मेरठ में रिटायर्ड शिक्षक को किया डिजिटल अरेस्ट, NIA अधिकारी बनकर तुड़वाया FD,लाखों का लगाया चुना

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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध

साइबर ठगों ने NIA अधिकारी बनकर एक रिटायर्ड शिक्षक को ठगा. वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर ₹7 लाख ऐंठ लिए. यह घटना बताती है कि कैसे ठग लोगों को डराकर अपना शिकार बनाते हैं.

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UP News : आतंकियों से संबंध और बैंक खाते में 2 करोड़ रुपये आने का आरोप लगाकर साइबर ठगों ने रिटायर्ड शिक्षक को कई दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा. डर के कारण शिक्षक ने दो FD तुड़वाकर 7 लाख रुपये ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए. अब साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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NIA अधिकारी बनकर किया फोन

मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र की फूलबाग कॉलोनी निवासी रिटायर्ड शिक्षक जीत सिंह के मोबाइल पर 9 अगस्त की सुबह अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने अपना नाम रणजीत बताया और खुद को NIA अधिकारी बताया. आरोपी ने शिक्षक पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादियों से संबंध होने का आरोप लगाया. साथ ही वारंट जारी कराने की धमकी देकर उन्हें डराया गया. इसके बाद दूसरे नंबर से बात कराते हुए निर्दोष साबित होने का झांसा दिया गया.

वीडियो कॉल पर रखा डिजिटल अरेस्ट

पीड़ित के मुताबिक, साइबर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया. 9 से 12 अगस्त तक वीडियो कॉल के जरिये लगातार निगरानी की गई. उन्हें किसी रिश्तेदार या परिचित से संपर्क नहीं करने की चेतावनी दी गई. 10 अगस्त को संदीप ग्रोवर नाम के व्यक्ति ने फोन किया और कथित सीनियर अधिकारी राकेश अग्रवाल से बात कराई. ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान शिक्षक के घर और परिवार से जुड़ी कई जानकारियां भी बताईं, जिससे उन्हें आरोपियों की बात सच लगने लगी.

दो FD तुड़वाईं, RTGS से 7 लाख रुपये भेजे

लगातार डराने और दबाव बनाने के बाद शिक्षक ने 11 अगस्त को सेंट्रल बैंक, जेल चुंगी से अपनी दो FD तुड़वा दीं. इसके अगले दिन यानी 12 अगस्त को RTGS के माध्यम से 7 लाख रुपये कृष्णा नाम के व्यक्ति के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए. ठगों ने इसके बाद 18.80 लाख रुपये और मांगे. उन्होंने 3 लाख रुपये के चेक की फोटो भी हासिल कर ली. 18.80 लाख रुपये के एक अन्य चेक से रकम ट्रांसफर कराने की तैयारी थी, लेकिन 15 और 16 अगस्त को बैंक की छुट्टी होने के कारण यह रकम ट्रांसफर नहीं हो सकी.

पत्नी से बात कराई तो खुला ठगी का शक

जब शिक्षक को ठगी का शक हुआ तो उन्होंने खुद को अधिक बीमार और परेशान बताते हुए अपनी पत्नी से ठगों की बात कराई. उन्होंने आरोपियों से रकम वापस करने की मांग की. इसके बाद शिक्षक ने अपने परिचितों को पूरी घटना बताई और आरोपियों के मोबाइल नंबरों से संपर्क बंद कर दिया. 13 अगस्त को उन्होंने परिजनों को भी मामले की जानकारी दी.

चेकबुक और आधार की कॉपी भी हासिल कर चुके थे ठग

पीड़ित ने पुलिस को बताया कि साइबर ठगों ने उनके छह बैंक खातों से जुड़ी चेकबुक, आधार कार्ड की प्रतियां और अन्य जरूरी दस्तावेज WhatsApp के जरिये हासिल कर लिए हैं. इससे उन्हें इन दस्तावेजों के संभावित दुरुपयोग की आशंका है. उन्होंने पुलिस से ठगी की रकम बरामद कराने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

साइबर थाना पुलिस ने दर्ज की FIR

पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. एसपी क्राइम अवनीश कुमार के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है.

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध

इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI, NIA या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं. इसके बाद गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं. ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत परिवार और पुलिस को सूचना देना जरूरी है. Also Read : यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 की तैयारी शुरू, इस तारीख को फाइनल होंगे एग्जाम सेंटर, जानें पूरा शेड्यूल


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रवि रंजन कुमार

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By रवि रंजन कुमार

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