ना कोचिंग का सहारा, ना बड़े संसाधन, एटा के शौर्य की NEET Success story करेगी प्रेरित

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सफलता के बाद मिठाई खिलाते माँ- बाप (Neet success story)

सफलता के बाद मिठाई खिलाते माँ- बाप (Neet success story)

UP News: एटा के शौर्य प्रताप ने बड़े शहरों की महंगी कोचिंग के बिना, घर पर सेल्फ-स्टडी कर NEET परीक्षा पास की है. रोडवेज कंडक्टर के बेटे की यह कहानी साबित करती है कि मजबूत इरादे और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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UP News: कहते हैं कि सफलता के लिए बड़े शहरों की महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और लगातार मेहनत की जरूरत होती है. एटा के शौर्य प्रताप ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. रोडवेज में संविदा परिचालक के बेटे शौर्य ने बिना किसी कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में NEET परीक्षा पास कर जिले का नाम रोशन किया है. उन्होंने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी और डिजिटल संसाधनों के सहारे यह मुकाम हासिल किया. उनकी सफलता की कहानी अब जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है.

बिना कोचिंग के NEET में मिली सफलता

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में एटा के शौर्य प्रताप ने शानदार प्रदर्शन किया है. शहर के श्याम नगर निवासी शौर्य मूल रूप से अवागढ़ के पास स्थित गांव राजगढ़ के रहने वाले हैं. उनके पिता श्याम सुंदर यादव एटा डिपो में रोडवेज के संविदा परिचालक हैं, जबकि मां नीतू गृहिणी हैं. शौर्य ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर बिना किसी बड़ी कोचिंग का सहारा लिए NEET परीक्षा में सफलता हासिल की. उन्होंने घर पर रहकर किताबों और ऑनलाइन माध्यमों से अपनी तैयारी पूरी की.

बचपन से पढ़ाई में रहे मेधावी

शौर्य बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार रहे हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक शहर के बीपीएस पब्लिक स्कूल से पूरी की. 10वीं और 12वीं दोनों परीक्षाओं में वह जिला टॉपर सूची में शामिल रहे. कक्षा 9वीं से ही शौर्य ने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी. साल 2025 में 12वीं पास करने के बाद उन्होंने NEET की तैयारी शुरू कर दी.

पहली बार परीक्षा रद्द हुई, फिर भी नहीं टूटा हौसला

शौर्य ने बताया कि उन्होंने बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थानों की मदद लेने के बजाय सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया. उन्होंने किताबों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से तैयारी की. शौर्य बताते हैं कि उनके पिता हमेशा उनके लिए प्रेरणा रहे और उन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. उन्होंने कहा कि जब पहली बार NEET परीक्षा रद्द हुई थी, तब थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी. लगातार मेहनत का नतीजा रहा कि रिजल्ट आने पर उन्हें सफलता मिल गई.

NEET में हासिल की शानदार रैंक

शौर्य प्रताप ने NEET में 42360वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की है. वहीं OBC कैटेगरी में उनकी रैंक 20817 रही. वह दार्शनिक प्लूटो को अपना रोल मॉडल मानते हैं. विज्ञान के छात्र होने के बावजूद शौर्य की इतिहास पढ़ने में भी काफी रुचि है. उन्होंने बताया कि वह रोज करीब 8 घंटे पढ़ाई करते थे और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखते थे.

'सफलता के लिए मेहनत और आत्मविश्वास जरूरी'

शौर्य का कहना है कि बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता सिर्फ महंगी कोचिंग या बड़े संसाधनों से ही नहीं मिलती. अगर मेहनत, सही रणनीति और आत्मविश्वास हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

शौर्य की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों में भी मजबूत इरादों के साथ मेहनत की जाए तो सपनों को पूरा किया जा सकता है.

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