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केवल नारों से नहीं हो सकता गांव, गरीब और किसान का भला : राधामोहन सिंह

Updated at : 26 Sep 2016 9:27 PM (IST)
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केवल नारों से नहीं हो सकता गांव, गरीब और किसान का भला : राधामोहन सिंह

मथुरा : केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने आज यहां कांग्रेस या उसके किसी नेता का नाम लिए बिना सवाल खड़ा किया कि केवल नारे लगाने से ही गांव, गरीब और किसान का भला नहीं हो सकता. सिंह आज दीनदयाल धाम (नगला चंद्रभान) में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ववर्ती राजनैतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के संस्थापक […]

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मथुरा : केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने आज यहां कांग्रेस या उसके किसी नेता का नाम लिए बिना सवाल खड़ा किया कि केवल नारे लगाने से ही गांव, गरीब और किसान का भला नहीं हो सकता. सिंह आज दीनदयाल धाम (नगला चंद्रभान) में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ववर्ती राजनैतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय की 100वीं जयंती के अवसर पर उनके पैतृक गांव में आयोजित कृषि विकास मेले का उद्घाटन करने के लिए आए थे. इस अवसर पर उन्होंने दीनदयाल धाम परिसर में 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित किये जा रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय कृषक छात्रावास का शिलान्यास किया.

राजनीतिक दलों पर बोला हमला

उन्होंने किसानों के कल्याण के दावे करने वाले राजनैतिक दलों को आडे हाथों लेते हुए कहा कि देश पर 60 बरस तक राज करने वाले एक परिवार ने आखिर किसानों की भलाई के लिए ऐसा क्या किया जो आज उनके हित की बात करने का दावा कर रहा है. उन्होंने कहा कि अगर देश ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को 50 बरस पहले भी अपना लिया होता तो आज देश के किसानों की यह दुर्गति नहीं होती. सिंह ने कहा कि एक बार 1992 में जरूर इस बात पर विचार किया गया लेकिन जल्द ही उस विचार को भुला दिया गया. इसलिए अब तक अपनायी गयी व्यवस्था से किसानों का कोई भला नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि यूरोप में पनपे और फिर चीन तथा रूस तक फैला मार्क्सवाद का अब क्या हाल हो गया है, उसके फलादेश दिखाई दे रहे हैं.

भारत गांवों का देश

उन्होंने कहा कि गांधीजी भी यही कहते थे कि हिन्दुस्तान गांवों का देश है. उन्होंने 47 में अंतरिम सरकार में इसलिए गांव से आए बाबू राजेंद्र प्रसाद को कृषिमंत्री बनाया था. लेकिन बाद में सरकारों ने खेती और किसानों के बारे में फिर उस तरह नहीं सोचा गया, जैसे कि सोचा जाना चाहिए था. गरीबों के उत्थान की सारी योजनाएं उल्टी हो गयीं, जिसका परिणाम आज पूरा देश भोग रहा है. सिंह ने सवाल किया कि आजादी के 70 सालों में हम भले ही चंद्रमा और मंगल गृह तक पहुंच गये हों, किंतु देश के 6 लाख 38 हजार गांव तो आज तक वहीं के वहीं खड़े हैं. गरीबी हटाओ के नारे तो जरूर दिये गये लेकिन गरीबी हटाने की कोई ठोस योजना पर अमल नहीं किया गया.

सपा पर कसा तंज

राधामोहन सिंह ने सपा और कांग्रेस के परिवारवाद पर तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ अपने वंश को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया. किसान तब भी उपेक्षित ही रहे. कृषि मंत्री ने कहा कि एक बार शास्त्री जी ने जरुर इस बारे में ध्यान दिया था. तब उन्होंने देश पर संकट आने की स्थिति में ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया था. लेकिन उनके अलावा अन्य किसी प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं सोचा. उन्होंने कहा कि उनके बाद सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने गांवों, गरीबों और किसानों के कल्याण की कई योजनाएं प्रारंभ कीं. उन्होंने ही गांवों को देश की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जच्चा-बच्चा में कुपोषण दूर करने के लिए मातृत्व लाभ योजना, निहायत गरीबों हेतु अन्नपूर्णा योजना व अन्त्योदय जैसी अनेक योजनाएं चालू कीं.

अटल की तारीफ की

राधामोहन ने कहा कि अटल जी ने‘जय जवान-जय किसान’ के साथ ‘जय विज्ञान’ को जोडा. कृषि मंत्री ने वर्तमान सरकार द्वारा किसान एवं आम आदमी के हित के लिए संचालित सभी योजनाओं के औचित्य एवं अब तक के परिणामों का खाका खींचते हुए किसानों से परंपरागत खेती के साथ उच्च तकनीक एवं नई जानकारियों को भी आजमाने का आह्वान किया. उन्होंने बताया कि नीम कोटेड यूरिया बाजार में आने से खाद की कालाबाजारी खत्म हो गई है. दाम गिर रहे हैं. आपूर्ति की कमी नहीं हो रही. बल्कि इस खाद का प्रयोग भी कम मात्रा में करना पड़ रहा है.

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