न्यू पेंशन निर्धारण में विसंगति से हुआ घाटा

Updated at : 04 Jul 2018 3:48 AM (IST)
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न्यू पेंशन निर्धारण में विसंगति से हुआ घाटा

सांकतोड़िया : कोयला अधिकारियों की न्यू पेंशन स्कीम की स्वीकृति के बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, पर राशि गणना में विसंगति होने की वजह से पेंशनधारकों को नुकसान उठछाना पड़ रहा है. शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है. इससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है. ईसीएल समेत अन्य […]

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सांकतोड़िया : कोयला अधिकारियों की न्यू पेंशन स्कीम की स्वीकृति के बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, पर राशि गणना में विसंगति होने की वजह से पेंशनधारकों को नुकसान उठछाना पड़ रहा है. शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है. इससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
ईसीएल समेत अन्य कोयला कंपनियों में 20 हजार से अधिक अधिकारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं. रिटायर्ड अधिकारियों की संख्या भी बीस हजार से अधिक ही है. इन अधिकारियों को पुराने दर से पेंशन मिल रहा है. इसमें संशोधन कर राशि बढ़ाये जाने की मांग लगातार उठने पर कमेटी गठित कर पेंशन पर समीक्षा की गयी थी.
रिपोर्ट आने के बाद न्यू पेंशन स्कीम पर पहले कोल इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने मंजूरी दी, तदुपरांत कोयला मंत्रालय ने भी प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी. इससे सेवानिवृत्त एक अधिकारी को आठ से दस हजार रुपये तक लाभ मिलना था. बेसिक के आधार पर राशि की गणना की जा रही है, यानि किसी अधिकारी का वेतन एक लाख है, तो उसे लगभग दस हजार महीने का फायदा मिलेगा.
जानकारों का कहना है कि राशि गणना में काफी विसंगति हो रही है. इससे पेंशनधारकों को फायदा की जगह नुकसान होने लगा है. कुछ अधिकारियों की राशि निर्धारण में ही विसंगति है. इसकी शिकायत करने के बाद प्रबंधन ने टोल फ्री नंबर के साथ ही अधिकारी नियुक्त कर दिये हैं. पर पेंशनधारियों का आरोप है कि शिकायत पर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है और न ही समस्या का निदान किया जाता है.
एआईएसीई के संयोजक पीके सिंह राठौर ने कहा कि एक जनवरी, 2017 को कोयला अधिकारियों के वेतन पुनरीक्षण के दौरान न्यू पेंशन स्कीम का प्रावधान रखा गया था, पर इसका लाभ नहीं मिल सका. इस मद में राशि की कटौती की गई और अब तक कई करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं. नियमतः एक जनवरी, 2007 से बेसिक और डीए की 9.84 फीसदी राशि स्कीम के तहत मिलनी है.
जनवरी 2007 के बाद सेवानिवृत्त अफसरों को एकमुश्त भुगतान किया जायेगा, जबकि कोयला कंपनी में कार्यरत अफसरों को नकद भुगतान की जगह फंड मैनेजर के माध्यम से निवेश का ऑप्शन दिया जायेगा. अधिकारियों को काफी कम पेंशन मिल रहा है.
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