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सपा में वापसी की अटकलों के बीच आरटीओ विवाद से चर्चा में आयीं जयप्रदा

Updated at : 30 May 2015 11:25 AM (IST)
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सपा में वापसी की अटकलों के बीच आरटीओ विवाद से चर्चा में आयीं जयप्रदा

लखनऊ : सपा में अमर सिंह व जयाप्रदा की वापसी को लेकर जारी अटकलों के बीच एक बार फिर ये दोनों चर्चा में आ गये हैं. हाल के दिनों में सपा के वरिष्ठ नेताओं की ओर से दिए गये बयानों पर गौर पर करें तो इस बात के संकेत मिलने लगे हैं. लोकसभा चुनाव में […]

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लखनऊ : सपा में अमर सिंह व जयाप्रदा की वापसी को लेकर जारी अटकलों के बीच एक बार फिर ये दोनों चर्चा में आ गये हैं. हाल के दिनों में सपा के वरिष्ठ नेताओं की ओर से दिए गये बयानों पर गौर पर करें तो इस बात के संकेत मिलने लगे हैं. लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद से सपा को मजबूत करने को लेकर मंथन जारी है. इसी कड़ी में पुराने सपाईयों को जोड़ कर पार्टी को फिर से संगठित करने का प्रयास किया जा रहा है. अमर सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है. सपा में रहते हुए अमर सिंह कई बार अपने विवादित बयानों के साथ मीडिया की सुर्खियों में छाये रहते थे. इसी तरह सपा में रहते हुए जयाप्रदा भी हमेशा विवादों में छाई रहती थी. रामपुर में सपा नेता आजम खां एवं जयाप्रदा के बीच लोकसभा चुनावों के दौरान जिस तरह से एक दूसरे पर तीखी बयानबाजी की गयी थी, आज भी उसे यूपी की जनता भूल नहीं पायी है. वहीं, बीते दिनों देर रात सूबे के एक आरटीओ दफ्तर खोलकर उनके लाइसेंस बनाने की वजह से एक बार फिर जया सुर्खियों में छा गई है.

समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने बीते दिनों पार्टी में अमर सिंह और जया प्रदा की वापसी के संकेत देते हुए कहा कि सपा के दरवाजे कभी किसी के लिए बंद नहीं होते हैं. इतना ही नहीं शिवपाल यादव ने तो यहां तक कह डाला कि अमर सिंह से मुलायम सिंह और उनकी बात लगातार होती है और अमर सिंह जब चाहेंगे पार्टी में दाखिल हो जाएंगे. पिछले साल भी अमर सिंह के सपा में वापसी की चर्चा तब हुई थी जब अगस्त 2014 में जनेश्वर मिश्र जयंती के मौके पर उन्होंने मुलायम सिंह के साथ मंच साझा किया था. हालांकि सपा के कद्दावर नेता एवं अमर सिंह के धुर विरोधी आजम खान इन खबरों का लगातार खंडन करते रहे है. वहीं, पिछले दिनों अमर सिंह की वापसी को लेकर शिवपाल के ताजा बयान ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के एक खेमे में खलबली मचा दी है.

अमर सिंह की वापसी पर शिवपाल के बोल…

शिवपाल ने कहा कि अमर सिंह से हमारे पारिवारिक संबंध हैं. उनके नेताजी से भी अच्छे संबंध हैं, बातचीत भी होती रहती है. अच्छे संबंध हैं लेकिन वो पार्टी में नहीं हैं. मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के दौरान अमर सिंह एवं जया प्रदा ने अजित सिंह का दामन थामा था. सपा मुखिया मुलायम सिंह से विवाद के बाद राज्यसभा सांसद अमर सिंह के साथ-साथ जया प्रदा को पार्टी से निकाल दिया गया था. जया प्रदा सपा के टिकट पर दो बार रामपुर से सांसद रह चुकी हैं. समाजवादी पार्टी में रह चुकीं जया प्रदा और अमर सिंह ने 10 मार्च 2014 को अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम लिया था. शिवपाल यादव ने पूर्व महासचिव अमर सिंह और जयाप्रदा के सपा में लौटने को लेकर चल रही अटकलों पर कहा कि वह पार्टी में कब आएंगे, यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है. अभी तक उन्होंने ऐसी कोई इच्छा नहीं जताई है. शिवपाल ने यह भी कहा कि अमर सिंह के लिए पार्टी के दरवाजे कभी बंद ही नहीं रहे, यह हमेशा खुले रहेंगे. शिवपाल ने कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की शुक्र वार को भी अमर सिंह से बातचीत हुई है यह बात होती रहती है, क्योंकि उनसे प्रेम का संबंध है. पर वह अभी तक न तो पार्टी में आए हैं और न कोई दावेदारी की है.

जया प्रदा व आरटीओ दफ्तर विवाद…

सपा में वापसी के अटकलों के बीच जया प्रदा एक बार फिर से चर्चा में हैं. चर्चा की वजह देर रात आरटीओ दफ्तर खोलकर उनके लाइसेंस बनाने की वजह से जुड़ी हैं. जयाप्रदा बुधवार की रात अपना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आरटीओ दफ्तर पहुंची. उनके लिए नियमों को तोड़ रात 9.30 बजे तक दफ्तर खुला रखा गया और संबंधित अधिकारी ने जरूरी कार्रवाई पूरी कराई और जयाप्रदा को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया. रामपुर की पूर्व सांसद को महज कुछ मिनट में ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर दे दिया गया. ऐसे में एक बार फिर वह सुर्खियों में छा गई हैं.

जयाप्रदा से जुड़ी कुछ अहम बातें…

बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि जयाप्रदा का असली नाम ललिता रानी है. फिल्मों में आने के बाद ललिता रानी जया प्रदा हो गईं. ललिता उर्फ जया का जन्म 3 अप्रैल 1962 में आंध्र प्रदेश के राजाहमुंडरी जिले में हुआ था. जया के पिता कृष्णा राव तेलुगू फिल्मों के फाइनेंसर थे. फिल्मी बैकग्राउंड होने की वजह से ही जया फिल्मों की तरफ आकृष्ट हुईं. जया के फिल्मी कैरियर की शुरु आत तेलुगू ़फिल्म भूमिकोसम से हुई. इसमें जया का छोटा सा रोल था. जयाप्रदा की शादी 1986 में श्रीकांत नहाटा से हुई, जो पहले से शादीशुदा थे. नहाटा के पहली पत्नी से तीन बच्चे थे. शादी पर कई विवाद उठे, क्योंकि जयाप्रदा से शादी करने से पहले उन्होंने पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया था. जयाप्रदा-श्रीकांत के कोई संतान नहीं है, लेकिन जब वो उनसे अलग हुईं, तब उन्होंने बच्चे की चाहत शब्दों में प्रकट की थी. फिल्मी करियर को चरम पर पहुंचाने के बाद जयाप्रदा तेलुगू देसम पार्टी में 1994 में शामिल हुईं. बाद में तेदेपा छोड़कर वह 2000 के आसपास सपा में शामिल हुईं. 2004 में उन्होंने रामपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और 85 हजार वोटों से जीतीं. पांच साल तक सांसद रहने के बाद 2009 में एक बार फिर जयाप्रदा चुनाव जीतीं. जब अमर सिंह सपा से अलग हुए तो जया भी उनके साथ अलग होकर लोकदल पार्टी में शामिल हो गईं.

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