बच्चों में COVID का खतरा कितना? AIIMS की रिपोर्ट ने हाई रिस्क बच्चों पर बढ़ाया फोकस, वैक्सीन को बताया जरूरी
बच्चों के टीकाकरण पर जोर
UP News: AIIMS गोरखपुर के डॉक्टरों के शोध में बच्चों में कोविड संक्रमण के हाई रिस्क फैक्टर्स की पहचान की गई है. मोटापा, डायबिटीज और कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, साथ ही वैक्सीन की सुरक्षा पर भी प्रकाश डाला गया है.
UP News: बच्चों में कोविड संक्रमण का खतरा सामान्य तौर पर कम रहा है, लेकिन कुछ हाई रिस्क बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. AIIMS गोरखपुर से जुड़े डॉक्टरों के शोध में मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, पुरानी फेफड़ों की बीमारी, कमजोर प्रतिरक्षा और समय से पहले जन्मे बच्चों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है. ऐसे बच्चों के टीकाकरण पर जोर दिया गया है. एम्स के डॉक्टरों के शोध में बच्चों में कोविड संक्रमण, बीमारी की गंभीरता, वैक्सीन की सुरक्षा और टीकों की उपलब्धता से जुड़ी स्थिति का अध्ययन किया गया है.
सीरो सर्वे में बच्चों में मिली एंटीबॉडी
शोधकर्ताओं ने भारत के चौथे राष्ट्रीय सीरो सर्वे के आंकड़ों का हवाला दिया है. जून-जुलाई 2021 में हुए इस सर्वे के दौरान 6 से 9 साल की उम्र के 57.2 प्रतिशत और 10 से 17 साल के 61.6 प्रतिशत बच्चों में कोविड के खिलाफ एंटीबॉडी मिली थी. उस समय इन आयु वर्ग के बच्चों के लिए कोविड टीकाकरण शुरू नहीं हुआ था. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे संक्रमण के बाद बच्चों में विकसित हुई प्राकृतिक प्रतिरक्षा का संकेत मिलता है.
बच्चों में गंभीर बीमारी का खतरा रहा कम
अध्ययन के अनुसार, 0-4 वर्ष और 5-17 वर्ष की उम्र के बच्चों में कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने और मौत का जोखिम 18-29 वर्ष के लोगों की तुलना में कम रहा. हालांकि, अलग-अलग वैरिएंट के आने के साथ संक्रमण और बीमारी की गंभीरता का स्वरूप बदला. ओमिक्रॉन के दौरान छोटे बच्चों में संक्रमण के मामले पहले की तुलना में अधिक देखे गए, लेकिन गंभीर बीमारी का खतरा पुराने वैरिएंट की तुलना में कम रहा.
हाई रिस्क बच्चों के टीकाकरण पर जोर
शोधकर्ताओं के मुताबिक कोविड वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह रोकने में सक्षम नहीं है, लेकिन गंभीर बीमारी से बचाव में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है. इसी वजह से हाई रिस्क बच्चों को टीकाकरण की प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है. शोध में टीकों की वैश्विक उपलब्धता में असमानता का भी जिक्र किया गया है. उच्च और मध्यम आय वाले देशों में कम से कम एक खुराक लेने वाली आबादी 74.3 प्रतिशत थी, जबकि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में यह 56.3 प्रतिशत और कम आय वाले देशों में 18.2 प्रतिशत थी.
शोध में ये विशेषज्ञ रहे शामिल
यह अध्ययन जर्नल ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट में प्रकाशित हुआ है. इसमें आरएमआरसी के निदेशक डॉ. हरि शंकर जोशी, एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. आनंद मोहन दीक्षित, डॉ. अनिल रमेश कोपरकर, डॉ. प्रदीप खरया, डॉ. रामाशंकर रथ, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अरूप मोहंती और बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल शामिल रहे.
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लेखक के बारे में
By कोमल अग्रवाल
कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.
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