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यूपी चुनाव में ओवैसी की पार्टी के दम लगाने के मायने, जानें किस सियासी गणित पर काम कर रही है AIMIM

Updated at : 10 Jul 2021 9:10 AM (IST)
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यूपी चुनाव में ओवैसी की पार्टी के दम लगाने के मायने, जानें किस सियासी गणित पर काम कर रही है AIMIM

UP Vidhansabha Chunav 2022 लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) को लेकर सभी पार्टियां कमर कस चुकी हैं. जिला पंचायत चुनाव को यूपी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है. इस चुनाव के बाद से असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की काफी चर्चा हो रही है. हिंदुस्तान की एक खबर के मुताबिक यूपी के 140 विधानसभा सीटों पर लगभग 18 फीसदी मुस्लिम मतदाता है. और इन्हीं 140 में से 100 सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने चुनाव लड़ने की घोषणा की है.

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UP Vidhansabha Chunav 2022 लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) को लेकर सभी पार्टियां कमर कस चुकी हैं. जिला पंचायत चुनाव को यूपी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है. इस चुनाव के बाद से असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की काफी चर्चा हो रही है. हिंदुस्तान की एक खबर के मुताबिक यूपी के 140 विधानसभा सीटों पर लगभग 18 फीसदी मुस्लिम मतदाता है. और इन्हीं 140 में से 100 सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने चुनाव लड़ने की घोषणा की है.

एआईएमआईएम के चीफ ओवैसी ने यूपी विधानसभा चुनाव में भी अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी की है. जानकारों का मामना है कि ओवैसी काफी महत्वकांक्षी हैं. वे सुर्खियों में रहने के लिए राज्यों के विधानसभा चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. इसका फायदा उनको तेलंगाना में मिलता है और उनकी पार्टी का दबदबा बढ़ रहा है. भाजपा लगातार कहते रहती है कि विधानसभा चुनावों में ओवैसी की मौजूदगी का उनको फायदा मिलता है.

कई दूसरे राजनीतिक दल एआईएमआईएम पर आरोप भी लगाते रहे हैं कि ओवैसी की पार्टी भाजपा की डमी पार्टी है. भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए ओवैसी विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारते हैं. हालांकि ओवैसी ने हमेशा इन बातों का खंडन किया है और भाजपा पर हमलावर रुख अपनाते रहे हैं. विधानसभा चुनावों में उनके निशाने पर सत्ताधारी पार्टी तो रहती है, लेकिन जहां भाजपा की सरकार नहीं होती वहां भी वे भाजपा पर हमला करने से नहीं चूकते हैं.

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ओवैसी की पार्टी को पहली बार तेलंगाना के बाहर महाराष्ट्र में सफलता मिली है. 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र की एक सीट पर जीत दर्ज की. यूपी चुनाव में ओवैसी की भागिदारी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें एक बड़ा नेता बताते हुए उनका चैलेंज स्वीकार किया है. वहीं, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस आदि दलों ने एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताया है.

एआईएमआईएम के एक नेता का कहना है कि हम ऐसे आरोपों से नहीं डरते हैं. हमने बिहार में 2015 में हुए चुनाव में 6 सीट पर चुनाव लड़ा और सभी पर जमानत जब्त हो गयी. जबकि पार्टी ने 2020 में 20 मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ी और 5 सीटों पर कब्जा जमाया. इसी प्रकार 2017 में ओवैसी की पार्टी यूपी चुनाव में भी किस्मत आजमा चुकी है और केवल एक सीट पर जीत दर्ज की है. अब 2020 यूपी चुनाव में 100 सीटों पर एआईएमआईएम के उम्मीदवार होंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी के खाते में कितनी सीटें जाती हैं.

Posted By: Amlesh Nandan.

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