं. उनका कहना है कि यह स्कूलों का इंटरनल मामला है. कौन स्कूल में किस शिक्षक या शिक्षिका ने कितनी क्लास लिये या कितने घंटे क्लास चली, यह स्कूल का प्रबंधन या हेडमास्टर व्यवस्थित करेगा, इसको लेकर बोर्ड ने निर्देश जारी किये हैं, यह सीधे तौर पर शिक्षकों पर दबाव डालने की प्रक्रिया है.
कुछ का कहना है कि कुछ शिक्षक संगठन अपनी वित्तीय मांगें सरकार के सामने रखते हैं, सरकार उनको पूरा करने में सक्षम नहीं है. अब इन मांगों को दरकिनार करके स्कूल व शिक्षकों पर दबाव डाला जा रहा है.
गौरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 15,000 माध्यमिक स्कूलों को एक निर्देश जारी कर यह कहा है कि वे प्रतिदिन एक रूटीन तैयार करें. सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों को यह करना अनिवार्य है, इससे स्कूलों की पढ़ाई तथा गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी. बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि स्कूल के प्रधान को 2019 के सत्र शुरू होने से पहले ही यह रूटीन भेजना था, लेकिन अभी तक सभी स्कूलों ने नहीं भेजा है.
मात्र 35 प्रतिशत स्कूलों ने ही प्रतिदिन का रूटीन भेजा है. बोर्ड यह जानना चाहता है कि स्कूलों ने पाठयक्रम समय पर पूरा करने की तैयारी के लिए क्या योजना बनायी है? जनवरी से लेकर दिसंबर तक कैसे सिलेबस पूरा होगा व परीक्षाएं होंगी, इसकी योजना पहले से स्कूलों को ठोस तरीके से बनानी होगी. इसी लक्ष्य को ध्यान में रख कर प्रतिदिन का रुटीन तैयार करने के लिए निर्देश दिया गया है.
प्रत्येक सप्ताह में शिक्षक पढ़ाने व सिखाने में कितना समय दे रहे हैं? स्कूल में एक्सट्रा करीक्युलर गतिविधियों के लिए कितनी कक्षाएं दी गयी हैं? पीरियड की अवधि क्या है? महत्वपूर्ण विषयों के लिए कितना समय दिया गया है? इन सभी की जानकारी शिक्षा बोर्ड में देनी होगी. बोर्ड के अधिकारी का कहना है कि नया सत्र शुरु हुए एक महीना बीत गया है लेकिन अभी तक पूरा रुटीन भेजने के लिए स्कूल सक्रिय नहीं हुए हैं. कई स्कूलों ने बोर्ड के इस निर्देश की ओर ध्यान ही नहीं दिया है.
बोर्ड स्कूल की प्रतिदिन की गतिविधियों पर नियंत्रण रखना चाहता है, ताकि स्कूलों का ओवरऑल एकेडमिक स्तर सुधारा जा सके. इसके लिए बोर्ड की ओर से एक मॉडल रुटीन भी स्कूलों को भेजा गया है. इसी के आधार पर 15 फरवरी तक रूटीन भेजना होगा अथवा इसका स्पष्टीकरण करना होगा.
इस नोटिस में कहा गया है कि इस निर्धारित तिथि तक नहीं भेजने पर स्कूलों को इसका जुर्माना देना पड़ेगा. यह चौंकानेवाली बात है कि कई स्कूल इस निर्देश को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इसका उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया जायेगा.सर्विस नियम के अनुसार बोर्ड द्वारा यह अधिसूचना स्कूलों के जिला निरीक्षकों को भी जारी की गयी है.
इस मामले में निरीक्षक भी स्कूलों का निरीक्षण कर सकते हैं. स्कूल प्रमुखों को समय सीमा के अंदर प्रतिदिन के रूटीन की रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है. कुछ हेडमास्टरों का कहना है कि इसमें विलंब इसलिए हो रहा है, क्योंकि बोर्ड के मॉडल रुटीन में अनिवार्य विषयों को जोड़ा गया है. कक्षा पांच से कक्षा 10 तक कम्प्यूटर शिक्षा भी है लेकिन इसको जोड़ा नहीं गया है. इसके लिए सही शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










