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किस्सा नेताजी का: जब योगी आदित्यनाथ का ऊब गया था राजनीति से मन, गुरु के कहने पर फैसला लिया वापस

Updated at : 11 Jan 2022 2:19 PM (IST)
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किस्सा नेताजी का: जब योगी आदित्यनाथ का ऊब गया था राजनीति से मन, गुरु के कहने पर फैसला लिया वापस

एक साल तक राजनीति में रहने और काम करने के अनुभव के बाद राजनीति छोड़ने का फैसला कर लिया था. 1999 में योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु से राजनीति छोड़ने की बात कही. लेकिन गुरु ने उन्हें सलाह दी.

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UP Chunav 2022: योगी आदित्यनाथ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के सीएम हैं और बीजेपी के हिंदुत्व के प्रमुख चेहरे हैं. योगी आदित्यनाथ 26 साल की उम्र में 12वीं लोकसभा के सबसे कम उम्र के सदस्य बने थे. वो गोरखपुर से लगातार पांच बार (1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के चुनावों में) सांसद निर्वाचित हुए हैं. उत्तर प्रदेश की सत्ता की बागडोर संभालने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं. एक वक्त ऐसा भी आया, जब योगी आदित्यनाथ सत्ता सुख छोड़ना चाहते थे. लेकिन, योगी आदित्यनाथ फैसले को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके थे.

गुरु की सलाह पर नहीं छोड़ सके थे राजनीति 

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आजतक के चुनावी मंच पंचायत आजतक पर बताया कि एक साल में ही उनका राजनीति से मन ऊब गया था. राजनीति में आने और लोगों के लिए काम करने के सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वो 1998 में पहली बार गोरखपुर से सांसद चुने गए थे. एक साल तक राजनीति में रहने और काम करने के अनुभव के बाद राजनीति छोड़ने का फैसला कर लिया था. 1999 में योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु से राजनीति छोड़ने की बात कही. लेकिन गुरु ने उन्हें सलाह दी.

अटल जी की सरकार गिरने से दुखी थे योगी

योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मठ में गायों के चारे और भंडारे के अनाज की व्यवस्था करते थे. 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई. इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु से प्रार्थना की थी कि वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा था कि राजनीति में मुद्दों की बात नहीं होती है. लोग झूठ बोलते हैं. लेकिन, गुरु ने योगी आदित्यनाथ को बिना किसी स्वार्थ के राजनीति में काम करने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने 1999 में चुनाव लड़ा और लोकसभा में भी पहुंचे थे.

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दीक्षा लेने के बाद मिला योगी आदित्यनाथ नाम

योगी आदित्यनाथ का जन्म पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. उन्होंने गणित में ग्रेजुएशन किया. 90 के दशक के आसपास अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने के लिए उन्होंने घर छोड़ दिया. उसी समय वो गोरखनाथ मठ के प्रमुख महंत अवैद्यनाथ के शिष्य भी बने. उन्होंने नाथ संप्रदाय के संन्यासी के रूप में दीक्षा ली. उन्हें योगी आदित्यनाथ नाम मिला. उन्हें महंत अवैद्यनाथ ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. 12 सितंबर 2014 को अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मठ की जिम्मेदारी ली. 2017 में बीजेपी की यूपी में प्रचंड जीत के बाद योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाया गया. इस बार के चुनाव में भी यूपी में सीएम योगी के नेतृत्व में लड़ रही है.

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