Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव ने यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाया सवाल, अस्पतालों की कमियां गिनाईं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Apr 2022 7:09 PM
यूपी में जब समाजवादी सरकार थी, तब मरीजों 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की थी. प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को घर से अस्पताल आने जाने के लिए 102 नम्बर एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी. बीजेपी राज में ये सेवाएं बदहाल हो गयी हैं. ना तो इन गाड़ियों के टायर बदले गए और ना ही एंबुलेंस सेवा का संख्या विस्तार हुआ है.
Lucknow: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े किये हैं. रविवार को जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चौपट है. बीजेपी सरकार ने कोरोना संकट काल में जनता को अनाथ छोड़ दिया था. उस समय की अव्यवस्था में आज भी सुधार के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं. गरीब इलाज के अभाव में मर रहा है.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि देवरिया के सरकारी अस्पताल में दवाओं के अभाव से मरीज बेहाल हैं. कन्नौज मेडिकल कॉलेज में वाटर कूलर, आरओ खराब है. मरीज पानी को तरस रहे हैं. कन्नौज के जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एक भी यूनिट निगेटिव ग्रुप का ब्लड नहीं बचा है. जरूरत पड़ने पर मरीजों को खून के लिए कानपुर और लखनऊ की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. सिद्धार्थ नगर में एनेस्थीसिया के डाक्टरों की कमी से इलाज बाधित हो रहा है.
अखिलेश यादव ने कहा कि आगरा मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों की कई जांचें ठप हैं. राजधानी लखनऊ में कहीं मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिल रही है तो कहीं डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं. तीमारदारों के गिड़गिड़ाने के बावजूद किसी डॉक्टर ने मरीज को न देखा और नहीं इलाज किया.
उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी सरकार थी, तब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का विशेष अभियान चलाया गया था. मरीजों को अस्पताल तक लाने ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की थी. प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को घर से अस्पताल आने जाने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा शुरू की गई थी. बीजेपी राज में ये सेवाएं बदहाल हो गई हैं. इन गाड़ियों के टायर तक नहीं बदले गये हैं. ना ही एंबुलेंस की संख्या बढ़ायी गयी है.
प्राइवेट महंगे नर्सिंग होम और अस्पतालों की संख्या बढ़ती जा रही है. जबकि गरीब सरकारी इलाज में दुर्व्यवस्था के शिकार हो रहे हैं. गरीब जनता परेशानी में किसी तरह जीने को मजबूर है, कोई उसको पूछने वाला नहीं है.
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