प्रशासन पर ममता की पकड़ हुई मजबूत, जनाधार भी बढ़ा

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– अजय विद्यार्थी – कोलकाता : दो साल पूर्व 34 वर्षो की वाम मोरचा सरकार को पराजित कर ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता में आयी तृणमूल कांग्रेस की ‘मां, माटी, मानुष’ की सरकार के लिए वर्ष 2013 निर्णय और घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने का वर्ष रहा. मुख्यमंत्री के रूप में सुश्री बनर्जी ने जहां […]

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– अजय विद्यार्थी –

कोलकाता : दो साल पूर्व 34 वर्षो की वाम मोरचा सरकार को पराजित कर ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता में आयी तृणमूल कांग्रेस की ‘मां, माटी, मानुष’ की सरकार के लिए वर्ष 2013 निर्णय और घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने का वर्ष रहा.

मुख्यमंत्री के रूप में सुश्री बनर्जी ने जहां प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत की, वहीं पंचायत से लेकर नगरपालिका चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का जनाधार भी बढ़ा. पंचायत चुनाव, नगरपालिका चुनाव व लोकसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने वाम मोरचा की धूल चटाते हुए अपनी लोकप्रियता को बरकरार रखा.

राज्य चुनाव आयोग से जंग

वर्ष की शुरुआत ही पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार व राज्य चुनाव आयुक्त मीरा पांडेय के बीच विवाद से हुई. मतदान की तिथि, केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती व चरणों में चुनाव कराने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच गया. अंतत: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद राज्य में पांच चरणों में पंचायत चुनाव हुए.

17 जिला परिषदों में से 13 में सीधे रूप से तृणमूल कांग्रेस को बहुमत मिला, जबकि मात्र एक-एक जिला परिषद में वाम मोरचा व कांग्रेस बोर्ड बनाने में सफल रही. पांच नगरपालिका चुनाव में भी तृणमूल ने हावड़ा, मेदिनीपुर, कृष्णनगर व झाड़ग्राम नगरपालिकाओं पर कब्जा जमाया. पहली बार कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी का गढ़ माने जाने वाले मुर्शिदाबाद में भी तृणमूल कांग्रेस दो सीटों पर कब्जा करने में सफल रही.

सारधा कांड का झटका

कभी तृणमूल कांग्रेस के करीबी माने जाने वाले सुदीप्त सेन के सारधा समूह के के चिटफंड घोटाले का उजागार हुआ. इस खुलासे के बाद सुदीप्त सेन व उसकी सहयोगी देवजानी को गिरफ्तार किया गया. राज्य सरकार ने आनन-फानन में चिटफंड नियंत्रण विधेयक विधानसभा में पेश किया. साल के आरंभ में विधानसभा में पहला विधेयक पेश किया गया. बाद में इस विधेयक को राष्ट्रपति ने वापस भेज दिया. वर्ष के अंत में फिर इस विधेयक को विधानसभा में पारित किया गया.

चिटफंड घोटाले के सामने आते ही राज्य सरकार ने पूर्व न्यायाधीश श्यामल सेन के नेतृत्व में आयोग का गठन किया 500 करोड़ की राशि निवेशकों को लौटाने की घोषणा की. वर्ष के अंत तक 10 हजार रुपये तक निवेश करनेवालों की कुछ राशि लौटायी भी गयी, लेकिन चेक वापस लौटने के बाद नाम लिखाये गये लोगों के हाथ मायूसी ही लगी. वहीं, साल के अंत में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष ने सारधा कांड में तृणमूल नेताओं के शामिल होने के गंभीर आरोप लगाये.

इसकी कीमत उन्हें पार्टी से निलंबित होने और बाद में गिरफ्तार होकर चुकानी पड़ रही है. वह अब भी जेल हिरासत में हैं.

नवान्न बना नया सचिवालय

वर्षो से राज्य सचिवालय का मुख्यालय रहा राइटर्स बिल्डिंग इस वर्ष सचिवालय का दरजा खो दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राइटर्स बिल्डिंग के पुनरुद्धार की घोषणा की. साथ ही राइटर्स बिल्डिंग से राज्य सचिवालय का स्थानांतरण एचआरबीसी की गंगा के किनारे स्थित नवान्न भवन में कर दिया. कुछ मंत्रियों के कार्यालयों को छोड़कर ज्यादातर मंत्री व मुख्यमंत्री नवान्न में ही बैठने लगें.

जिलों के दौरे पर जोर

इस वर्ष मुख्यमंत्री ने जिलों के दौरे पर ज्यादा जोर दिया. मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ लगातार राज्य का दौरा करती रहीं. मुख्यमंत्री का दावा रहा कि घोषणाओं में 100 फीसदी काम उनकी सरकार ने पूरा कर लिया है. उन्होंने जिलों में बैठकें की और योजनाओं की घोषणा व उनके क्रियान्वयन की समीक्षा भी.

कई योजना की घोषणा

सुश्री बनर्जी ने छात्राओं को प्रोत्साहन देने के लिए कन्याश्री योजना, बेरोजगार युवकों को लुभाने के लिए बेरोजगारी भत्ता तथा लोगों को सुविधा देने के लिए सेवा योजना सहित कई योजनाओं की घोषणा की. अल्पसंख्यक व आदिवासी समुदाय के लोगों को लुभाने के लिए भी योजनाओं की घोषणा की गयी. खेल क्लबों को अनुदान दिया गया व छात्राओं के बीच साइकिल का वितरण किया गया. अस्पतालों में फेयर प्राइस शॉप खोले गये. उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिले के थानों को कोलकाता थाना क्षेत्र में शामिल किया गया. राज्य के कई इलाकों में कमीशनरेट का भी गठन किया गया.

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