शिल्पांचल में बंगाली समुदाय ने श्रद्धा के साथ की लक्खी पूजा, मांगा आशीष

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Oct 2018 2:45 AM

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दुर्गापुर : शिल्पांचल समेत आस-पास के क्षेत्रों में बुधवार को शरद पूर्णिमा पर बंगाली समुदाय की ओर से धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा हर्षोल्लास के साथ की गयी. बंगला परिवार में देवी की पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया. बंगाली समुदाय की ओर से लक्ष्मी पूजा पर घर की सफाई कर सजाया […]

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दुर्गापुर : शिल्पांचल समेत आस-पास के क्षेत्रों में बुधवार को शरद पूर्णिमा पर बंगाली समुदाय की ओर से धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा हर्षोल्लास के साथ की गयी. बंगला परिवार में देवी की पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया. बंगाली समुदाय की ओर से लक्ष्मी पूजा पर घर की सफाई कर सजाया गया और शाम में दीपक जलाये गये और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की गई.
पूजा के मौके पर घर-घर में मंगल ध्वनि से वातावरण भक्तिपूर्ण बना रहा. लोगों ने अपने-अपने घरों में मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की. बंगभाषी लोगों ने लक्खी पर्व के रूप में यह त्योहार मनाया. पूजा को लेकर कई स्थानों पर पंडाल का भी निर्माण किया गया है. वहीं, शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर दुर्गा पूजा पंडालों में भी मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की गई.
पूजन के बाद मां की आरती उतारी गई. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया. शहरी क्षेत्रों के अलावे यह पूजा ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी धूमधाम से की जाती है. पूजा को लेकर कई जगहों पर आकर्षक विद्युत सज्जा की गई थी. लोगों में काफी उत्साह था. लक्ष्मीपूजा विजयादशमी के बाद शरद पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है.
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी. इसलिए धन प्राप्ति के लिए आज के दिन मां लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा चली आ रही है. आज के दिन को लक्ष्मी जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. शाम होते ही घर-द्वार दीप और विद्युत बल्वों से जगमगा उठा. रात में मां लक्ष्मी की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना की गई.
कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए रखती हैं उपवास
मान्यता है कि धन-धान्य, सुख-समृद्धि के लिये आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मां लक्खी की पूजा की जाती है. इस पूजा को कोजागरी लक्खी पूजा भी कहते हैं. लक्खी पूजा के दिन विवाहिता परिवार की सलामती के लिये उपवास रखती हैं. कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना करती हैं. शरद पूर्णिमा को शुभ और साकारात्मक माना गया है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है जो धन, प्रेम और सेहत तीनों के लिये शुभ माना जाता है.
पानागढ़ में लक्खी पूजा को लेकर उमंग
पानागढ़. पश्चिम बर्दवान जिले के पानागढ़ बाजार में लक्खी पूजा को को लेकर पानागढ़ बाजार के विभिन्न इलाकों में उत्साह का माहौल है. कई जगह विशाल पंडाल बनाये गये हैं एवं बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. लक्खी पूजा को लेकर बंगाली समुदाय के घर-घर में पूजा को लेकर विशेष आयोजन किया जाता है. पानागढ़ बाजार में लक्खी पूजा को लेकर व्यवसायियों में खासकर फल व्यवसायियों में खुशी का माहौल है.
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