सरकार ने कम की टाटा ग्रुप से दूरियां, टाटा ग्रुप को दी दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट

कोलकाता. सिंगुर में टाटा के नैनो कारखाने को लेकर टाटा ग्रुप व तृणमूल कांग्रेस के बीच खड़ी हुई दीवार अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है, क्योंकि बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पुराने विवाद को भुलाते हुए टाटा ग्रुप की दो कंपनियों को राज्य सरकार के दो महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा करने का दायित्व […]
कोलकाता. सिंगुर में टाटा के नैनो कारखाने को लेकर टाटा ग्रुप व तृणमूल कांग्रेस के बीच खड़ी हुई दीवार अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है, क्योंकि बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पुराने विवाद को भुलाते हुए टाटा ग्रुप की दो कंपनियों को राज्य सरकार के दो महत्वपूर्ण योजनाओं को पूरा करने का दायित्व सौंपा है.
राज्य सरकार ने अपने सभी विभागों में कोषागार प्रबंधन व नकद ट्रांसफर सिस्टम को ऑनलाइन करने का फैसला किया है और इस ऑनलाइन सेवा को शुरू करने के लिए राज्य सरकार ने टाटा ग्रुप की दो कंपनियां टाटा कंसलटेंसी सर्विसेस (टीसीएस) व सीएमसी लिमिटेड को यह जिम्मा सौंपा है.
2008 में तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की वजह से टाटा को अपना सिंगूर में नैनो प्रोजेक्ट में काम बंद करना पड़ा था. तृणमूल कांग्रेस ने किसानों से जबरन जमीन अधिग्रहण का मुद्दा उठाते हुए आंदोलन किया था. लेकिन 2011 के बाद से यहां राजनीतिक परिवर्तन व साथ ही टाटा ग्रुप के चेयरमैन में बदलाव का असर दिखने लगा है और राज्य सरकार ने टाटा ग्रुप की दो कंपनियों को यह जिम्मा सौंपा है.
राज्य के वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि निविदा के माध्यम से इन दोनों कंपनियों को दो प्रोजेक्ट का काम सौंपा गया है. इसमें टीसीएस राज्य सरकार के विभिन्न योजनाओं के तहत पंचायत स्तर तक फंड का सुचारु रूप से वितरण के लिए बॉयोमेट्रिक सॉलुशंस का विकास करेगी. इस योजना पर करीब 120 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. बॉयोमेट्रिक एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से भौतिक डाटा जैसे फिंगर प्रिंट व अन्य पद्धतियों का विकास किया जाता है. यह बॉयोमेट्रिक सॉलुशन सिस्टम शुरू होने से पंचायत स्तर पर फंड जल्द से पहुंच पायेगा. क्योंकि राज्य की करीब 70 प्रतिशत जनता गांव में रहती है, इसलिए यहां के लोगों का विकास करना सरकार की प्राथमिकता है.
वहीं, टीसीएस की अनुषंगी कंपनी सीएमसी लिमिटेड को इंटीग्रेटेड फाइनेंशिल मैनजमेंट सिस्टम (आइएफएमएस) लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 47 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. यह सिस्टम शुरू होने के बाद राज्य सरकार सभी विभागों के नकद वितरण प्रणाली पर नजर रख पायेगी. इससे राज्य सरकार की आमदनी भी बढ़ेगी. कई विभागों में सिर्फ ई-गवर्नेस को शुरू करके राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षो में अपनी आमदनी को 21 हजार करोड़ रुपये से 39 हजार करोड़ रुपये हो गया है, जिसे राज्य सरकार 50 हजार करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा है.
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