यात्री बन ट्रेनों में छिनताई करनेवाले रैकेट का भंडाफोड़, महिला समेत दो गिरफ्तार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Aug 2017 4:33 AM
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कोलकाता: यात्रियों को चकमा देकर उनकी चैन, पर्स और लगेज उड़ा लेनेवाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हावड़ा क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच की टीम ने किया है. शनिवार को हावड़ा मंडल की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच की टीम ने कार्रवाई करते हुए रैकेट के दो सदस्यों को हावड़ा स्टेशन के ओल्ड कांप्लेक्स के छह नंबर प्लेटफॉर्म से गिरफ्तार […]
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कोलकाता: यात्रियों को चकमा देकर उनकी चैन, पर्स और लगेज उड़ा लेनेवाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हावड़ा क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच की टीम ने किया है. शनिवार को हावड़ा मंडल की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच की टीम ने कार्रवाई करते हुए रैकेट के दो सदस्यों को हावड़ा स्टेशन के ओल्ड कांप्लेक्स के छह नंबर प्लेटफॉर्म से गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी है, जिसका नाम नौरीन परवीन सरदार (19), जबकि दूसरे का नाम पार्थ कायक (24) है. दोनों आरोपी दक्षिण 24 परगना के कैनिंग थाना अंतर्गत इलाके के रहनेवाले हैं.
सीआइबी की टीम ने महिला की तलाशी लेकर उसके पास से तीन सोने की चेन, 4500 रुपये और पैनकार्ड के साथ अन्य कागजात जब्त किये हैं. अभियान का नेतृत्व कर रहे सीआइबी इंस्पेक्टर मीर औरंगजेब द्वारा सख्ती से पूछताछ किये जाने पर नौरीन परवीन ने बताया कि शनिवार को टीम भीड़ भरी मेदिनीपुर लोकल में सावर हुई थी. इस ट्रेन में यात्रियों को चकमा देकर तीन चेन उड़ा लिया थे. दोनों के खिलाफ जीआरपी हावड़ा में मामला दर्ज किया गया है.
रविवार को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने महिला को बेल देते हुए पार्थ कायक को तीन दिनों की पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है.
घटना की जानकारी देते हुए वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त अमरेश कुमार ने बताया कि कुछ दिनों से ट्रेनों में छिनताई की घटनाओं की शिकायत मिल रही थी. इसके आधार पर मैंने छिनताइबाजों की धर-पकड़ के लिए स्पेशल ड्राइव चला रखा था. सीआइबी भी अलर्ट थी, जिसके बाद हमने एक बड़े गिरोह को पकड़ा है. जीआरपी के साथ मिलकर गिरोह के अन्य लोगों की छापेमारी हो रही है. उम्मीद है कुछ दिनों में गिरोह के अन्य सदस्य भी सलाखों को पीछे होंगे.
गिरोह के लोग ऐसे देते थे अपने कारनामे को अंजाम
गिरोह की सदस्य नौरीन परवीन सरदार ने बताया कि उसकी टीम को कुल नौ लोग हैं. इसमें महिलाएं भी शामिल हैं. टीम के सभी सदस्यों का काम बंटा होता था.
उसने बताया कि वह अक्सर ऐसी ट्रेनों और प्लेटफॉर्म पर अपनी घटनाओं को अंजाम देते थे, जहां भीड़ होती थी. घटना को अंजाम देने से पहले मालदार यात्री की तलाशी गिरोह के लोग रेलवे टिकट खिड़की से ही शुरू कर देते थे.
मालदार यात्री की पहचान होते ही उसके ट्रेन में चढ़ने या फिर भीड़वाले स्थान पर जाने का इंतजार किया जाता. यात्री जैसे ही भीड़ भरे प्लेटफॉर्म पर जाता या फिर ट्रेन में सवार होता, गिरोह के लोग यात्री बनकर उसे चारों तरफ से घेर लेते. जबकि उसे में से एक सदस्य मौका मिलते ही यात्री का सामान लेकर फरार हो जाता.
इस गिरोह की खासियत यह होती कि एक सदस्य यात्री का चेन काटता और दूसरा उसे लेकर भीड़ में नौ-दो ग्यारह हो जाता. वहीं, घटनास्थल पर मौजूद गिरोह के अन्य सदस्य शिकार यात्री के साथ हो-हल्ला कर उसकी सहायता करने का बहाना करते. असल में वह शिकार यात्री को चकमा देने और अपने साथी को वहां से फरार होने के लिए ऐसा करने का नाटक करते थे.
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