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मायावती 14 साल के बाद फिर लड़ेंगी लोकसभा चुनाव, सपा के साथ गठबंधन पर मौन

Updated at : 11 Jul 2018 9:50 PM (IST)
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मायावती 14 साल के बाद फिर लड़ेंगी लोकसभा चुनाव, सपा के साथ गठबंधन पर मौन

।। हरीश तिवारी ।। लखनऊ : अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए राज्य की सियासी जमीन गर्म होने लगी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब बसपा प्रमुख मायावती के लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा है. हालांकि अभी दोनों के बीच किसी गठबंधन को लेकर […]

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।। हरीश तिवारी ।।

लखनऊ : अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए राज्य की सियासी जमीन गर्म होने लगी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लोकसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब बसपा प्रमुख मायावती के लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा है. हालांकि अभी दोनों के बीच किसी गठबंधन को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है.

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर राज्य में सभी राजनैतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. भाजपा अध्यक्ष राज्य के लगातार दौरे पर हैं तो पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी जाकर जनता के बीच संवाद स्थापित किया.

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जबकि सपा भी भाजपा को हराने के लिए बसपा के साथ गठबंधन करने की तैयारी में हैं. अब इस मामले में बहुजन समाज पार्टी भी पीछे नहीं हैं. बसपा के अंतरखाने से जो खबरें आ रही हैं, उसके मुताबिक मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव में फिर से मैदान में होंगी.

मायावती आखिरी बार साल 2004 में लोकसभा सांसद चुनी जा चुकी हैं. ऐसा माना जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर से लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. मायावती करीब 14 साल के बाद चुनाव लडेंगी. जबकि इसके वह या तो विधानपरिषद की सदस्य रही या फिर राज्यसभा की सांसद. कुछ महीने पहले उन्होंने राज्यसभा से यह कहकर इस्तीफा दे दिया था कि उन्हें संसद में दलित होने के नाते बोलने नहीं दिया जाता है. हालांकि राज्यसभा सभापति ने इस आरोप को खारिज किया था.

हालांकि बिहार की राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव ने उन्हें फिर से राज्यसभा में भेजने का आफर दिया था, लेकिन मायावती ने उनकी इस बात को नकार दिया. बसपा प्रमुख मायावती 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद चुनी गयी थी और उन्होंने अंतिम बार 2004 में अंबेडकरनगर से लोकसभा चुनाव लड़ा और यह सीट जीतने में कामयाब रही.

असल में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा द्वारा समाजवादी पार्टी को दिए समर्थन के बाद सपा यह दोनों सीटें जीतने में कामयाब रही. फिर कैराना में भी हुए लोकसभा उपचुनाव में रालोद को भी सपा और बसपा ने समर्थन दिया. जिसके कारण रालोद यहां पर जीतने में सफल रहा. जिसके बाद राज्य का राजनैतिक परिदृश्य बदल सा गया है.लिहाजा अब इस बात की उम्मीद की जा रही है कि लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच गठबंधन होगा. लिहाजा दोनों दलों के लिए यह फायदे का सौदा हो सकता है. मायावती जहां पार्टी के अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं तो अखिलेश के हाथ में सपा की कमान आने के बाद वह राज्य की सत्ता से बाहर हो चुकी है.

सपा के लोकसभा में सात सांसद हैं तो बसपा का कोई भी सांसद लोकसभा में नहीं है. मायावती अपनी रणनीति के तहत या तो विधानपरिषद में रही या फिर राज्यसभा में. जिसके चलते वह विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी को पूरी तरह से समय दे सकें. लेकिन अब मायावती अपनी रणनीति में बदलाव करने जा रही हैं.क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी चुनाव में मिली करारी शिकस्त से पार्टी का मनोबल गिरा है. लिहाजा कैडर में जोश भरने के लिए मायावती खुद चुनावी मैदान में उतरना चाहती हैं. वहीं अखिलेश यादव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे कन्नौज सीट से चुनाव लड़ेंगे.

मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ेंगे. कन्नौज सीट से वर्तमान में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं. अखिलेश बार-बार कहते रहे हैं कि 2019 में सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़ेगी, यह तय है. सीटों का बंटवारा सही वक्त पर किया जाएगा.

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