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मुलायमवाद में तब्दील हुयी समाजवादी पार्टी

Updated at : 21 Nov 2014 7:35 PM (IST)
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मुलायमवाद में तब्दील हुयी समाजवादी पार्टी

– राजेन्द्र कुमार लखनऊ: डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की विचारधारा पर चलने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) में भी अब व्यक्तिवाद हावी होते दिखने लगा है. रामपुर में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का राजशाही अंदाज में शुक्रवार को मनाया जा रहा 75वां बर्थ-डे इसका सबूत है. यह आयोजन लोहिया के विचारों पर चलने वाली सपा […]

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– राजेन्द्र कुमार

लखनऊ: डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की विचारधारा पर चलने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) में भी अब व्यक्तिवाद हावी होते दिखने लगा है. रामपुर में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का राजशाही अंदाज में शुक्रवार को मनाया जा रहा 75वां बर्थ-डे इसका सबूत है. यह आयोजन लोहिया के विचारों पर चलने वाली सपा के मुलायमवाद में तब्दीली होने का मजबूत इशारा है. जिसे लेकर सपा के विरोधी यह कहने से चूक नहीं रहे कि मुलायम सिंह का अपने जन्मदिन पर इग्लैंड से आयी बग्घी की सवारी करना और केक का कटना समाजवादी सोच नहीं है बल्कि अमर सिंह का मुलायमवाद है, जिसे आजम खां पूरा करने में जुटे हुए हैं.
22 साल पहले मुलायम सिंह द्वारा बनायी गई सपा के मुलायमवाद में तब्दील होने का ही यह नतीजा है कि शुक्रवार को आजम खां रामपुर में शाही अंदाज में मुलायम सिंह का जन्मदिन मनाने पर हो रहे खर्च के सवाल पर भड़क गए. गुस्से में आजम ये कहने लगे कि तालिबान के पैसे से सपा प्रमुख का शाही जन्मदिन मनाया जा रहा है.
डा.लोहिया की विचारधारी वाली सपा के किसी नेता से ऐसे उत्तर की कल्पना किसी समाजवादी सोच के व्यक्ति को नहीं रही होगी. ऐसे जवाब अभी तक व्यक्तिवादी दल के नेता ही देते रहे हैं. अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खां का यह जवाब भी सूबे की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों को अखरा है. लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीतिक शास्त्र के प्रोफेसर रहे डा. रमेश दीक्षित कहते हैं कि सपा में लोहियावाद की जगह मुलायमवाद हावी हो गया है. मुलायमवाद माने नेताजी को खुश रखो, भव्यता के साथ उनका जन्मदिन मनाओ. मंच पर उनकी शान में कसीदे पढ़ो, उन्हें रफीकुल मुल्क कहो, फिर जो पार्टी का मुखिया कहे उसे बिना किसी विरोध के पूरा करने में जुट जाओ.
रमेश दीक्षित कहते हैं कि डा. लोहिया की विचारधारा यह नहीं थी. खुद मुलायम सिंह ने भी कभी दिखावा नहीं किया. गरीबों से मिलकर उनकी दिक्कतों को दूर करने में आनाकानी नहीं की. हमेशा सादगी के साथ रहे और सादगी से ही अपना जन्मदिन मनाया, पर 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुलायम विक्टोरिया बग्घी की सवारी करने और 75 किलो का केक काटने को क्यों तैयार हुए यह समझ से परे है! लगता है कि पार्टी में हावी हो रहे व्यक्तिवाद के चलते मुलायम सिंह ने भी गायत्री प्रजापति और आजम खां सरीखे हितैषियों को पार्टी व सरकार में अपनी मनमानी करने की छूट दे दी है जिसके चलते गायत्री प्रजापति ने अपने घर पर लोगों से‍ मिलना बंद कर दिया है तो आजम खां ने मुलायम सिंह के जन्मदिन को भव्य बनाने के लिए समूचे रामपुर में सजावट करा डाली है.
आजम खां को सपा प्रमुख से मिले इसी आशीर्वाद के चलते शुक्रवार को समूची अखिलेश सरकार रामपुर पहुंच गयी. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित उनकी सरकार के अधिकांश मंत्री रामपुर में हैं, सरकार के बड़े अधिकारी भी वहां मौजूद हैं और शनिवार की शाम तक यह सभी लोग रामपुर में रहेंगे. शुक्रवार की रात जब बग्धी में बैठकर मुलायम सिंह जौहर विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और रा‍त 12 बजे के करीब 75 किलो का केट काटेंगे तो यह अधिकारी और मंत्री उन्हें हैप्पी बर्थ-डे कहने के लिए मौजूद रहेंगे.
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन पर भी ऐसा ही नजारा होता था. मायावती लखनऊ और दिल्ली में केक काटकर जन्मदिन मनाती थीं जिसके चलते सरकार के मायावती के जन्मदिन पर अधिकारी और मंत्री आधा दिन लखनऊ में रहने के बाद दिल्ली जाते थे और दिल्ली में मायावती के जन्मदिन पर आयोजित केक काटू कार्यक्रम में शामिल होते थे. मायावती अपना जन्मदिन आर्थिक सहयोग दिवस के रूप में मनाती थी, जिसे लेकर सपा, भाजपा और कांग्रेस सहित तमाम पार्टियां उनका विरोध करती थी.
परन्तु अब इतिहास के इस अध्याय को भुलाकर सपा प्रमुख मुलायम सिंह का जन्मदिन समता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है लेकिन रामपुर में मुलायम सिंह के जन्मदिन पर हो रहा खास आयोजन प्रदेश भर में आयोजित होने वाले समता दिवस को ढक रहा है, जिसे लेकर यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि आखिर किस समाजवाद की परिकल्पना के तहत सपा प्रमुख मुलायम सिंह का जन्मदिन इतना भव्य तरीके से मनाया जा रहा है ! खुद को सियासत का माहिर करार देने वाले नेता ऐसा आयोजन कर पार्टी की कौन सी छवि जनता के बीच उकेरने की कोशिश में हैं? क्या उन्हें लगता है कि बीमारू राज्य में शुमार यूपी के रहने वाले लोग ऐसे आयोजन से प्रसन्न होंगे ! क्या ऐसे आयोजनों से समाजवादी पार्टी का वोट बैंक मजबूत होगा? लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीतिक शास्त्र विभाग के प्रोफेसर आशुतोष मिश्र कहते हैं कि इस सवालों का जवाब सूबे की जनता सपा नेताओं से मांगेगी और यह भी पूछा जाएगा कि नेताजी के शाही अंदाज में मनाए गए जन्मदिन पर कितना खर्च हुआ और यह खर्च का भुगतान किसने किया. जिसे बताने से आजम खां अभी इंकार कर रहे हैं और अनर्गल बयान देकर मामले का रूख बदलने का प्रयास कर रहे हैं. मुलायमवाद में तब्दली हुई सपा में यह नया बदलाव है जो धीरे-धीरे लोहियावाद को किनारे करेगा, जैसे मुलायम सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह और चन्द्रशेखर सरीखे नेताओं को हाशिये पर लाकर किया था. यूपी की राजनीति पर नजर रखने वाले विद्वान सुभाष मिश्र का यह कहना है.
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