बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच करने वाले आयोग के अध्यक्ष का निधन, जस्टिस MS लिबरहान 87 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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बाबरी मस्जिद विध्वंस और जस्टिस एम.एस. लिबरहान।

UP News: बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच करने वाले लिबरहान आयोग के अध्यक्ष, जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके निधन से न्यायिक और कानूनी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. उन्होंने 1964 में वकालत शुरू की थी और हाईकोर्ट के जज से लेकर दो राज्यों के मुख्य न्यायाधीश रहे.

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UP News: बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय लिबरहान आयोग के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन से कानूनी जगत में शोक की लहर है.

बाबरी मस्जिद जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस लिबरहान का निधन

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच करने वाले चर्चित लिबरहान आयोग के अध्यक्ष रहे जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद ने उनके निधन की पुष्टि की. उनके निधन से न्यायिक और कानूनी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.

1964 में शुरू किया था वकालत का सफर

जस्टिस लिबरहान ने अपने कानूनी करियर की शुरुआत वर्ष 1964 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से वकालत के जरिए की थी. अगस्त 1970 में वे पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के सदस्य चुने गए और 11 फरवरी 1987 तक इस पद पर रहे. जनवरी 1976 से जून 1983 तक उन्होंने बार काउंसिल के सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं.

हाईकोर्ट के जज से बने दो राज्यों के मुख्य न्यायाधीश

11 फरवरी 1987 को जस्टिस लिबरहान को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया. इसके बाद 7 जुलाई 1997 को उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. कुछ महीनों बाद 28 फरवरी 1998 को उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला.

बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग से मिली राष्ट्रीय पहचान

जस्टिस लिबरहान का नाम देशभर में सबसे अधिक बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग के कारण जाना जाता है. 16 दिसंबर 1992 को केंद्र सरकार ने उन्हें बाबरी मस्जिद ढांचा विध्वंस की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था. आयोग का उद्देश्य 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस की परिस्थितियों, जिम्मेदार व्यक्तियों और घटनाक्रम की विस्तृत जांच करना था. यह आयोग देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जांच आयोगों में शामिल रहा.

कानूनी जगत में शोक की लहर

जस्टिस लिबरहान के निधन पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है. उनके लंबे न्यायिक जीवन और न्यायपालिका में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है.

मुख्य बातें

  • 87 वर्ष की उम्र में जस्टिस एम.एस. लिबरहान का निधन.
  • बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग के एकमात्र अध्यक्ष रहे.
  • 1964 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से वकालत की शुरुआत की.
  • मद्रास और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे.
  • कानूनी और न्यायिक जगत में उनके निधन पर शोक की लहर.

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रवि रंजन कुमार

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By रवि रंजन कुमार

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