क्या मथुरा हिंसा के बहाने उत्तरप्रदेश 2017 का मिशन पूरा कर पायेंगे अमित शाह?

Updated at : 07 Jun 2016 2:35 PM (IST)
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क्या मथुरा हिंसा के बहाने  उत्तरप्रदेश 2017 का मिशन पूरा कर पायेंगे अमित शाह?

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में चुनाव का शंखनाथ करते हुए भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह लगातार सताधारी दल समाजवादी पार्टी पर हमले कर रहे हैं. शनिवार को जहां कानपुर में शाह ने मथुरा और दलितों का मुद्दा उठाया, वहीं मंगलवार को शाह ने लखनऊ में अखिलेश सरकार पर महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ जाति विशेषव संप्रदाय विशेषके […]

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में चुनाव का शंखनाथ करते हुए भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह लगातार सताधारी दल समाजवादी पार्टी पर हमले कर रहे हैं. शनिवार को जहां कानपुर में शाह ने मथुरा और दलितों का मुद्दा उठाया, वहीं मंगलवार को शाह ने लखनऊ में अखिलेश सरकार पर महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ जाति विशेषव संप्रदाय विशेषके लोगों को देने का आरोप लगाया है.अगले साल के शुरू में होने वाला यूपी चुनाव भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण है. 2002 से ही सत्ता से बाहर रह रही भाजपा का वहां के विधान सभा चुनावों में प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है. हालांकि लोकसभा चुनाव में एक बेहतरीन रणनीति अपनाते हुए भाजपा ने 80 में से 73 सीटों पर कब्जा जमाया था. इन्हीं सीटों की बदौलत भाजपा केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बना सकी.

पिछले साल बिहार और दिल्ली में मिली करारी शिकस्‍त के बाद भाजपा अब विभिन्न राज्य में होने वाले चुनाओं में काफी सतर्कता बरत रही है. विधानसभा चुनावों के नतीजों के आधार पर अमित शाह के नेतृत्व पर कई सवाल उठे, बावजूद इसके उन्हें फिर से भाजपा की कमान सौंप दी गयी. अब उत्तर प्रदेश चुनाव अमित शाह के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गया है. मोदी सरकार ने चुनाव के मद्देनजर ही अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश से ही की है. पिछड़ी जाति के नेताओं की ताकत पर भरोसा करते हुए भाजपा ने प्रदेश में केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया है. राज्य के नवनिर्वाचित 90 जिला अध्‍यक्षों में 44 पिछड़ी और 4 दलित नेता हैं.

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मथुरा हिंसा पर अखिलेश हैं लगातार शाह के निशाने पर

मथुरा में दो जून को हुई हिंसा को भाजपा लगातार अखिलेश सरकार की नाकामी बता रही है. अमित शाह ने रामवृक्ष यादव को भी अखिलेश से ही जोड़ दिया है. इस पूरे घटनाक्रम का मुख्‍य आरोपी रामवृक्ष यादव ही है. उसी के इशारे पूर पूरी घटना को अंजाम दिया गया. शाह ने कहा थाकि रामवृक्ष के राजनीतिक संरक्षक अखिलेश के चाचा शिवपाल सिंह यादव हैं और उन्हें इस घटना का जिम्मेवार मानते हुए तत्काल मंत्री पद से बर्खास्त कर देना चाहिए. शाह ने कानपुर और बुंदेलखंड क्षेत्रों के बूथ प्रभारियों की बैठक में कहा, ‘यदि नेताजी (सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव) में जरा भी शर्म बची है तो उन्हें मंत्री शिवपाल यादव का इस्तीफा तत्काल ले लेना चाहिए.’ उन्होंने कहा था, ‘अखिलेश यादव जी, यदि आपको चाचा-भतीजा का रिश्ता बनाये रखना है तो आपको जनता से कहना चाहिए कि आपका जनता से कोई संबंध नहीं है.’

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प्रदेश अध्‍यक्ष केशव ने भी शिवपाल पर साधा निशाना

इस बीच, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया था कि मथुरा घटना में हमलावर लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव के ‘गुंडे’ थे. शिवपाल ने हालांकि इस आरोप से इंकार करते हुए कहा कि पुलिस कथित मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव को बख्शेगी नहीं. उन्होंने कहा कि घटना पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. मृतकों को लेकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए. गुरुवार को मथुरा के जवाहरबाग क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष में दो पुलिस अधिकारियों सहित कम से कम 24 लोग मारे गये. भाजपा ने घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

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रामवृक्ष के वकील ने भी शिवपाल को लपेटा

रामवृक्ष यादव के वकील तरणी कुमार गौतम ने आज शिवपाल सिंह यादव पर आरोप लगाते हुए रामवृक्ष को आर्थिक सहायता पहुंचाने का आरोप लगाया है. गौतम ने कहा कि जवाहर बाग में रामवृक्ष का 2 सालों से अवैध कब्जा था. ऐसे में सरकार तमाम दिखावा कर रही थी लेकिन बिजली पानी जैसे जरूरी चीजों को कभी भी वहां उपलब्ध होने से नहीं रोका गया. बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई भी संगठन या व्यक्ति एक सार्वजनिक जगह पर इतने दिनों तक कब्जा जमाए नहीं रख सकता. उन्‍होंने शिवपाल सिंह यादव का नाम लेकर कहा कि वे रामवृक्ष को आर्थिक सहायता पहुंचाते थे और उन्हें राजनीतिक संरक्षण भी प्रदान करते थे.

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वाचालों पर लगाम लगा पायेगी भाजपा?

उत्तर प्रदेश में भाजपा जहां दलितों, पिछड़ों और विभिन्न समुदाय के लोगों को जोड़कर सत्ता पर काबिज होना चाहती है, वहीं कुछ वाचाल नेता लगतार भड़काउ बयान देकर भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करने का काम करते रह रहे हैं. साक्षी महाराज, योगी आदित्यनाथ, साध्‍वी निरंजना ज्योति और साध्‍वी प्राची के बयानों से कई बार राजनीतिक भूचाल आया है. ऐसे में विभिन्‍न समुदाय के लोगों का विश्‍वास हासिल करने के लिए भाजपा को इस एजेंडे पर भी काम करने की जरूरत पड़ सकती है. उत्तर प्रदेश में भाजपा को जीत की दरकार एक और कारण से हो सकती है.

छत्तीसगढ और मध्‍य प्रदेश में भाजपा पिछले 13 सालों से सत्ता में है. ऐसे में इन राज्यों में बदलाव की एक लहर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है. इस नुकसान का अंदाजा शायद भाजपा को है, इसलिए अपनी पूरी ताकत छोंककर भाजपा उत्तर प्रदेश में अपना समीकरण ठीक करने में जुटी है. एक मई के चुनावी बिगुल के बाद भाजपा अध्‍यक्ष का उत्तर प्रदेश दौरा इस बात की ओर इशारा करता है कि पिछले साल मिली शिकश्‍त से भाजपा कुछ सबक ले चुकी है. उत्तर प्रदेश की बारिकियों को समझते हुए शाह अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं.

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