UP के सियासी अखाड़े के सबसे बड़े नेताजी, आज भी कहते हैं लोग- जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Nov 2021 4:20 PM
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह का दबदबा आज भी है. उनके पुत्र अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी को लीड कर रहे हैं. मुलायम सिंह यादव को नेताजी भी कहा जाता है. नेताजी का जन्मदिन 22 नवंबर को है. जानते हैं उनके परिवार की सियासी ताकत.
Mulaym Singh Yadav Birthday: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. 22 नवंबर को दिग्गज समाजवादी नेता, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन है.
मुलायम सिंह यादव समाजवादी नेता माने जाते हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और केंद्रीय मंत्री तक बने. दिल्ली से लखनऊ तक आज भी उनका दबदबा है. स्कूल शिक्षक से दिग्गज नेता बने मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से लोकसभा सांसद हैं. जवानी के दिनों में मुलायम सिंह यादव कुश्ती भी करते थे. कुश्ती के अखाड़े से सीखे दांव-पेंच को मुलायम सिंह यादव ने सियासी रण में आजमाया. अपने विरोधियों को राजनीति के अखाड़े में लगातार पटकनी देते रहे.
मुलायम सिंह यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा के सैफई गांव में हुआ था. 1967 में पहली बार विधायक बने मुलायम सिंह सात बार विधायक रहे. 28 साल की उम्र में जसवंत नगर सीट से सबसे कम उम्र के विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया. तीन दफा प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले मुलायम सिंह 1996 और 1998 में केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का जिम्मा भी संभाला था.
उत्तर प्रदेश के सियासी रण में नेताजी ने छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव के साथ अलग मुकाम हासिल किया. भाई के लिए शिवपाल सिंह यादव ने काफी मेहनत की. समाजवादी पार्टी को शिवपाल सिंह यादव ने गांव-घर तक पहुंचाया. जब मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखे तो शिवपाल सिंह यादव के लिए जसवंत नगर सीट छोड़ दी. आज शिवपाल सिंह यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के सुप्रीमो हैं.
मुलायम सिंह के चचेरे भाई रामगोपाल यादव भी राजनीति में हैं. उन्हें दिल्ली की राजनीति पसंद आती है. 1992 में रामगोपाल यादव राज्यसभा सांसद बने. रामगोपाल यादव आज भी राज्यसभा से सांसद हैं.
नेताजी के पुत्र अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो हैं. ऑस्ट्रेलिया की सिडनी से पढ़ाई करने वाले अखिलेश यादव 1998 में भारत लौट पड़े और पिता के रास्ते पर चलने लगे. मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज सीट अखिलेश यादव के लिए छोड़ दी. 2000 के उपचुनाव में अखिलेश यादव को जीत हासिल हुई. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने जीत हासिल की और उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली.
मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव भी सियासत के रण की माहिर खिलाड़ी हैं. अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने भी राजनीति में एंट्री की. डिंपल यादव लगातार दो बार कन्नौट सीट से लोकसभा सांसद रही हैं.
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