UP विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर दलित दांव! मायावती के वोट बैंक पर अखिलेश की नजर,बसपा में हलचल

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मायावती एंव अखिलेश यादव

UP Politics: सपा राज्य की करीब 100 विधानसभा सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके जरिए पार्टी का लक्ष्य न सिर्फ भाजपा को चुनौती देना है, बल्कि बसपा प्रमुख मायावती के पारंपरिक दलित वोट बैंक में भी अपनी पैठ मजबूत करना है.

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UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को नया रूप देना शुरू कर दिया है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव अब अपने चर्चित PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का दायरा बढ़ाने की तैयारी में हैं. समाजवादी पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सपा राज्य की करीब 100 विधानसभा सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके जरिए पार्टी का लक्ष्य न सिर्फ भाजपा को चुनौती देना है, बल्कि बसपा प्रमुख मायावती के पारंपरिक दलित वोट बैंक में भी अपनी पैठ मजबूत करना है.

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आरक्षित ही नहीं, सामान्य सीटों पर भी दलित चेहरों पर दांव

रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी इस बार केवल अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहती. पार्टी सामान्य विधानसभा सीटों पर भी बड़ी संख्या में दलित उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है. इसके पीछे मकसद यह संदेश देना है कि सपा दलित समाज को सिर्फ आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं देखती, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की राजनीति में व्यापक भागीदारी देना चाहती है.

PDA फॉर्मूले को और मजबूत करने की तैयारी

2024 के लोकसभा चुनाव में PDA फॉर्मूले से मिली सफलता ने सपा नेतृत्व का आत्मविश्वास बढ़ाया है. चुनाव में पार्टी ने सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवारों को मौका दिया था. फैजाबाद (अयोध्या) से अवधेश प्रसाद की जीत और मेरठ में सुनीता वर्मा का कड़ा मुकाबला सपा के लिए सकारात्मक संकेत माना गया. अब पार्टी इसी प्रयोग को विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर दोहराने की तैयारी कर रही है.

‘यादव-मुस्लिम पार्टी’ की छवि बदलने की कोशिश

रिपोर्ट के अनुसार, सपा की यह रणनीति सिर्फ चुनावी गणित तक सीमित नहीं है. पार्टी एक व्यापक राजनीतिक संदेश भी देना चाहती है कि वह अब केवल यादव और मुस्लिम मतदाताओं की पार्टी नहीं, बल्कि दलित, पिछड़े और अन्य सामाजिक वर्गों को समान प्रतिनिधित्व देने वाली पार्टी के रूप में खुद को स्थापित करना चाहती है.

मायावती के वोट बैंक पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी की नई रणनीति का सबसे बड़ा असर बहुजन समाज पार्टी पर पड़ सकता है. यदि सपा दलित मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को अपने पक्ष में करने में सफल होती है, तो उत्तर प्रदेश की चुनावी तस्वीर बदल सकती है. हालांकि बसपा की ओर से अभी इस रणनीति पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

अभी नहीं हुई आधिकारिक घोषणा

हालांकि, समाजवादी पार्टी ने अब तक 100 दलित उम्मीदवारों को टिकट देने या संभावित सीटों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार फिलहाल यह जानकारी पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है. अंतिम फैसला उम्मीदवार चयन और पार्टी की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.

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