एनडी तिवारी : आखिर क्यों और किसके लिए छोड़ी कांग्रेस

91साल के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और तीन बार उत्तरप्रदेश व एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी अपने बेटे रोहित शेखर के साथ आज भाजपा में शामिल हो गये. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने आवास पर दोनों को पार्टी की सदस्यता दिलायी.एनडी तिवारी शुरू से कांग्रेसी रहे हैं. वह इंदिरा […]
91साल के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और तीन बार उत्तरप्रदेश व एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी अपने बेटे रोहित शेखर के साथ आज भाजपा में शामिल हो गये. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने आवास पर दोनों को पार्टी की सदस्यता दिलायी.एनडी तिवारी शुरू से कांग्रेसी रहे हैं. वह इंदिरा गांधी, संजय गांधी और राजीव गांधी तीनों के बहुत करीबी रहे. 1986–1987 में वह राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में विदेश मंत्री थे. 1990 में उनका कद कांग्रेस में इतना बड़ा था कि राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर उनके नाम की चर्चा थी. हालांकि पार्टी ने यह पद पीवी नरसिंह राव को सौंपा. 2007 में तिवारी को कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया था. हालांकि उनका यह कार्यकाल विवादों से भरा रहा. 2009 में एक सेक्स स्कैंडल में उनका नाम आया और उन्हें राज्यपाल का पद छोड़ना पड़ा था.
आखिर 91 साल की उम्र में एनडी तिवारी ने कांग्रेस को क्यों और किसके लिए छोड़ा? दरअसल, तिवारी ने पुत्रहित में यह बड़ा कदम उठाया है. वह अपने लिए नहीं, अपने बेटे रोहित शेखर के राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं. वह उन्हें राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं और इसके लिए पिछले दो सालों से कोशिश कर रहे हैं. इसी कोशिश के तहत 2014 के चुनाव के वक्त उन्होंने समाजवादी पार्टी से नजदीकी बढ़ायी थी. सपा ने उनके बेटे को राज्यमंत्री के दर्जा वाला ओहदा भी दिया, मगर तिवारी बेटे की राजनीतिक जमीन को पुख्ता करना चाहत हैं. वह उत्तराखंड से बेटे को विधायक बनाना चाहते हैं. राेहित हल्द्वानी या लालकुआं से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं.
रोहित शेखर एनडी तिवारी के बेटे हैं. इस बात को साबित करने के लिए 2008 में उन्होंने और उनकी मां उज्ज्वला शर्मा ने अदालत में पितृत्च वाद दायर किया था. उन्होंने दावा किया था कि एनडी तिवारी ही उसके जैविक पिता हैं. चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अदालत की निगरानी में एनडी तिवारी का ब्लड सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए लिया गया था. सेंटर फोर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायएग्नोस्टिक्स ने एनडी तिवारी, रोहित शेखर और रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा की डीएनए जांच की थी. इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली हाइकोर्ट ने एनडी तिवारी को रोहित शेखर का जैविक पिता माना था और खुद तिवारी ने उन्हें अपना बेटा स्वीकार किया था.
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