4 करोड़ की कोठी पर 22 करोड़ का हाउस टैक्स! सहारनपुर में सपा नेता को मिला नोटिस, 2 करोड़ का पानी का सालाना बिल देख उड़े होश
सपा नेता फरहाद गाड़ा और उनकी कोठी
UP News: सहारनपुर में एक सपा नेता के परिवार को नगर निगम ने 4 करोड़ रुपये की कोठी पर 22 करोड़ रुपये से अधिक का हाउस टैक्स और 12 करोड़ रुपये का पानी का बिल भेजकर चौंका दिया है. इस घटना ने नगर निगम की कर निर्धारण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
UP News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नगर निगम की कर निर्धारण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. वार्ड नंबर-2 के रामनगर स्थित मल्हीपुर रोड पर रहने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) नेता फरहाद गाड़ा के परिवार को नगर निगम की ओर से ऐसा हाउस टैक्स नोटिस मिला, जिसे देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया. परिवार का आरोप है कि करीब 4 करोड़ रुपये कीमत की कोठी पर 22 करोड़ रुपये से अधिक का हाउस टैक्स लगा दिया गया. इतना ही नहीं, नोटिस में यह भी दर्ज है कि परिवार ने एक साल में 2 करोड़ 16 लाख रुपये का सरकारी पानी इस्तेमाल किया, जबकि बकाया जोड़कर करीब 12 करोड़ रुपये का पानी का बिल भी दिखाया गया है.
816 गज की कोठी, लेकिन टैक्स कीमत से कई गुना ज्यादा
फरहाद गाड़ा के अनुसार उनकी कोठी करीब 816 गज में बनी है और इसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये है. उन्होंने बताया कि मकान का निर्माण करीब दो वर्ष पहले हुआ था और परिवार पिछले एक वर्ष से यहां रह रहा है. ऐसे में मकान की कीमत से कई गुना अधिक टैक्स और पानी का बिल आने से पूरा परिवार हैरान है. उनका कहना है कि नोटिस में दर्ज रकम किसी भी सामान्य गणना से मेल नहीं खाती.
'गलती नहीं सुधरी तो कोर्ट जाएंगे'
नोटिस मिलने के बाद फरहाद गाड़ा ने नगर निगम पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर पर उसकी कीमत से कई गुना अधिक टैक्स लगाना प्रशासन की बड़ी चूक है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे.
नगर निगम ने बताया डेटा एंट्री या टाइपिंग मिस्टेक
मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर इसे टाइपिंग या डेटा एंट्री की त्रुटि बताया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कर रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन किया जाएगा. हालांकि, फरहाद गाड़ा और उनका परिवार इस सफाई से संतुष्ट नहीं है. उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की त्रुटि को केवल "टाइपिंग मिस्टेक" कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
GIS सर्वे और कर निर्धारण प्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के GIS सर्वे, कर निर्धारण प्रक्रिया और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि नगर निगम जांच पूरी कर कब तक रिकॉर्ड में सुधार करता है और पीड़ित परिवार को राहत मिलती है.
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