रेलवे के सामने बड़ी चुनौती

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– जीतेंद्र पांडेय – क्या सिक्किम देश के रेलमार्ग से जुड़ पायेगा सिलीगुड़ी : सिक्किम को रेल लाइन से जोड़ने के लिए वर्ष 2009 में सेवक से रंगपो नयी बीजी रेल लाइन का शिलान्यास किया गया. शिलान्यास भारत के उपराष्ट्रपति मो हमीद अंसारी व तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने किया था. उस समय सिक्किम […]

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– जीतेंद्र पांडेय –

क्या सिक्किम देश के रेलमार्ग से जुड़ पायेगा

सिलीगुड़ी : सिक्किम को रेल लाइन से जोड़ने के लिए वर्ष 2009 में सेवक से रंगपो नयी बीजी रेल लाइन का शिलान्यास किया गया. शिलान्यास भारत के उपराष्ट्रपति मो हमीद अंसारी तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने किया था.

उस समय सिक्किम के लोगों को और पर्यटकों को बहुत ही खुशी हुई थी कि सिक्किम की हसीन वादियों में ट्रेनें दौड़ेंगी. पर, अब यह रेल परियोजना हकीकत नहीं सपना होती जा रही है. इस परियोजना पर चार साल बाद भी काम नहीं शुरू हो पाया है. इस परियोजना को लेकर दिल्ली से कई टीमें मुआयना करने आयीं. मुआयना भी किया. पर कोई अनुमति नहीं मिली.

जिसकी मार रेलवे को ङोलनी पड़ रही है. खबर ऐसी भी है कि पहाड़ के गांव वाले भी विरोध करने लगे हैं. क्योंकि पहाड़ में सुरंग बना कर ट्रेन की लाइन बिछायी जायेगी. इस पर गांववालों का कहना है कि सुरंग पर गांव रहेगा, जिससे कभी भी खतरा हो सकता है. यह एक नया विरोध शुरू हो गया है.

इस विरोध से रेलकर्मियों को निबटना बहुत ही मुश्किल हो रहा है. सेवकरंगपो रेल परियोजना का काम रेल मंत्रलय के अधीन लोक उपक्रम भारतीय रेल निर्माण कंपनी लिमिटेड इरकॉन को दिया गया है.

इस परियोजना के संबंध में परियोजना का कार्य देख रहे एनजेपी के डिप्टी चीफ इंजीनियर जेपी सिंह ने कहा कि हमलोग 2009 से नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की अनुमति के लिए बैठे हैं. यही नहीं राज्य का वन विभाग भी लापरवाही बरत रहा है. अनुमति नहीं मिलने के कारण उक्त परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है.

उन्होंने कहा कि पहाड़ पर गोरखालैंड के लिए हो रहे आंदोलन का भी असर रेल परियोजना पर पड़ रहा है.

साथ ही उन्होंने कहा कि पहाड़ के गांव वालों का कहना है कि उनके गांव के नीचे से सुरंग कर रेल लाइन नहीं बिछायी जायेगी. ऐसी ही बहुत सी समस्या हैं. जो रेल परियोजना पर ग्रहण लगाये हुआ हैं. उन्होंने कहा कि यदि अभी तक उक्त विभागों अनुमति मिल गयी होती तो आज तक बहुत काम पूरा हो गया होता. पर क्या कहा जाये. हमलोगों के हाथ में तो कुछ नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि कोलकाता दिल्ली जैसे महानगर के नीचे से मेट्रो चल सकती है तो कुछ नहीं होता हैं. पहाड़ के गांव के नीचे से पहाड़ में यदि सुरंग बनाया जाये तो क्या प्रभाव पड़ सकता हैं. इससे कुछ नहीं होगा. पर लोगों को तो किसी तरह उक्त परियोजना पर अड़ंगा डालना हैं.

मालूम हो कि सेवकरंगपो तक नई बीजी रेल लाइन का निर्माण वर्ष 2008-09 के बजट में 1339.48 करोड़ रुपये की अनुमति लागत पर स्वीकृति मिली थी. रेलवे का मुख्य उदेश्य सिक्किम को अन्य राज्यों की भांति भारत की राजधानी दिल्ली से जोड़ने के साथ ही आम लोगों को रेल की सुविधाएं मुहैया कराना हैं. सिक्किम एनएफ रेलवे के सिलीगुड़ी न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशनों से जुड़ा हैं. जो सिक्किम की राजधानी गैंगटोक से 120 कि मी की दूरी पर स्थित हैं.

नजदीक एयरपार्ट केन्द्र बागडोगरा है वह भी गंगटोक से 125 किमी की दूरी पर स्थित हैं. सिक्किम को राष्ट्रीय राजमार्ग 31 द्वारा सेवक से गंगटोक तक जोड़ा जाता हैं. सिक्किम को एक ही सड़क मार्ग उपलब्ध हैं. उक्त सड़क भी बरसात के दिनों में भूस्खलन का शिकार हो जाती हैं.

जिस वजह से सिक्किम देश की मुख्यधारा से टूट जाता हैं. रेल मार्ग के निर्माण से यहां के परिवहन व्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा. इतने दिन बित जाने के बाद तो लोग उक्त रेल परियोजना को भूल ही गये हैं. लोगों को लग रहा है कि सभी ने कोई सपना देखा था जो साकार होता नहीं दिख रहा हैं.

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